{"_id":"5d2ceba18ebc3e6cbc3394d8","slug":"supreme-court-releases-guilty-doctor-ordered-to-plant-100-trees-in-a-year","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट ने दोषी डॉक्टर को रिहा करते हुए एक साल में 100 पौधे लगाने का दिया आदेश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट ने दोषी डॉक्टर को रिहा करते हुए एक साल में 100 पौधे लगाने का दिया आदेश
Tue, 16 Jul 2019 02:39 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 16 Jul 2019 02:39 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अनोखे फैसले में एक व्यक्ति को रिहा करने का निर्देश देते हुए एक साल के अंदर 100 पौधे लगाने का आदेश दिया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि हत्या की कोशिश के मामले में दोषी ठहराया गया व्यक्ति वारदात के वक्त नाबालिग था। मौजूदा समय में उसकी उम्र 32 साल है और पेशे से डॉक्टर है।
सोलेमन एसके नामक इस व्यक्ति को वर्ष 2004 में हत्या की कोशिश में निचली अदालत ने दोषी ठहराया था। बाद में हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी एसएलपी खारिज कर दी थी। इसके बाद सोलेमन ने आवेदन दायर कर दावा किया कि घटना के वक्त वह नाबालिग था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज को इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।
रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि घटना के वक्त सोलेमन नाबालिग था। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत यदि आरोपी को नाबालिग ठहराया जाता है तो उस मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को रेफर कर दिया जाता है लेकिन जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने इस मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड भेजने के बजाय सजा को रद्द कर दिया।
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि चूंकि यह घटना 2004 की है। ऐसे में हमारा मानना है कि इस मामले को बोर्ड के पास भेजना उचित नहीं होगा। बेहतर यह होगा कि 32 वर्षीय सोलेमन (अब पेशे से डॉक्टर) को समुदाय की सेवा करने के लिए कहा जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया कि सोलेमन को पौधे लगाने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए सोलेमन को एक वर्ष में 100 पौधे लगाने का आदेश दिया।
विज्ञापन
सोलेमन एसके नामक इस व्यक्ति को वर्ष 2004 में हत्या की कोशिश में निचली अदालत ने दोषी ठहराया था। बाद में हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी एसएलपी खारिज कर दी थी। इसके बाद सोलेमन ने आवेदन दायर कर दावा किया कि घटना के वक्त वह नाबालिग था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जिला जज को इस संबंध में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।
विज्ञापन
रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि घटना के वक्त सोलेमन नाबालिग था। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत यदि आरोपी को नाबालिग ठहराया जाता है तो उस मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड को रेफर कर दिया जाता है लेकिन जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने इस मामले को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड भेजने के बजाय सजा को रद्द कर दिया।
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि चूंकि यह घटना 2004 की है। ऐसे में हमारा मानना है कि इस मामले को बोर्ड के पास भेजना उचित नहीं होगा। बेहतर यह होगा कि 32 वर्षीय सोलेमन (अब पेशे से डॉक्टर) को समुदाय की सेवा करने के लिए कहा जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया कि सोलेमन को पौधे लगाने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए सोलेमन को एक वर्ष में 100 पौधे लगाने का आदेश दिया।