सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर सुरक्षित रखा आदेश
उच्चतम न्यायालय ने न्यायाधीश अरुण मिश्रा के नेतृत्व वाली दो जजो की बेंच ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के खिलाफ दायर बहुत सारी पुनर्विचार याचिकाओं को लेकर आज अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। इस पीठ में न्यायाधीश उदय उमेश ललित भी शामिल थे। यह याचिका अदालत द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जाति (उत्पीड़न) संशोधन कानून, 2018 को कमजोर करने के खिलाफ दायर की गई हैं।
Supreme Court's two-judge bench, headed by Justice Arun Mishra & also comprising Justice Uday Umesh Lalit reserves order today on a number of review petitions against Supreme Court's decision diluting provisions of the SC/ST Act.
— ANI (@ANI) May 1, 2019
इस मामले पर इससे पहले 27 मार्च को भी सुनवाई हुई थी। न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीते मंगलवार को कहा था कि इस मामले की अंतिम सुनवाई 30 अप्रैल को होगी। गत 20 मार्च को अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के हो रहे दुरूपयोग के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिनियम के तहत मिलने वाली शिकायत पर स्वत: एफआईआर और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी।
साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा था कि एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामले के आरोपियों के लिए भी अग्रिम जमानत का प्रावधान होना चाहिए। लेकिन बाद में सरकार ने कानून में संशोधन कर लगभग पहले जैसे स्थिति बहाल कर दी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई। वहीं 20 मार्च के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार समेत अन्य ने पुनर्विचार याचिकाएं भी दायर की हैं।
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