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SC: 'शिक्षक ने बच्ची को फूल लेने के लिए किया मजबूर तो माना जाएगा यौन उत्पीड़न', सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Thu, 14 Mar 2024 10:21 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 14 Mar 2024 10:21 AM IST
सार

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ मामले में सुनवाई कर रही थी। पीठ ने तमिलनाडु ट्रायल कोर्ट और मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए फैसले को पलट दिया है।
 

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Supreme Court said Teacher forcing girl to accept flowers sexual harassment
supreme court - फोटो : ANI

विस्तार

सावधान अगर किसी बच्ची को जबरदस्ती फूल दिया तो आपको पॉस्को एक्ट के तहत सजा हो सकती है। यह हम नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। दरअसल, शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि लड़कों के स्कूल वाले एक शिक्षक द्वारा एक नाबालिग छात्रा को फूल भेंट करना और उसे दूसरों के सामने लेने के लिए दबाव डालना यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न है। हालांकि, अदालत ने आरोपी शिक्षक की प्रतिष्ठा को देखते हुए सबूतों की सख्त जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

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लड़की को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया
शीर्ष अदालत ने शिक्षक के खिलाफ व्यक्तिगत शिकायतों को निपटाने के लिए लड़की को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किए जाने की संभावना के बारे में चिंता जताई है। दरअसल, कोर्ट ने पाया बच्ची के रिश्तेदारों से जुड़ा कोई मामला हो सकता है। 
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हाईकोर्ट का फैसला पलटा
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ मामले में सुनवाई कर रही थी। पीठ ने तमिलनाडु ट्रायल कोर्ट और मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए गए फैसले को पलट दिया, जिसने शिक्षक को तीन साल की जेल की सजा सुनाई थी।
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दूरगामी परिणाम होते हैं
पीठ ने कहा, 'हम राज्य सरकार के वरिष्ठ वकील की इस दलील से पूरी तरह सहमत हैं कि किसी भी शिक्षक द्वारा छात्रा (जो नाबालिग भी है) का यौन उत्पीड़न गंभीर प्रकृति के अपराधों की सूची में काफी ऊपर होगा क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम होते हैं, जो कार्यवाही के पक्षकारों से कहीं अधिक प्रभावित होते हैं।'


अदालत ने आरोपी शिक्षक को बरी कर दिया। साथ ही यौन दुराचार के आरोपों से जुड़े मामलों में संतुलित निर्णय की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर जब एक शिक्षक की प्रतिष्ठा दांव पर हो।

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