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सुप्रीम कोर्ट ने कहा: एफआईआर में नाम न होने पर व्यक्ति अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने की अपील नहीं कर सकता, जानें पूरा मामला
Sun, 13 Feb 2022 07:08 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 13 Feb 2022 07:08 PM IST
सार
मामला उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड प्रोविडेंट फंड इंवेस्टमेंट घोटाले से जुड़ा हुआ है। इस मामले में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी और प्रदेश पुलिस इसकी जांच कर रही थी।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिस व्यक्ति का नाम एफआईआर में आरोपी के तौर पर न हो वह आपराधिक मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने की अपील नहीं कर सकता है। जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार ने यह टिप्पणी यूपीपीसीएल प्रोविडेंट फंड इंवेस्टमेंट घोटाले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका की सुनवाई करते हुए की। यह एफआईआर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। इसकी शुरुआती जांच प्रदेश पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
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पीठ ने कहा कि इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता को कथित अपराध में आरोपी नहीं बनाया गया है। यदि याचिकाकर्ता का नाम अपराध में बतौर आरोपी नहीं है तो उसके द्वारा एफआईआर या मामले को रद्द करने की मांग करने का सवाल नहीं उठता है। अब इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और ऐसे में याचिकाकर्ता द्वारा राहत की मांग करना वाजिब नहीं है।
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साथ ही कहा कि दूसरे शब्दों में, याचिकाकर्ता सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में नामजद आरोपी नहीं है, ऐसे में उसे अन्य आरोपियों की तरफ से कार्यवाही रद्द करने की मांग करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है।
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अपने हाल के आदेश में पीठ ने कहा कि कोर्ट हुकुम चंद गर्ग और अन्य लोगों द्वारा मांगी गई राहत की समीक्षा करने का कोई इरादा नहीं रखती है। साथ ही कहा कि जब सीबीआई उनका नाम अपराध में शामिल करे तो वे उचित मंच पर राहत की अपील कर सकते हैं। हालांकि पीठ ने कहा कि सीबीआई के जांच अधिकारी को उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करने से पहले याचिकाकर्ताओं को 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा ताकि वे उचित कदम उठा सकें।
मामला उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड प्रोविडेंट फंड इंवेस्टमेंट घोटाले से जुड़ा हुआ है। इस मामले में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी और प्रदेश पुलिस इसकी जांच कर रही थी। सीबीआई ने 5 मार्च 2020 को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इस मामले में यूपी पावर सेक्टर कर्मचारी ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव प्रवीण कुमार गुप्ता और यूपीपीसीएल के तत्कालीन वित्त निदेशक सुधांशु द्विवेदी को आरोपी बनाया गया था।