फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court quashes the sentence of the accused of adulteration said that the accused of food adulteration has the right to send samples for investigation

फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने मिलावट के आरोपी की सजा रद्द की, कहा- खाद्य मिलावट के आरोपी को जांच के लिए सैंपल भेजने का हक 

Sat, 30 Oct 2021 10:10 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sat, 30 Oct 2021 10:10 PM IST
सार

शीर्ष अदालत ने कहा कि धारा 13 की उप धारा (2) कहती है कि जिस व्यक्ति को रिपोर्ट भेजी गई है उसे ये सूचना दी जानी चाहिए कि यदि वह चाहे तो रिपोर्ट प्राप्त होने के 10 दिनों के अंदर अदालत में आवेदन देकर सैंपल को सेंट्रल फूड लेबोरेटरी में विश्लेषण के लिए भेजने की मांग कर सकता है।

विज्ञापन
Supreme Court quashes the sentence of the accused of adulteration said that the accused of food adulteration has the right to send samples for investigation
supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने खाद्य मिलावट के आरोपी एक दुकानदार की सजा ये कहते हुए रद्द कर दी कि आरोपी को संबंधित खाद्य सैंपल को जांच के लिए सेंट्रल फूड लेबोरेटरी भेजने का हक है। जस्टिस अजय रस्तोगी और अभय एस ओका ने कहा कि खाद्य मिलावट रोकथाम कानून, 1954 की धारा 13 के तहत ये अनिवार्य है कि स्थानीय स्वास्थ्य प्राधिकारी उस व्यक्ति को खाद्य पदार्थ की सरकारी जांच रिपोर्ट मुहैया कराए जिसके पास से खाद्य का सैंपल लिया गया है।

विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने कहा कि धारा 13 की उप धारा (2) कहती है कि जिस व्यक्ति को रिपोर्ट भेजी गई है उसे ये सूचना दी जानी चाहिए कि यदि वह चाहे तो रिपोर्ट प्राप्त होने के 10 दिनों के अंदर अदालत में आवेदन देकर सैंपल को सेंट्रल फूड लेबोरेटरी में विश्लेषण के लिए भेजने की मांग कर सकता है। जिस व्यक्ति से सैंपल लिया गया है, अभियोजन की कार्यवाही शुरू होने के बाद उसे जांच रिपोर्ट देना जरूरी है।
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपी को रिपोर्ट की प्रति नहीं दी जाती तो सेंट्रल फूड लैब से जांच कराने के उसके अधिकार का हनन होता है। फलस्वरूप, रिपोर्ट को गलत करार देने का उसका अधिकार छिन जाता है और इससे खुद का बचाव करने का उसका अधिकार प्रभावित होता है। सुप्रीम कोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ नारायण प्रसाद साहू की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। हाईकोर्ट ने साहू की पुनिर्विचार याचिका खारिज कर दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह था पूरा मामला
अभियोजन का केस था कि 16 जनवरी, 2002 को वह कागपुर के साप्ताहिक बाजार में चना दाल बेच रहा था। इस दौरान एक खाद्य निरीक्षक ने उससे विक्रेता लाइसेंस दिखाने को कहा जो वो नहीं दिखा पाया। खाद्य निरीक्षक ने उससे 750 ग्राम चना दाल खरीदा और उसके तीन हिस्से करके जांच के लिए सरकारी एजेंसी को भेजे गए। जांच रिपोर्ट का दावा था कि चना दाल में मिलावट थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसे छह महीने की कैद और 1000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सत्र न्यायालय ने उसकी सजा को बरकरार रखा। साहू ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दी और 2018 में वहां भी उसकी याचिका खारिज हो गई। तब उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जहां उसे जीत मिली।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed