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Supreme Court: 'पंडित नेहरू ने बड़ौदा की महारानी के लिए रोल्स रॉयस मंगवाई'; वैवाहिक मुकदमे में दी गई रोचक दलील
Fri, 15 Nov 2024 07:31 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 15 Nov 2024 07:31 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में एक रोचक मुकदमे में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की तरफ से दिए गए उपहार का जिक्र किया गया। शादी से जुड़े इस मामले में बड़ौदा की महारानी को दिए गए उपहार का जिक्र किया गया। जानिए क्या है यह पूरा वैवाहिक विवाद, जिसमें दशकों पहले प्रधानमंत्री की तरफ से दी गई कार को उदारहण के तौर पर पेश किया गया।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की तरफ से दिए गए उपहार को मिसाल के तौर पर पेश किया गया। इस मामले में याचिकाकर्ता का दावा है कि पंडित नेहरू ने दशकों पहले 1951 मॉडल की एक पुरानी हस्तनिर्मित क्लासिक रोल्स रॉयस कार विदेश से भारत मंगवाई थी। इसे तत्कालीन 'महारानी' बड़ौदा को उपहार देने के लिए मंगवाया गया था। यह आज तक की एकमात्र कार है, जिसकी कीमत 2.5 करोड़ रुपये से अधिक है।
मध्यस्थता के माध्यम से समझौते की संभावना तलाशें
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ में एक वैवाहिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने महिला तरफ से पैरवी की। शीर्ष अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने दोनों पक्षों से मध्यस्थता के माध्यम से समझौते की संभावना तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि विवाद को सुलझाने के लिए एक और प्रयास किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मध्यस्थता पहले विफल हो चुकी है लेकिन...
यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ से जुड़ा है। महिला ने कथित दहेज की मांग और क्रूरता के लिए अपने पति के खिलाफ मुकदमा दायर किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया गया। पति-पत्नी अलग हो चुके हैं, लेकिन अब यह वैवाहिक विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने कहा, दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया है कि मध्यस्थता अलग-अलग मंचों पहले विफल हो चुकी है। इसके बावजूद अदालत का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय मध्यस्थता केंद्र के तत्वावधान में एक और प्रयास करना उचित रहेगा। इसका मकसद पक्षों को उनके विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए एक और अवसर देना है। शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत को मध्यस्थ नियुक्त किया। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 18 दिसंबर को तय की।
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अलग हो चुके पति और ससुराल वालों ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार की मांग
याचिकाकर्ता ग्वालियर की महिला है। उसने दावा किया है कि वह प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है। उसके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे। जिन्हें कोंकण क्षेत्र का शासक घोषित किया गया था। महिला ने दावा किया कि उसके अलग हो चुके पति और ससुराल वालों ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग कर उसे लगातार परेशान और प्रताड़ित किया।
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र क्यों हुआ
महिला ने अपनी याचिका में कहा, हाईकोर्ट ने पांच दिसंबर, 2023 के अपने आदेश में इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रतिवादी (पिता और पति) ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग की। महिला के मुताबिक मांगी गई कार अपने आप में अनूठी है जिसे एचजे मुलिनर एंड कंपनी ने महारानी बड़ौदा चिमना बाई साहिब गायकवाड़ के लिए हाथ से बनाया है। इसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनकी ओर से ऑर्डर किया था। महिला ने कहा कि मांग पूरी न होने पर प्रतिवादियों ने शादी से इनकार कर दिया। शादी के बाद झूठे और तुच्छ आरोप लगाने के साथ-साथ चरित्र पर भी हमला किया।
महिला पर धोखाधड़ी करने का आरोप
पति एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखता है जिसकी पृष्ठभूमि सेना की है और जो मध्य प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान चलाता है। उसने महिला के आरोपों से इनकार किया है। पति ने अपनी अलग रह रही पत्नी, उसके माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ विवाह प्रमाण पत्र तैयार करने का आरोप लगाकर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया। महिला ने दहेज उत्पीड़न और क्रूरता का मामला दर्ज कराया। हालांकि, हाईकोर्ट ने महिला की एफआईआर को निरस्त कर दिया।
2018 में विवाह की पवित्रता पर संदेह... दहेज मांगने से भी इनकार
महिला के आरोपों के जवाब में पति ने कहा कि उसे उत्तराखंड के ऋषिकेश में 20 अप्रैल, 2018 को हुए विवाह की पवित्रता पर संदेह है। पति ने कहा कि महिला के पारिवारिक गुरु के अनुसार ज्योतिषीय कारणों से पूरे अवसर को 'प्रतीकात्मक विवाह' के रूप में माना गया। दोनों पति-पत्नी के रूप में एक दिन भी साथ नहीं रहे, इस कारण कथित विवाह अधूरा है। पति ने दावा किया कि महिला ने ग्वालियर में विवाह को "धोखाधड़ी" कर पंजीकृत करा लिया। उसने दहेज के रूप में रोल्स रॉयस कार और मुंबई में फ्लैट मांगने के आरोपों से भी इनकार किया।
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मध्यस्थता के माध्यम से समझौते की संभावना तलाशें
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ में एक वैवाहिक मुकदमे की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने महिला तरफ से पैरवी की। शीर्ष अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने दोनों पक्षों से मध्यस्थता के माध्यम से समझौते की संभावना तलाशने को कहा। उन्होंने कहा कि विवाद को सुलझाने के लिए एक और प्रयास किया जाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मध्यस्थता पहले विफल हो चुकी है लेकिन...
यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ से जुड़ा है। महिला ने कथित दहेज की मांग और क्रूरता के लिए अपने पति के खिलाफ मुकदमा दायर किया, लेकिन उच्च न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया गया। पति-पत्नी अलग हो चुके हैं, लेकिन अब यह वैवाहिक विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने कहा, दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया है कि मध्यस्थता अलग-अलग मंचों पहले विफल हो चुकी है। इसके बावजूद अदालत का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय मध्यस्थता केंद्र के तत्वावधान में एक और प्रयास करना उचित रहेगा। इसका मकसद पक्षों को उनके विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए एक और अवसर देना है। शीर्ष अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत को मध्यस्थ नियुक्त किया। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 18 दिसंबर को तय की।
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अलग हो चुके पति और ससुराल वालों ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार की मांग
याचिकाकर्ता ग्वालियर की महिला है। उसने दावा किया है कि वह प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है। उसके पूर्वज छत्रपति शिवाजी महाराज की नौसेना में एडमिरल थे। जिन्हें कोंकण क्षेत्र का शासक घोषित किया गया था। महिला ने दावा किया कि उसके अलग हो चुके पति और ससुराल वालों ने दहेज के तौर पर रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग कर उसे लगातार परेशान और प्रताड़ित किया।
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र क्यों हुआ
महिला ने अपनी याचिका में कहा, हाईकोर्ट ने पांच दिसंबर, 2023 के अपने आदेश में इस बात पर विचार नहीं किया कि प्रतिवादी (पिता और पति) ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से रोल्स रॉयस कार और मुंबई में एक फ्लैट की मांग की। महिला के मुताबिक मांगी गई कार अपने आप में अनूठी है जिसे एचजे मुलिनर एंड कंपनी ने महारानी बड़ौदा चिमना बाई साहिब गायकवाड़ के लिए हाथ से बनाया है। इसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उनकी ओर से ऑर्डर किया था। महिला ने कहा कि मांग पूरी न होने पर प्रतिवादियों ने शादी से इनकार कर दिया। शादी के बाद झूठे और तुच्छ आरोप लगाने के साथ-साथ चरित्र पर भी हमला किया।
महिला पर धोखाधड़ी करने का आरोप
पति एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखता है जिसकी पृष्ठभूमि सेना की है और जो मध्य प्रदेश में एक शैक्षणिक संस्थान चलाता है। उसने महिला के आरोपों से इनकार किया है। पति ने अपनी अलग रह रही पत्नी, उसके माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ विवाह प्रमाण पत्र तैयार करने का आरोप लगाकर धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज कराया। महिला ने दहेज उत्पीड़न और क्रूरता का मामला दर्ज कराया। हालांकि, हाईकोर्ट ने महिला की एफआईआर को निरस्त कर दिया।
2018 में विवाह की पवित्रता पर संदेह... दहेज मांगने से भी इनकार
महिला के आरोपों के जवाब में पति ने कहा कि उसे उत्तराखंड के ऋषिकेश में 20 अप्रैल, 2018 को हुए विवाह की पवित्रता पर संदेह है। पति ने कहा कि महिला के पारिवारिक गुरु के अनुसार ज्योतिषीय कारणों से पूरे अवसर को 'प्रतीकात्मक विवाह' के रूप में माना गया। दोनों पति-पत्नी के रूप में एक दिन भी साथ नहीं रहे, इस कारण कथित विवाह अधूरा है। पति ने दावा किया कि महिला ने ग्वालियर में विवाह को "धोखाधड़ी" कर पंजीकृत करा लिया। उसने दहेज के रूप में रोल्स रॉयस कार और मुंबई में फ्लैट मांगने के आरोपों से भी इनकार किया।