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Banke Bihari: यूपी सरकार के अध्यादेश से गठित समिति को निलंबित करेगा सुप्रीम कोर्ट, कहा- नई कमेटी बनाएंगे
Fri, 08 Aug 2025 02:51 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 08 Aug 2025 02:51 PM IST
सार
मंदिर के प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह एक और समिति गठित करेगा, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे। समिति में सरकारी अधिकारी और मंदिर के पारंपरिक संरक्षक गोस्वामियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बांके बिहार मंदिर मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश के जरिए नियुक्ति समिति को निलंबित करने के लिए वे जल्द ही आदेश पारित करेंगे। यह समिति बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन के लिए बनाई गई है।
उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनेगी नई समिति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए वे याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय जाने को कहेंगे। जब तक उच्च न्यायालय इस मामले का फैसला नहीं सुना देता, तब तक अध्यादेश से गठित समिति निलंबित रहेगी। इस बीच, मंदिर के प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए, न्यायालय ने कहा कि वह एक और समिति गठित करेगा, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे। समिति में सरकारी अधिकारी और मंदिर के पारंपरिक संरक्षक गोस्वामियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
ये भी पढ़ें- Supreme Court: 'त्रासदी झेलने वाली एअर इंडिया को ही निशाना क्यों बनाना?' सुरक्षा ऑडिट की मांग वाली अर्जी खारिज
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सुनवाई पर लगाई रोक
जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इसे लेकर कल आदेश अपलोड किया जाएगा। पीठ ने अध्यादेश को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सुनवाई पर भी रोक लगाने का आदेश पारित किया। पीठ ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि इस मामले को एक खंडपीठ को सौंप दिया जाए, क्योंकि कानूनों की संवैधानिकता से संबंधित मामलों की सुनवाई खंडपीठों द्वारा की जाती है।
क्या है पूरा मामला
बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा विवाद मंदिर के सेवायतों के दो संप्रदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहा है। लगभग 360 सेवायतों वाले इस मंदिर का प्रबंधन ऐतिहासिक रूप से स्वामी हरिदास जी के गोस्वामी वंशजों और अनुयायियों द्वारा निजी तौर पर किया जाता है। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2023 के आदेश में संशोधन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर के धन का उपयोग कॉरिडोर विकास के लिए मंदिर के आसपास की 5 एकड़ भूमि अधिग्रहित करने की अनुमति दी, इस शर्त पर कि अधिग्रहित भूमि देवता के नाम पर पंजीकृत होगी। हाल ही में, राज्य ने 2025 का अध्यादेश जारी किया, जिसका उद्देश्य मंदिर का बेहतर प्रशासन है। अध्यादेश के तहत, मंदिर का प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की जिम्मेदारी 'श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास' द्वारा संभाली जाएगी। 11 न्यासी मनोनीत किए जाएंगे, जबकि अधिकतम 7 सदस्य पदेन हो सकते हैं।
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उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनेगी नई समिति
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए वे याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय जाने को कहेंगे। जब तक उच्च न्यायालय इस मामले का फैसला नहीं सुना देता, तब तक अध्यादेश से गठित समिति निलंबित रहेगी। इस बीच, मंदिर के प्रशासन को सुनिश्चित करने के लिए, न्यायालय ने कहा कि वह एक और समिति गठित करेगा, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश करेंगे। समिति में सरकारी अधिकारी और मंदिर के पारंपरिक संरक्षक गोस्वामियों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सुनवाई पर लगाई रोक
जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इसे लेकर कल आदेश अपलोड किया जाएगा। पीठ ने अध्यादेश को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की सुनवाई पर भी रोक लगाने का आदेश पारित किया। पीठ ने मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि इस मामले को एक खंडपीठ को सौंप दिया जाए, क्योंकि कानूनों की संवैधानिकता से संबंधित मामलों की सुनवाई खंडपीठों द्वारा की जाती है।
क्या है पूरा मामला
बांके बिहारी मंदिर से जुड़ा विवाद मंदिर के सेवायतों के दो संप्रदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहा है। लगभग 360 सेवायतों वाले इस मंदिर का प्रबंधन ऐतिहासिक रूप से स्वामी हरिदास जी के गोस्वामी वंशजों और अनुयायियों द्वारा निजी तौर पर किया जाता है। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2023 के आदेश में संशोधन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को मंदिर के धन का उपयोग कॉरिडोर विकास के लिए मंदिर के आसपास की 5 एकड़ भूमि अधिग्रहित करने की अनुमति दी, इस शर्त पर कि अधिग्रहित भूमि देवता के नाम पर पंजीकृत होगी। हाल ही में, राज्य ने 2025 का अध्यादेश जारी किया, जिसका उद्देश्य मंदिर का बेहतर प्रशासन है। अध्यादेश के तहत, मंदिर का प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की जिम्मेदारी 'श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास' द्वारा संभाली जाएगी। 11 न्यासी मनोनीत किए जाएंगे, जबकि अधिकतम 7 सदस्य पदेन हो सकते हैं।