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रियल एस्टेट सेक्टर की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट का निगरानी से इनकार

Sun, 10 Jan 2021 03:59 AM IST
देव कश्यप राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 10 Jan 2021 03:59 AM IST
सार

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, निर्माण परियोजना की निगरानी करना उसकी जिम्मेदारी नहीं।
  • नोएडा का एक प्रोजेक्ट शुरू न होने पर खरीदार पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट।

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Supreme Court refuses to monitor real estate sector arbitrariness
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रियल एस्टेट प्रोजेक्ट पर निगरानी रखना उसका काम नहीं है। कोर्ट ने कहा, अनुच्छेद-32 के तहत ऐसा करना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, रियल एस्टेट खरीदारों को वैधानिक अधिकार मिले हैं। कानून के तहत उनके पास समस्याओं का निदान करने के उपाय भी उपलब्ध है। ऐसे में शीर्ष कोर्ट का काम निगरानी का नहीं है।

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पीठ ने कहा, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-1986, भारतीय दिवाला और शोधन कोड 2016 और रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 आदि कानून के तहत खरीदार शिकायत कर सकते हैं। संसद ने खरीदारों के अधिकारों के संरक्षण को लेकर कानून बनाए हैं और ऐसे फोरम हैं जिन्हें निर्णय लेने का अधिकार है।
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कोर्ट ने कहा, न्यायिक परीक्षण के दायरे में पब्लिक अथॉरिटी हैं जिनके जिम्मे पब्लिक ड्यूटी है। निर्णय देने वाली अथॉरिटी का काम अदालत को नहीं ‘हड़पना’ चाहिए। ऐसा करने की इजाजत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के लिए यह उचित नहीं कि वह यह समझे कि निर्माण परियोजनाओं को पूरा करने पर निगरानी उसके अधिकारक्षेत्र में है।
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उचित फोरम में जा सकते हैं याचिकाकर्ता
नोएडा की परियोजना शुरू न होने पर व्यावसायिक परिसरों के 25 खरीदारों ने अनुच्छेद-32 के तहत कोर्ट में रिट याचिका दी थी। इसमें व्यापक जनहित का हवाला देकर अपने हित और निवेश के लिए संरक्षण मांगा गया था। याचिका में प्रोजेक्ट को दोबारा शुरू करने का आदेश या निर्देश देने की मांग की गई थी। ऐसा न होने पर खरीदारों को सालाना 18 फीसदी ब्याज के साथ रकम लौटाने और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई थी।


पीठ ने कहा, इस पर विचार करने का मतलब परियोजना में दखल देना और यह सुनिश्चित कराना होगा कि प्रोजेक्ट पूरा हो। जबकि यह सुप्रीम कोर्ट के अधिकारक्षेत्र से बाहर है। पीठ ने कहा, वास्तव में यह परियोजना पर रोज निगरानी जैसा है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उचित फोरम में जाने की छूट दी है।

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