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Motor Accident: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मोटर दुर्घटना दावा मामलों की जांच के लिए थानों में गठित करें विशेष इकाई

Sat, 31 Dec 2022 05:50 AM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Sat, 31 Dec 2022 05:50 AM IST
सार

निर्देश जारी कर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सार्वजनिक स्थान पर मोटर वाहन से सड़क हादसे की सूचना मिलने पर संबंधित एसएचओ मोटर वाहन संशोधन अधिनियम की धारा 159 के अनुसार कदम उठाएंगे।

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Supreme Court said states set up special units in police stations to investigate motor accident claim cases
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों की जांच और सुविधा के लिए राज्यों को तीन महीने के अंदर पुलिस थानों में एक विशेष इकाई गठित करने का निर्देश दिया है। निर्देश जारी कर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सार्वजनिक स्थान पर मोटर वाहन से सड़क हादसे की सूचना मिलने पर संबंधित एसएचओ मोटर वाहन संशोधन अधिनियम की धारा 159 के अनुसार कदम उठाएंगे। इसके तहत पुलिस को दुर्घटना सूचना रिपोर्ट तीन महीने के अंदर दावा न्यायाधिकरण में दायर की जानी चाहिए।
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जस्टिस एसए नजीर और जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कहा कि हमारे विचार में, राज्य के गृह विभाग के प्रमुख और सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में पुलिस महानिदेशक पुलिस मोटर दुर्घटना दावा मामलों को सुगम बनाने के लिए थानों में या कम से कम शहर स्तर पर एक विशेष इकाई का गठन कर नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे और जांच करेंगे। 
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महिला आयोग : यौन उत्पीड़न रोकने को प्रभावी कदम उठाएं कोचिंग संस्थान 
राष्ट्रीय महिला आयोग ने कोचिंग और शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को परामर्श जारी किया है। इसमें प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
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आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि कोचिंग सेंटर नियमों के तहत पंजीकृत हों और उन्हें चलाने वालों की पृष्ठभूमि की जांच की जाए। हाल के वर्षों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामले अत्यधिक बढ़े हैं। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान और कोचिंग केंद्रों में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम निषेध और निवारण) के तहत वांछित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए। छात्राओं की सुरक्षा में कोई कोताही न हो इसके लिए राज्यों से जागरूकता कार्यक्रम चलाने की भी अनुशंसा की गई है।
 
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