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SC: राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष को हटाने का 'सुप्रीम' आदेश; कहा- नियुक्ति कानून के अनुसार नहीं

Wed, 12 Feb 2025 01:14 PM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 12 Feb 2025 01:14 PM IST
सार

आदेश डॉ. अमरागौड़ा एल. पाटिल द्वारा डॉ. खुराना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है। पद के लिए आवेदक पाटिल ने इस आधार पर नियुक्तियों को चुनौती दी थी कि खुराना के पास राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 की धारा 4(2) और 19 के तहत अपेक्षित अनुभव नहीं है।

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Supreme Court orders removal of Chairman of National Commission for Homeopathy
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) के अध्यक्ष को उनके पद से इस्तीफा देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति कानून के अनुसार नहीं है। कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने डॉ. अनिल खुराना को एक सप्ताह के भीतर पद छोड़ने का निर्देश दिया।

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पीठ ने कहा, 'प्रतिवादी को तत्काल अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहिए। तत्काल से हमारा तात्पर्य आज से एक सप्ताह के भीतर है, ताकि वह अपना काम पूरा कर सकें। हालांकि, इसमें वित्त से जुड़ा कोई भी नीतिगत निर्णय शामिल नहीं है। अध्यक्ष के पद की नियुक्ति के लिए नयी प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए।'
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यह आदेश डॉ. अमरागौड़ा एल. पाटिल द्वारा डॉ. खुराना की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है। पद के लिए आवेदक पाटिल ने इस आधार पर नियुक्तियों को चुनौती दी थी कि खुराना के पास राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 की धारा 4(2) और 19 के तहत अपेक्षित अनुभव नहीं है।

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Supreme Court orders removal of Chairman of National Commission for Homeopathy
Supreme Court - फोटो : PTI

'शिक्षा में किसी से भेदभाव नहीं होगा', रोहिंग्या शरणार्थियों से संबंधित याचिका पर कोर्ट 
शीर्ष अदालत ने रोहिंग्या शरणार्थियों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह के लिए तय करते हुए बुधवार को कहा कि शिक्षा के मामले में किसी भी बच्चे के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र और दिल्ली सरकार को दिल्ली में रोहिंग्या शरणार्थियों को सरकारी स्कूलों व अस्पतालों तक पहुंच प्रदान करने का निर्देश दे।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने शिक्षा में किसी तरह के भेदभाव न करने की बात कही और कहा कि अदालत सिर्फ यह जानना चाहती है कि ये रोहिंग्या परिवार कहां रह रहे हैं, किसके घर में रह रहे हैं और उनका विवरण क्या है। एनजीओ ‘रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस ने कहा कि उन्होंने एक हलफनामा दायर कर विस्तृत जानकारी दी है और बताया है कि रोहिंग्या शरणार्थियों के पास यूएनएचसीआर (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त) की ओर से जारी कार्ड हैं।

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