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‘माननीयों’ के खिलाफ मुकदमों के गवाहों को बिना मांगे दी जाए सुरक्षा : सुप्रीम कोर्ट

Sat, 07 Nov 2020 02:50 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 07 Nov 2020 02:50 AM IST
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Supreme Court said: Security should be granted to witnesses of cases against 'honorable'
सुफ्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने ‘माननीयों’ यानी वर्तमान व पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे मुकदमों में गवाहों की सुरक्षा पक्की करने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने ट्रायल अदालतों से कहा है कि ऐसे मामलों के गवाहों की तरफ से आवेदन नहीं किए जाने के बावजूद उन्हें गवाह संरक्षण योजना (विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम) के तहत सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

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शीर्ष अदालत ने ट्रायल अदालतों को गवाह संरक्षण योजना लागू करने के दिए निर्देश
जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, उसकी तरफ से मंजूर की जा चुकी गवाह संरक्षण योजना, 2018 को केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को सख्ती से लागू करना चाहिए। पीठ ने कहा, ऐसे मामलों में गवाहों के जोखिम को ध्यान में रखते हुए ट्रायल अदालत को इस योजना के तहत उन्हें सुरक्षा दे सकती हैं। इसके लिए गवाहों की तरफ से कोई आवेदन नहीं आने पर भी ऐसा किया जाना चाहिए।
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शीर्ष अदालत ने गौर किया कि अधिकतर गवाह बयान देने के लिए संबंधित अदालतों के सामने पेश होने के इच्छुक नहीं होते। पीठ ने निर्देश दिया कि माननीयों से जुड़े मामलों में जनहित को ध्यान में रखते हुए गैर जरूरी स्थगन नहीं दिए जाने चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान याचिका पर दिए गए ये निर्देश सभी वर्तमान और पूर्व सांसदों व विधायकों के मामले में लागू होंगे।
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शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की तरफ से उपस्थित एडिशन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय और दिया। मेहता से माननीयों के खिलाफ विशेष एजेंसियों की तरफ से की जा रही जांच से जुड़ी स्थिति रिपोर्ट जमा करने को लेकर जवाब मांगा गया है। शीर्ष अदालत भाजपा नेता व वकील अश्विनी उपाध्याय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने माननीयों के खिलाफ मुकदमों के त्वरित निस्तारण की मांग की है।


पहले नहीं मानी थी गवाहों की सुरक्षा की सलाह
हालांकि इसी मामले में पहले सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने एमिकस क्यूरी की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ एडवोकेट विजय हंसारिया की सलाह नहीं मानी थी। हंसारिया ने विशेष अदालतों को माननीयों के खिलाफ मुकदमों के गवाहों को संरक्षण देने का निर्देश देने की सलाह पीठ को दी थी। लेकिन पीठ ने कहा था कि सांसदों व विधायकों के खिलाफ 4 हजार से ज्यादा मामलों में हजारों गवाह हैं और क्या इन सभी को सुरक्षा दे पाना संभव होगा? किसी को सुरक्षा हासिल करने के लिए आवेदन करना ही होगा।

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