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सुप्रीम कोर्ट का बांद्रा कब्रिस्तान में संक्रमितों के शव को दफनाने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार
Mon, 04 May 2020 01:06 PM IST
अनवर अंसारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Mon, 04 May 2020 01:06 PM IST
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supreme court
- फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मुंबई के बांद्रा पश्चिम क्षेत्र में तीन कब्रिस्तानों में कोविड-19 पीड़ितों के शवों को दफनाने पर रोक लगाने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। साथ ही इस मामले को वापस बॉम्बे हाईकोर्ट में भेज दिया है।
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Supreme Court refuses to entertain a plea seeking a stay on burial of dead bodies of #COVID19 victims at three cemeteries in Mumbai’s Bandra West area and refers the matter back to the Bombay High Court. pic.twitter.com/xWl3JgEgui
— ANI (@ANI) May 4, 2020विज्ञापन
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में कोरोना वायरस की वजह से जान गंवाने वालों के शवों को दफनाने के लिए बांद्रा कब्रिस्तान का इस्तेमाल करने की बीएमसी की अनुमति को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले पर विचार करने से इनकार कर दिया है।
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गौरतलब हो कि बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति बीपी कोलाबवाला ने 27 अप्रैल को उपनगर बांद्रा में कोंकणी मुस्लिम कब्रिस्तान के पास रहने वाले लोगों की याचिका पर सुनवाई की थी। इस याचिका में कोविड-19 संक्रमण से जान गंवाने वालों के शवों को दफन करने पर रोक लगाने की कोर्ट से मांग की गई थी।
याचिका प्रदीप गांधी और अन्य ने दायर की थी। इसमें दावा किया गया था कि अगर शव ठीक तरीके से नहीं दफनाया गया तो स्थानीय लोगों में वायरस के सामुदायिक संचरण का डर है। वहीं कब्रिस्तान के न्यासियों की ओर से वकील प्रताप निंबालकर ने याचिका का विरोध किया था।
उन्होंने दलील दी थी कि शवों को दफनाने से पहले उचित सावधानी बरती जा रही है। साथ ही यह भी कहा था कि याचिकाकर्ता ने याचिका में कोई भी वैज्ञानिक आधार नहीं रखा है, जिससे यह पता चले कि शवों से वायरस फैल सकता है।
वकील निम्बाल्कर ने कोविड-19 से जान गंवाने वाले लोगों के शवों के प्रबंधन को लेकर दिशा-निर्देशों पर 15 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना का हवाला भी दिया, जिसमें कहा गया था कि कोरोना वायरस छींक या खांसी की बूंदों से फैलता है।
अदालत ने इस दलील को मानते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता ने कोई सामग्री या सबूत पेश नहीं किया, जो दिखाए कि कोविड-19 संक्रमण से जान गंवाने वाले व्यक्ति को दफनाने से आसपास रहने वाले लोगों के जीवन को कोई खतरा होगा।
हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को आदेश भी दिया था कि स्थानीय पुलिस की मदद से कब्रिस्तान के दरवाजे पर स्थानीय लोगों के लगाए गए तीन ताले खोले जाएं। बता दें कि स्थानीय लोगों ने इस कब्रिस्तान में शव को दफनाए जाने के खिलाफ 13 अप्रैल को प्रदर्शन किया था और कब्रिस्तान के दरवाजे पर ताला लगा दिया था।