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सुप्रीम कोर्ट: 18-44 आयुवर्ग के लिए केंद्र की टीकाकरण नीति को बताया मनमाना और तर्कहीन

राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 02 Jun 2021 08:51 PM IST

सार

शीर्ष अदालत का मानना है कि एक मई को शुरू की गई 'उदार टीकाकरण नीति' केंद्र और राज्यों के बीच जिम्मेदारियों के संवैधानिक संतुलन में टकराव वाली बात है क्योंकि 18-45 वर्ष आयु के बीच के व्यक्तियों को टीका लगाने का पूरा बोझ राज्यों पर छोड़ दिया गया है।
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सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने 18-44 आयु वर्ग के लोगों के लिए केंद्र सरकार की कोविड-19 टीकाकरण नीति (फेज-तीन) को मनमाना और तर्कहीन करार दिया है। शीर्ष अदालत ने सरकार से इस नीति के पीछे की सोच को जानना चाहा है।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'पहले दो चरणों के तहत आने वाले समूहों के लिए निशुल्क टीकाकरण और बाद में 18-44 आयु वर्ग के व्यक्तियों के लिए राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों और निजी अस्पतालों को भुगतान करने की जिम्मेदारी डालने की केंद्र सरकार की नीति प्रथम दृष्टया मनमाना और तर्कहीन है।'

 
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह बताने के लिए कहा कि 2021-2022 के केंद्रीय बजट में टीकों की खरीद के लिए निर्धारित 35,000 करोड़ रुपये में अब तक कितने खर्च किए जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आखिर क्यों नहीं इस फंड का इस्तेमाल 18-44 आयु वर्ग के लोगों को निशुल्क टीकाकरण करने के इस्तेमाल किया जाना चाहिए?
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