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तेंदुआ शिकार मामला: वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ को गिरफ्तारी से राहत, सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया संरक्षण
Tue, 22 Sep 2026 08:57 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 22 Sep 2026 08:57 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कथित तेंदुआ शिकार मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिली सुरक्षा बहाल कर दी है। अदालत ने उन्हें 28 सितंबर को वन अधिकारियों के सामने पेश होकर जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इससे पहले उनकी अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने कथित तेंदुआ शिकार मामले में वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण को गिरफ्तारी से मिले संरक्षण को बहाल कर दिया है। अदालत ने उन्हें 28 सितंबर को सुबह 11 बजे वन अधिकारियों के सामने पेश होने और जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदूरकर की पीठ ने कहा कि वह मामले के गुण दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है। पीठ ने निर्देश दिया कि दो सितंबर को हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश याचिकाओं के निपटारे तक प्रभावी रहेगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ खटखटाया था सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सत्यनारायण की उस याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए उन्हें गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली गई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने हाल ही में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दायर दो याचिकाओं को खारिज करते हुए सत्यनारायण को मिली अंतरिम गिरफ्तारी सुरक्षा वापस ले ली थी।
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वन विभाग ने लगाए थे क्या आरोप?
वन विभाग ने आरोप लगाया था कि सत्यनारायण ने तीसरा समन और उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट की जानकारी छिपाई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि संरक्षण मिलने के बावजूद जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं करने के कारण याचिकाकर्ता अदालत के सामने पूरी जानकारी के साथ नहीं आए।
वन विभाग ने यह भी आरोप लगाया था कि श्योपुर और मुरैना जिलों में 10 तेंदुओं के कथित शिकार की जांच में सत्यनारायण शामिल नहीं हुए। सत्यनारायण ने खुद को फरार बताए जाने से इनकार किया है। वाइल्डलाइफ एसओएस का कहना है कि उसके एंटी पोचिंग दल ने कथित मामले का पता लगाने में अधिकारियों की मदद की थी। संगठन के मुताबिक कानूनी संरक्षण मांगने का मतलब जांच में सहयोग करने से इनकार करना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्तिक सत्यनारायण ने दी क्या प्रतिक्रिया?
वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने मध्य प्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स द्वारा की जा रही जांच में पूर्ण सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कार्तिक ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के लिए बहुत शुक्रगुजार हूं। मैं शिवपुरी में 28 सितंबर को मौजूद रहूंगा। एसटीएसएफ के साथ पूरा सहयोग करूंगा और इस गलतफहमी को दूर करने के लिए उनकी जांच प्रक्रिया का साथ दूंगा।”
उन्होंने कहा कि मैं इस मौके का इस्तेमाल सभी तथ्य पेश करने और वाइल्डलाइफ की सुरक्षा के लिए तीन दशकों की लगातार कोशिशों के बावजूद मुझ पर और मेरी टीम पर लगे बेबुनियाद आरोपों और रेप्युटेशन को हुए नुकसान का जवाब देने के लिए करूंगा।
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न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति अतुल एस चंदूरकर की पीठ ने कहा कि वह मामले के गुण दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है। पीठ ने निर्देश दिया कि दो सितंबर को हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश याचिकाओं के निपटारे तक प्रभावी रहेगा।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ खटखटाया था सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सत्यनारायण की उस याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके जरिए उन्हें गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली गई थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने हाल ही में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत दायर दो याचिकाओं को खारिज करते हुए सत्यनारायण को मिली अंतरिम गिरफ्तारी सुरक्षा वापस ले ली थी।
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वन विभाग ने लगाए थे क्या आरोप?
वन विभाग ने आरोप लगाया था कि सत्यनारायण ने तीसरा समन और उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट की जानकारी छिपाई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि संरक्षण मिलने के बावजूद जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं करने के कारण याचिकाकर्ता अदालत के सामने पूरी जानकारी के साथ नहीं आए।
वन विभाग ने यह भी आरोप लगाया था कि श्योपुर और मुरैना जिलों में 10 तेंदुओं के कथित शिकार की जांच में सत्यनारायण शामिल नहीं हुए। सत्यनारायण ने खुद को फरार बताए जाने से इनकार किया है। वाइल्डलाइफ एसओएस का कहना है कि उसके एंटी पोचिंग दल ने कथित मामले का पता लगाने में अधिकारियों की मदद की थी। संगठन के मुताबिक कानूनी संरक्षण मांगने का मतलब जांच में सहयोग करने से इनकार करना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्तिक सत्यनारायण ने दी क्या प्रतिक्रिया?
वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने मध्य प्रदेश की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स द्वारा की जा रही जांच में पूर्ण सहयोग देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कार्तिक ने कहा, “मैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के लिए बहुत शुक्रगुजार हूं। मैं शिवपुरी में 28 सितंबर को मौजूद रहूंगा। एसटीएसएफ के साथ पूरा सहयोग करूंगा और इस गलतफहमी को दूर करने के लिए उनकी जांच प्रक्रिया का साथ दूंगा।”
उन्होंने कहा कि मैं इस मौके का इस्तेमाल सभी तथ्य पेश करने और वाइल्डलाइफ की सुरक्षा के लिए तीन दशकों की लगातार कोशिशों के बावजूद मुझ पर और मेरी टीम पर लगे बेबुनियाद आरोपों और रेप्युटेशन को हुए नुकसान का जवाब देने के लिए करूंगा।