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सुप्रीम कोर्ट सख्त : जिन सुविधाओं का छात्रों ने नहीं किया इस्तेमाल, उसके लिए कैसे पैसे वसूल रहे स्कूल

Tue, 04 May 2021 02:59 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 04 May 2021 02:59 AM IST
सार

  • शीर्ष अदालत ने कहा, महामारी के दौरान ऐसी सुविधाओं के लिए फीस की मांग करना मुनाफाखोरी
  • हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा, राज्य प्रशासन को निजी स्कूलों की फीस घटाने का अधिकार नहीं

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Supreme Court reprimanded schools for profiteering
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने निजी स्कूलों पर सख्त रवैया अपनाते हुए कहा, महामारी के कारण छात्र स्कूल की जिन गतिविधियों और सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, उसके लिए पैसे कैसे वसूले जा रहे हैं। ऐसे में फीस की मांग करना एक मायने में मुनाफाखोरी और व्यवसायीकरण है।

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हालांकि, शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिए अपने एक आदेश में कहा है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राज्य प्रशासन को गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की फीस घटाने का अधिकार नहीं है।
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जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने कहा, शिक्षा प्रदान करने की धर्मार्थ गतिविधि में लगे निजी स्कूल प्रबंधन से उम्मीद की जाती है कि वे संवेदनशील रहे और महामारी से पैदा हुए हालात को समझें। स्कूलों से उम्मीद की जाती है कि वे संकट के इस दौर में छात्रों व उनके अभिभावकों के समक्ष आई परिस्थितियों के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाएंगे।
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पीठ ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 सभी समस्याओं का हल नहीं है। हालांकि, पीठ ने राजस्थान के निजी स्कूलों को शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए अप्रयुक्त सुविधाओं के मद्देनजर छात्रों से 15 फीसदी की कटौती के साथ फीस लेने की इजाजत दी है।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का असर पूरे भारत में देखने को मिल सकता है। पंजाब व हरियाणा और उड़ीसा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर इसी तह की अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि हमने जानबूझकर वार्षिक स्कूल फीस से कटौती को 15 फीसदी तक सीमित कर दिया है हालांकि स्कूल प्रबंधन ने योग्य छात्रों को 25 फीसदी छात्रवृत्ति प्रदान करने की बात कही है।


राजस्थान ने स्कूलों से 40 फीसदी तक कम फीस लेने को कहा था
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला निजी स्कूलों के छात्र व अभिभावकों के लिए परेशानी खड़ी करने वाला है। दरअसल, राजस्थान सरकार ने जहां स्कूलों को इस संकट के दौर में छात्रों से 30 से 40 फीसदी कम फीस लेने के लिए कहा था, वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों को 15 फीसदी कटौती के साथ फीस वसूलने के लिए निर्देश दिया है। राजस्थान के कई निजी स्कूल प्रबंधनों ने फीस को टालने और कटौती करने के राज्य ऑथिरिटी के निर्णय की वैधता पर सवाल उठाया था।

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