सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को फटकारा, कहा- अवमानना प्रक्रिया शुरू किए बिना, नहीं माने जाते निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 82 वर्षीय कोरोना पीड़ित राम लाल यादव के बेटे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान 25 अप्रैल को समन जारी किया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के बेपरवाह रवैये पर कड़ी फटकार लगाते हुए कहा, जब तक अवमानना की प्रक्रिया शुरू न की जाए तब तक निर्देश नहीं मानना उसकी आदत बन गई है। शीर्ष अदालत पिछले साल प्रयागराज के टीबी सप्रू अस्पताल से 82 साल के कोरोना पीड़ित के कथित तौर पर गायब होने से जुड़े मामले पर यह टिप्पणी की।
सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने यूपी सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद से कहा, आप निर्देशों का पालन नहीं करते, आखिरी मिनट में जब आप पर अवमानना की प्रक्रिया शुरू होने वाली होती है आप आ जाते हैं। यह आपके राज्य की आदत बन गई है। पीठ यूपी सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रदेश के मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय समेत आठ अधिकारियों को समन करने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी।
पीठ ने राज्य की याचिका पर नोटिस जारी किया और हाईकोर्ट में इस मामले में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी। साथ ही राज्य सरकार को वादी पक्ष को कानूनी खर्च और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश होने के लिए 50 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया। इस मामले में अब जुलाई में सुनवाई होगी।
हाईकोर्ट ने इन अफसरों को भेजा था समन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 82 वर्षीय कोरोना पीड़ित राम लाल यादव के बेटे की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान 25 अप्रैल को समन जारी किया था। हाईकोर्ट ने रामलाल को 6 मई को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया और ऐसा नहीं करने पर प्रमुख सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), अतिरिक्त मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक, प्रयागराज के डीएम, एसएसपी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी और अस्पताल के मुख्य चिकित्सा निरीक्षक को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था। यूपी सरकार व अधिकारियों ने आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
अधिकारियों की पेशी में छूट के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दें
पीठ ने हाईकोर्ट द्वारा राज्य के अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने के निर्देश पर कहा, चूंकि मामला पहले से ही हाईकोर्ट के समक्ष है इसलिए पेशी में छूट के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दिया जाए।
क्या है मामला
82 वर्षीय रामलाल यादव के बेटे ने हाईकोर्ट में याचिका देकर अपने पिता को टीबी सप्रू अस्पताल से छुड़वाने की अपील की थी। उसके पिता को पिछले साल 4 मई को कोरोना होने के बाद वहां भर्ती किया गया था। 6 मई को वह खुद कोरोना संक्रमित हो गया और घर पर ही आईसोलेशन में रहा। अगले दिन अस्पताल के अधिकारियों ने उसे बताया कि उसके पिता का ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिर गया है और उन्हें ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कर दिया गया है। 8 मई को अस्पताल प्रबंधन ने खबर दी कि उसके पिता लापता हो गए हैं।
कोर्टरूम लाइव: तो क्या हवा में गायब हो गया अस्पताल में भर्ती 82 साल का बुजुर्ग
- एएजी : कोर्ट लापता व्यक्ति को पेश करने को कह रहा है।
- पीठ : जो चल भी नहीं सकता, वह लापता कैसे हो गया।
- एएजी : जांच के लिए दो एसआईटी बनाई हैं। पता लगाया जा रहा है कि क्या गायब व्यक्ति को गैरकानूनी हिरासत में रखा गया।
- जस्टिस कृष्ण मुरारी : ये आज की बात नहीं। पिछले साल 7 मई से बुजुर्ग गायब है। जब भर्ती कराया, वह चल भी नहीं सकता था। फिर अस्पताल से आखिर उसका शरीर कहां चला गया।
- जस्टिस हिमा कोहली : उन्हें लापता हुए एक साल हो गया है। परिवार की हताशा की कल्पना कीजिए। परिवार की पीड़ा को देखिए।
- एएजी : हमने यह भी पता लगाया कि उनके शरीर का अन्य शवों में अंतिम संस्कार तो नहीं किया गया? अस्पताल में हुई अंतिम जांच में वे सही थे।
- जस्टिस कृष्ण मुरारी : इसका यह मतलब कि वह हवा में गायब हो गया।
क्या मुआवजे के लिए भी आना होगा कोर्ट
- पीठ : क्या पीड़ित परिवार को कुछ मुआवजा दिया जा रहा है?
- एएजी : राज्य मुआवजे को तैयार है, अदालत निर्देश दे सकती है।
- पीठ : आप खुद कुछ नहीं कर रहे हैं। आखिर उन्हें इसके लिए सुप्रीम कोर्ट क्यों आना चाहिए?
पेशी में छूट के लिए हाईकोर्ट जाएं
हाईकोर्ट द्वारा अधिकारियों को कोर्ट में पेश होने के निर्देश पर पीठ ने कहा, पेशी में छूट के लिए हाईकोर्ट में आवेदन दें।