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Supreme Court : शीर्ष अदालत ने कहा- यौन उत्पीड़न मामलों की सुनवाई बंद कमरे में हो

Sat, 13 Aug 2022 06:49 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 13 Aug 2022 06:49 AM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा-327 के तहत या मामले में पीड़ित व्यक्ति या अन्य गवाह, जब यौन उत्पीड़न व हिंसा के अपने अनुभव के बारे में गवाही दे रहा हो तो कैमरे के सामने कार्यवाही की अनुमति दी जानी चाहिए।

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Supreme Court : said hearing of sexual harassment cases should be done in closed rooms
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

यौन अपराधों के पीड़ितों के साथ संवेदनशील तरीके से निपटने के महत्व को दोहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों को कई निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि यौन उत्पीड़न से संबंधित सभी मामलों में बंद कमरे में सुनवाई की अनुमति दी जानी चाहिए।  

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दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-327 के अनुसार, केवल दुष्कर्म के मामलों में बंद कमरे में सुनवाई अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने इस दायरे का विस्तार किया है। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किया कि पीड़ित से जिरह संवेदनशील और सम्मानजनक तरीके से की जाए। 
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि यौन उत्पीड़न की शिकायतकर्ताओं के लिए कानूनी कार्यवाही अधिक कठिन होती है क्योंकि वे आघात और सामाजिक शर्म से निपटते हैं। लिहाजा ऐसे मामलों को उचित रूप से संभालने के लिए न्यायालयों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालतों का यह कर्तव्य और उत्तरदायित्व है कि वे पीड़ित व्यक्तियों के साथ उचित तरीके से निपटें।
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कैमरे के सामने हो कार्यवाही की अनुमति
शीर्ष अदालत ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा-327 के तहत या मामले में पीड़ित व्यक्ति या अन्य गवाह, जब यौन उत्पीड़न व हिंसा के अपने अनुभव के बारे में गवाही दे रहा हो तो कैमरे के सामने कार्यवाही की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही, एक स्क्रीन लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पीड़ित महिला गवाही देते समय आरोपी को नहीं देखे।

रेरा नियमों में बदलावों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्य सरकारों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डवलपमेंट) कानून (रेरा) और इससे संबंधित नियमों और अन्य कानूनों में भटकाव और बदलाव के बारे में तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करें। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एएस बोप्पना की पीठ ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा कि अपना जवाब केंद्रीय आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय को सौंपें ताकि वह वकील देवाशीष भारुका से विचार कर जानकारी को व्यापक चार्ट के रूप में पेश करे। 

देश में मॉडल बिल्डर बायर एग्रीमेंट लागू करने की मांग को लेकर दायर कई याचिकाओं को 16 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई पर वह न्याय मित्र व केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के सुझावों के आधार पर निर्देश जारी करेगी।

16 साल बाद डेवलपर को बकाया लेकर सेल डीड देने को कहना उचित नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, एक डेवलपर को 16 साल बाद 6.49 लाख रुपये की शेष राशि लेकर संपत्ति की सेल डीड देने के लिए कहना उचित नहीं होगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला ने इस टिप्पणी के साथ ही राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश को संशोधित कर दिया। आयोग ने डेवलपर को नागपुर में स्थित घर का कब्जा शिकायतकर्ता को सौंपने के बाद सेल डीड देने का निर्देश दिया था।

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