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SC: सेवानिवृत सैनिकों की पेंशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को फटकार, नीति बनाने का निर्देश
Thu, 30 Jan 2025 03:32 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 30 Jan 2025 03:32 PM IST
सार
पीठ ने कहा कि हमारा ऐसा मानना है कि केंद्र सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिसमें सशस्त्र बलों के जवानों को सुप्रीम कोर्ट में खींचने की समीक्षा हो सके। पीठ ने कहा कि इस तरह से सैनिकों के हौसलों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार को सेना के सेवानिवृत कर्मियों की पेंशन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई। साथ ही अदालत ने केंद्र से रिटार्यड सैनिकों की पेंशन के मुद्दे पर नीति बनाने का निर्देश दिया। सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल ने सेवानिवृत रेडियो फिटर को दिव्यांगता पेंशन देने का आदेश दिया था। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के इस कदम के प्रति नाराजगी जाहिर की।
जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइंया की पीठ ने कहा कि 'सेना के एक जवान ने 15-20 साल सेना में सेवा दी और सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल ने उन्हें पेंशन देने का आदेश दिया था। फिर इन लोगों को सुप्रीम कोर्ट में क्यों खींचा गया? सरकार को इस मामले में व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।' पीठ ने कहा कि हमारा ऐसा मानना है कि केंद्र सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिसमें सशस्त्र बलों के जवानों को सुप्रीम कोर्ट में खींचने की समीक्षा हो सके। पीठ ने कहा कि इस तरह से सैनिकों के हौसलों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
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जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइंया की पीठ ने कहा कि 'सेना के एक जवान ने 15-20 साल सेना में सेवा दी और सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल ने उन्हें पेंशन देने का आदेश दिया था। फिर इन लोगों को सुप्रीम कोर्ट में क्यों खींचा गया? सरकार को इस मामले में व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।' पीठ ने कहा कि हमारा ऐसा मानना है कि केंद्र सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिसमें सशस्त्र बलों के जवानों को सुप्रीम कोर्ट में खींचने की समीक्षा हो सके। पीठ ने कहा कि इस तरह से सैनिकों के हौसलों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
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सुरजागढ़ खदान आगजनी मामले में अगले हफ्ते सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सुरजागढ़ खदान आगजनी मामले में सुनवाई अगले हफ्ते के लिए टाल दी है। यह सुनवाई वकील सुरेंद्र गाडलिंग की याचिका पर होगी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश होने वाले एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल राजा ठाकरे की अनुपस्थिति के चलते मामले की सुनवाई अगले हफ्ते के लिए टाल दी। 25 दिसंबर 2016 को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में माओवादियों ने सुरजागढ़ लौह अयस्क खदान में परिवहन में लगे 76 वाहनों को आग लगा दी थी। सुरेंद्र गाडलिंग पर आरोप है कि उन्होंने माओवादियों की मदद की। पुलिस ने गाडलिंग के खिलाफ यूएपीए कानून के तहत धाराओं में मामला दर्ज किया।