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Supreme Court: शीर्ष अदालत से नकली नोट रखने वाले सब्जी विक्रेता को राहत, सजा हुई कम; तत्काल रिहाई के दिए आदेश
Mon, 14 Aug 2023 09:45 PM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Mon, 14 Aug 2023 09:45 PM IST
सार
भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 489-सी जाली मुद्रा-नोट या बैंक-नोट रखने के अपराध से संबंधित है और इसमें सात साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के एक सब्जी विक्रेता को राहत देते हुए उसकी जेल की सजा कम कर दी। सब्जी विक्रेता को 10 रुपये के 43 नकली नोट रखने के अपराध में दोषी ठहराया गया था। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने तमिलनाडु के थेनी जिले के निवासी पलानीसामी को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
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पीठ ने 10 अगस्त के अपने आदेश में कहा, उसके खिलाफ आरोप सिर्फ आईपीसी की धारा 489सी के तहत है। उसके पास 10 रुपये मूल्य के 43 नकली नोट पाए गए। वह एक सब्जी विक्रेता है।मुख्य आरोपी कबीर नाम का फरार आरोपी (ए3) है। उपरोक्त पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हम दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सजा को संशोधित करके पहले से भुगती गई सजा में बदलने के इच्छुक हैं...। उच्च न्यायालय द्वारा दी गई पांच साल की सजा को पहले ही भुगती गई अवधि में संशोधित करके अपील को आंशिक रूप से अनुमति दी जाती है। यदि किसी अन्य मामले में आवश्यक न हो तो अपीलकर्ता को तत्काल रिहा कर दिया जाए।
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भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 489सी नकली या जाली मुद्रा-नोट या बैंक-नोट रखने के अपराध से संबंधित है और इसमें सात साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
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पलानीसामी को ट्रायल कोर्ट ने आठ जनवरी, 2014 को इस अपराध के लिए दोषी ठहराया था और सात साल की कैद की सजा सुनाई थी। 24 अक्टूबर, 2019 को मद्रास उच्च न्यायालय ने सात साल की कारावास की सजा को घटाकर पांच साल कर दिया था। वह 451 दिनों तक जेल में रहे।
पीठ ने कहा कि अपील केवल पलानीसामी ने दायर की थी, जो मामले के तीन आरोपियों में से एक हैं। दो आरोपियों पर धारा 489सी के तहत मामला दर्ज किया गया है, जबकि तीसरा फरार है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पलानीसामी के खिलाफ अभियोजन का मामला यह है कि एक गुप्त सूचना के आधार पर जब्ती के दौरान उनके पास नकली नोट पाए गए थे। पलानीसामी के वकील ने पीठ को बताया कि वह 451 दिनों की कैद से गुजर चुके हैं और वह एक अनपढ़ व्यक्ति हैं, जो सब्जी विक्रेता के रूप में अपनी आजीविका कमाते हैं।
वकील ने कहा, उनके खिलाफ पहले कोई दोषसिद्धि नहीं हुई है और कोई मामला लंबित नहीं है। इस प्रकार, उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दी गई सजा को कम किया जा सकता है। पीठ ने पलानीसामी के वकील की दलील पर विचार किया और जब तक किसी अन्य मामले में वांछित न हो, उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 22 सितंबर, 2002 को एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने पलानीसामी और अन्य एक अन्य आरोपी कलाई को तमिलनाडु के बोडिनायक्कनूर शहर में मल्लीगई वाइन, ममराजार बाजार के पास संदिग्ध परिस्थितियों में पकड़ा था। पलानीसामी ने कबूल किया था कि कबीर नाम का फरार आरोपी (ए3) तिरुवनंतपुरम, केरल से आया था और उसने उन्हें 10 रुपये मूल्यवर्ग के नकली नोटों के 24 बंडल दिए थे। अपने इकबालिया बयान में सब्जी विक्रेता ने कहा था कि 22 सितंबर 2002 को उसने और कलाई ने एक बंडल निकाला और उसे आपस में बांट लिया और उसे बाजार में फैलाने का प्रयास किया।