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चुनावी बॉन्ड पर तत्काल रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, केंद्र-चुनाव आयोग से मांगा जवाब

Mon, 20 Jan 2020 11:33 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 20 Jan 2020 11:33 AM IST
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Supreme Court refuses to grant immediate stay on issuance of Electoral Bond Scheme
electoral bond - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड स्कीम पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से दो हफ्तों में जवाब भी दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस जनहित याचिका को एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने दायर किया था। बता दें कि यह योजना राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव लड़ने के लिए चंदा एकत्रित करने हेतु लाई गई थी।

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प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने केन्द्र और चुनाव आयोग से एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा दायर अंतरिम आवेदन के दो सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है।
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एनजीओ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि इस योजना का मकसद बेहिसाबी काले धन को सत्तारूढ़ दल तक पहुंचाना है। भूषण ने योजना पर रोक की मांग के दौरान आरबीआई के एक दस्तावेज का भी जिक्र किया।
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इस पर पीठ ने कहा कि हम उसे देखेंगे। हम इसे दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध कर रहे हैं। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि ये सारी बहस पहले भी हो चुकी है। उन्होंने इस योजना को लेकर दायर याचिका पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का वक्त मांगा हैं।

गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने अपनी याचिका में कहा था कि वित्त कानून, 2017 और वित्त कानून, 2016 में कतिपय संशोधन किये गये थे। इन दोनों कानूनों को धन विधेयक के रूप में पारित कराया गया था। इन संशोधनों ने असीमित राजनीतिक चंदा, विदेशी कंपनियों से भी, प्राप्त करने का रास्ता खोल दिया है।

याचिका में कहा गया था कि इस तरह के संशोधन बड़े पैमाने पर चुनावी भ्रष्टाचार को वैध बनाते हैं। वित्त कानून, 2017 में चुनावी बांड का प्रावधान किया, गया जिसके बारे में जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत खुलासा करने से छूट प्रदान की गयी और इस तरह से राजनीतिक दलों को अनियंत्रित और अज्ञात स्रोत से धन प्राप्त करने के दरवाजे खुल गये।

बता दें कि सरकार ने दो जनवरी 2018 को चुनावी बॉन्ड योजना को अधिसूचित किया था। इसके प्रावधानों के अनुसार, चुनावी बॉन्ड कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है जो भारत का नागरिक है या जिसका भारत में कारोबार है।

 

 

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