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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवाज ऊंची कर दलीलें पेश करने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो / नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Dec 2017 03:16 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : SOCIAL MEDIA
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दिल्ली सरकार बनाम सहित कुछ अन्य मामलों में वरिष्ठ वकीलों के एक समूह के बर्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि स्वर ऊंची कर दलीलें पेश करना यह दर्शाता है कि वकील केपास बहस करने केलिए पर्याप्त तथ्य नहीं हैं। ऊंची आवाज में बहस को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि बार इसे रेग्यूलेट करें नहीं तो हमें इसे रेग्यूलेट करना होगा।
पांच सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने गुरुवार को कुछ वरिष्ठ वकीलों के बर्ताव पर नाराजगी जताते हुए कहा, % बुधवार को वरिष्ठ वकील का बर्ताव घटिया था और इसकेएक दिन पहले का बर्ताव तो बेहद घटिया था।’
वास्तव में चीफ जस्टिस दिल्ली बनाम उपराज्यपाल और अयोध्या मामले की सुनवाई की बात कर रहे थे।’ चीफ जस्टिस ने कहा, % यह दुखद है कि वरिष्ठ वकीलों के एक छोटे समूह को ऐसा लगता है कि वे अपना स्वर ऊंचा कर सकते हैं लेकिन इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ पीठ ने कहा कि ऊंची आवाज में बहस करना यह दर्शाता है कि उनकेपास बहस केलिए पर्याप्त तथ्य नहीं हैं। यह अक्षमता भी साबित करता है और वे वरिष्ठ वकील केलिए फिट नहीं हैं।
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पढ़ें- 25 साल में बदल गई अयोध्या, आखिर हर गम की एक मुद्दत होती है...
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पांच सदस्यीय संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने गुरुवार को कुछ वरिष्ठ वकीलों के बर्ताव पर नाराजगी जताते हुए कहा, % बुधवार को वरिष्ठ वकील का बर्ताव घटिया था और इसकेएक दिन पहले का बर्ताव तो बेहद घटिया था।’
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वास्तव में चीफ जस्टिस दिल्ली बनाम उपराज्यपाल और अयोध्या मामले की सुनवाई की बात कर रहे थे।’ चीफ जस्टिस ने कहा, % यह दुखद है कि वरिष्ठ वकीलों के एक छोटे समूह को ऐसा लगता है कि वे अपना स्वर ऊंचा कर सकते हैं लेकिन इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ पीठ ने कहा कि ऊंची आवाज में बहस करना यह दर्शाता है कि उनकेपास बहस केलिए पर्याप्त तथ्य नहीं हैं। यह अक्षमता भी साबित करता है और वे वरिष्ठ वकील केलिए फिट नहीं हैं।
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supreme court
दीगर है कि पिछले कुछ समय में सुप्रीम कोर्ट को वरिष्ठ वकीलों के कड़े शब्दों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन और दुष्यंत दवे ने अदालत द्वारा इस मामले की सुनवाई करने को लेकर सवाल उठाया था। धवन ने चीफ जस्टिस से यह भी कहा था कि आपके कार्यकाल तक इस मामले की सुनवाई नहीं खत्म होगी।
वहीं बुधवार को दिल्ली बनाम उपराज्यपाल मामले में दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन पांच सदस्यीय संविधान पीठ को अपनी दलीलें सुनने केलिए बाध्य कर रहे थे जबकि इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। धवन ने तो यह भी कहा कि अगर वह यह केस हार भी जाए तो उन्हें इसकी परवाह नहीं। पिछले दिनों जजों केनाम पर रिश्वत मामले की सुनवाई केदौरान भी वकीलों और पीठ केबीच जुबानी गरमा-गरमी देखने को मिली थी।
गुरुवार को पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकारों को लेकर सुनवाई कर रही पांच सदस्यीय पीठ केसमक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मणयम ने यह मसला उठाते हुए कहा कि हम में से कुछ वकील सही बर्ताव नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेल्फ रेग्यूलेशन जरूरी है। इस पर पीठ ने कहा कि हम आपकी भावनाओं को समक्ष सकते हैं। अगर बार ने इसे रेग्यूलेट नहीं किया तो रेग्यूलेट करना हमारी मजबूरी हो जाएगी। पीठ ने कहा कि जज हर मामले में वकीलों से सवाल करते हैं। हम वकील संवैधानिक और कानूनी मुद्दे पर दलीलों सुनेंगे।
वहीं बुधवार को दिल्ली बनाम उपराज्यपाल मामले में दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन पांच सदस्यीय संविधान पीठ को अपनी दलीलें सुनने केलिए बाध्य कर रहे थे जबकि इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी। धवन ने तो यह भी कहा कि अगर वह यह केस हार भी जाए तो उन्हें इसकी परवाह नहीं। पिछले दिनों जजों केनाम पर रिश्वत मामले की सुनवाई केदौरान भी वकीलों और पीठ केबीच जुबानी गरमा-गरमी देखने को मिली थी।
गुरुवार को पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकारों को लेकर सुनवाई कर रही पांच सदस्यीय पीठ केसमक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मणयम ने यह मसला उठाते हुए कहा कि हम में से कुछ वकील सही बर्ताव नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेल्फ रेग्यूलेशन जरूरी है। इस पर पीठ ने कहा कि हम आपकी भावनाओं को समक्ष सकते हैं। अगर बार ने इसे रेग्यूलेट नहीं किया तो रेग्यूलेट करना हमारी मजबूरी हो जाएगी। पीठ ने कहा कि जज हर मामले में वकीलों से सवाल करते हैं। हम वकील संवैधानिक और कानूनी मुद्दे पर दलीलों सुनेंगे।