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लोग मर रहे हैं, यहां पिकनिक जैसी बात नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

Fri, 08 Apr 2016 08:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 08 Apr 2016 08:07 AM IST
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supreme court said this is not a matter of picnic here people are dying
सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को लगाई फटकार

सूखे को लेकर गंभीरता न दिखाने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा और गुजरात सरकार को जमकर फटकार लगाई। बृहस्पतिवार को शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि सूखे के कारण लोग मर रहे हैं, इसकेलिए पिकनिक मनाने जैसी बात नहीं है।

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पीठ ने इस बात पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि बारिश कम होने केबावजूद हरियाणा ने खुद को सूखाग्रस्त राज्य घोषित नहीं किया, जो किसी प्रांत को सूखाग्रस्त घोषित करने का मुख्य संकेतक है। शीर्ष अदालत ने आधे-अधूरे और पुराने आंकड़े पेश करने पर हरियाणा सरकार से कहा कि कुछ गंभीरता दिखाइए।
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हरियाणा सरकार द्वारा बारिश के आंकड़े पेश न करने, राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने के अलग मानक बताने और केंद्र से भिन्न आंकड़े बताने पर न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। पीठ ने हरियाणा से कहा कि कहां है आपके बारिश के वह आंकड़े, जो आपको बताने के लिए कहा गया था।
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पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि आपकेलोग गंभीर नहीं हैं। कई सुनवाई हो चुकी है लेकिन आप गंभीर नहीं हुए। वास्तव में, राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने के पीछे हरियाणा सरकार की ओर से पेश वकील का तर्क था कि हरियाणा में पानी की कमी नहीं है। उन्होंने कहा, कैनाल और भूमिगत जल हमारे यहां पर्याप्त है। हमारे यहां पैदावार कम नहीं हुई है।

हरियाणा-केन्द्र सरकार के आंकड़ों में अंतर

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केन्द्र सरकार के रवैये पर जताई कड़ी चिंता

पीठ ने हरियाणा सरकार द्वारा दिए आंकड़ों और केंद्र सरकार के दिए आंकड़ों में अंतर भी भारी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि या तो हरियाणा सरकार गलत कह रही है या केंद्र सरकार। ऐसे में किस आंकड़े पर भरोसा किया जाए। पीठ ने पाया कि दोनों के आंकड़ों में बारिश में 30 फीसदी से अधिक कमी है। जबकि केंद्र की नियमावली में साफ है कि अगर बारिश 25 फीसदी से कम हो तो, उसे सूखाग्रस्त घोषित करना चाहिए।

वहीं केंद्र सरकार के रवैये पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहीं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) पिंकी आनंद के मौजूद नहीं होने पर पीठ ने कहा कि क्या हम बेकार बैठे हैं। क्या हम दो जज घड़ी देखने के लिए बैठे हैं। वास्तव में एएसजी केजूनियर ने पीठ को बताया कि पिंकी आनंद दूसरी अदालत मेंजिरह कर रही है।

बाद में एएसजी पिंकी आनंद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सूखाग्रस्त प्रांत घोषित करना राज्य का काम है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नियमावली महज सुझाव होती है। राज्यों के लिए यह जरूरी नहीं होता। उन्होंने कहा कि चूंकि हमारे में देश में विविधता है इसलिए सभी राज्यों के अलग-अलग मानक है।

इस पर पीठ ने कहा कि नियमावली में एकरूपता होनी चाहिए और कमोवेश सभी राज्यों को इस पर अमल करना चाहिए। पीठ ने सरकार से कहा कि उनके रवैये के कारण सूखा से पीड़ितों को सहायता से महरूम नहीं किया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार की भी लगाई क्लास

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गुजरात सरकार की भी जमकर क्लास लगाई - फोटो : file photo

इसकेअलावा पीठ ने देरी से राज्य को सूखाग्रस्त घोषित करने पर गुजरात सरकार की भी जमकर क्लास लगाई। गुजरात सरकार द्वारा देरी की कई वजहें बताई गई। इनमें मैनपावर की कमी और राज्य में स्थानीय निकाय केचुनावों को भी विलंब का कारण बताया गया। अदालत स्वराज अभियान द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि सूखाग्रस्त राज्य प्रभावित लोगों को पर्याप्त सहायता प्रदान नहीं कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना, बिहार, गुजरात सहित कई राज्य सूखे से प्रभावित हैं।

मनरेगा केतहत एक परिवार केएक सदस्य को कम से कम 100 दिनों का रोजगार देना जरूरी है। वहीं सूखाग्रस्त इलाकों में 150 दिनों का रोजगार देना जरूरी है लेकिन इस पर अमल नहीं हो रहा है।

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