सुप्रीम कोर्ट ने कहा- क्यों न एसएससी परीक्षा 2017 निरस्त कर दी जाए, अगली सुनवाई 13 नवंबर को
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि क्यों नहीं कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) परीक्षा, 2017 को रद्द कर दिया जाए और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) या सीबीएसई द्वारा परीक्षा फिर से आयोजित कराई जाए? शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें लगता है कि छात्रों के हितों के मद्देनजर ऐसा करना ही न्यायोचित होगा। हालांकि शीर्ष अदालत ने अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। मालूम हो कि शीर्ष अदालत पहले ही परीक्षा परिणाम घोषित करने पर रोक रखी है।
न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा है कि यह पता लगाना बेहद मुश्किल है कि उस दोषपूर्ण परीक्षा में असली लाभार्थी कौन है। कोई भी अदालत या एजेंसी यह पता नहीं लगा सकती। ऐसे में हमारा मानना है कि उस परीक्षा का निरस्त कर दिया जाना चाहिए और दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पूर्ण रूप से परीक्षा को निरस्त करना उचित नहीं होगा। इस पर पीठ ने कहा कि क्या आपने सीबीआई की रिपोर्ट देखी है। पीठ ने सरकार को रिपोर्ट पर गौर करने केबाद रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है। 13 नवंबर को अदालत इस पर विस्तृत सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्ट्या साक्ष्यों पर गौर करने के बाद हमने परीक्षा परिणाम घोषित करने पर रोक लगाई थी। पीठ ने कहा कि कभी-कभी यह संदेश देना जरूरी हो जाता है कि जो लोग इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो, उन्हें लाभ न पहुंचे।
पीठ ने कहा कि हम समझ सकते हैं कि कुछ छात्र रात-दिन परीक्षा की तैयारी करते हैं लेकिन अदालत पेपर लीक प्रकरण के लाभार्थियों को कतई मौका नहीं दे सकती। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने भी परीक्षा को निरस्त करने के प्रस्ताव को सही बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
मालूम हो कि सीबीआई की दूसरी स्टेटस रिपोर्ट को देखने के बाद गत 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विभाग व मंत्रालयों में कर्मचारियों की भर्तियों केलिए वर्ष 2017 में आयोजित कर्मचारी चयन आयोग(एसएससी) की परीक्षा का परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्ट्या परीक्षा दोषपूर्ण नजर आती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह लोगों को एसएससी द्वारा वर्ष 2017 में आयोजित दोषपूर्ण संयुक्त स्नातक स्तर (सीजीएल) और संयुक्त सीनियर सेकेंडरी स्तर (सीजीएसएल) की परीक्षाओं का लाभ लेने की इजाजत नहीं दे सकता। मालूम हो कि इस परीक्षा के पेपर लीक हो गए थे और सोशल मीडिया द्वारा अभ्यर्थियों के पास पहुंच गए थे।