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गायत्री प्रजापति को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
amarujala.com {Presented by: पवन नाहर}
Updated Tue, 07 Mar 2017 06:22 AM IST
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गायत्री प्रजापति
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सपा नेता व उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री गायत्री प्रजापति को सुप्रीम कोर्ट ने किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह अपने पूर्व के आदेश में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगी। साथ ही शीर्ष अदालत ने इस बात को दुखद बताया कि 20 फरवरी के उसके आदेश को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
मालूम हो कि एक महिला द्वारा प्रजापति के खिलाफ बलात्कार की शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने प्रजापति के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया था। प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 20 फरवरी का आदेश वापस लेने की गुहार की थी।
न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने सोमवार को कहा कि उन्होंने गायत्री प्रजापति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था। पीठ अपने इस आदेश में कोई बदलाव नहीं करेगी। प्रजापति की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया है।
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मालूम हो कि एक महिला द्वारा प्रजापति के खिलाफ बलात्कार की शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद यूपी पुलिस ने प्रजापति के खिलाफ गैंगरेप का मामला दर्ज कर लिया था। प्रजापति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 20 फरवरी का आदेश वापस लेने की गुहार की थी।
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न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने सोमवार को कहा कि उन्होंने गायत्री प्रजापति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था। पीठ अपने इस आदेश में कोई बदलाव नहीं करेगी। प्रजापति की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि एफआईआर दर्ज करने के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया गया है।
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गायत्री के वकील की दलील, कहा उनकी भी सुने कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से राहत देने की गुहार लगाई, लेकिन पीठ ने इस मामले में किसी तरह का मत देने से इनकार करते हुए कहा है कि आप कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र हैं।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में प्रजापति ने कहा था कि बिना उन्हें नोटिस भेजे और बिना उनका पक्ष जाने सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला ले लिया। साथ ही उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। याचिका में प्रजापति ने कहा था कि नेचुरल जस्टिस का सिद्धांत कहता है कि किसी गंभीर आरोप में किसी को नामित करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाना चाहिए। प्रजापति का कहना था कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है।
राजनीतिक फायदे के लिए उन पर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि चित्रकूट की रहने वाली एक महिला ने मंत्री गायत्री प्रजापति और अन्य के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाया था। महिला का आरोप था कि समाजवादी पार्टी में उच्च पद दिलाने का झांसा देकर प्रजापति ने दो वर्षों तक कई बार उसके साथ बलात्कार किया। इतना ही नहीं महिला का यह भी आरोप है कि उसकी बेटी के साथ भी छेड़छाड़ की गई।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में प्रजापति ने कहा था कि बिना उन्हें नोटिस भेजे और बिना उनका पक्ष जाने सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला ले लिया। साथ ही उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। याचिका में प्रजापति ने कहा था कि नेचुरल जस्टिस का सिद्धांत कहता है कि किसी गंभीर आरोप में किसी को नामित करने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाना चाहिए। प्रजापति का कहना था कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है।
राजनीतिक फायदे के लिए उन पर इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि चित्रकूट की रहने वाली एक महिला ने मंत्री गायत्री प्रजापति और अन्य के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाया था। महिला का आरोप था कि समाजवादी पार्टी में उच्च पद दिलाने का झांसा देकर प्रजापति ने दो वर्षों तक कई बार उसके साथ बलात्कार किया। इतना ही नहीं महिला का यह भी आरोप है कि उसकी बेटी के साथ भी छेड़छाड़ की गई।