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गंभीर आपराधिक मामलों में रजामंदी के बावजूद भी जारी रहेगा मुकदमा: SC

Thu, 05 Oct 2017 10:18 AM IST
टीम डिजिटल अमर उजाला
टीम डिजिटल अमर उजाला Updated Thu, 05 Oct 2017 10:18 AM IST
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supreme court says cases like heinous crime should not quash if parties settle the dispute

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के हाईकोर्ट्स को निर्देश दिए हैं कि भले ही गंभीर अपराधों में दोनों पार्टियां रजामंदी का रास्ता अपना ले, लेकिन वे ऐसे मुकदमों को सुनवाई के लिए जारी रखें। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा की पीठ ने ये फैसला लिया है और कहा कि गंभीर अपराध जैसे रेप, मर्डर, डकैती और वित्तीय चोरी के मामलों को हल्के में न लिया जाए। 

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कोर्ट के मुताबिक भले ही फरियादी और आरोपी पक्ष कोर्ट के बाहर रजामंदी करके मामले को खत्म कर लें, लेकिन कोर्ट की कार्यवाही पूरी होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं, इसलिए इन पर फैसला आना बेहद जरूरी है। 
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रेप, मर्डर और डकैती के अलावा वित्तीय क्षेत्र से जुड़े गंभीर अपराधों पर भी मुकदमा जारी रखने के पक्ष में भी कोर्ट दिखा। कोर्ट ने कहा कि गंभीर वित्तीय मामलों में दोनों पक्ष अगर रजामंदी कर लेते हैं तो आरोपी बिना सजा पाए कानून के शिकंजे से बच जाता है और यह देश की आर्थिक रीढ़ की हड्डी को बड़ा नुकसान पहुंचाता है।
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दरअसल, जमीन विवाद का एक मामला कोर्ट तक पहुंचा जहां आरोपियों ने अपने खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर रद्द किए जाने की मांग की। उनका कहना था कि फरियादी पक्ष ने उनसे रजामंदी कर ली है इसलिए उन्हें राहत दी जाए। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि भले ही फरियादी पक्ष पीछे हटना चाहता हो पर कोर्ट अपनी कार्यवाही पूरी करेगा।

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