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सुप्रीम कोर्ट ने दिए फार्मूला वन रेस के मनोरंजन कर विवाद की जांच के आदेश

Fri, 22 Jan 2021 03:32 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 22 Jan 2021 03:32 AM IST
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Supreme Court orders inquiry of Formula One Race Entertainment tax dispute
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर स्थित बुद्ध इंटरनेशनल फार्मूला वन सर्किट फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को यहां इंटरनेशनल फार्मूला वन वर्ल्ड चैंपियनशिप के तहत तीन साल तक कराई गईं इंडियन ग्रां प्री रेस के आयोजन की जांच करने का आदेश दिया।

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शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के कर अधिकारियों से चार सप्ताह में यह रिपोर्ट मांगी है कि आयोजन के दौरान दर्शकों से मनोरंजन कर वसूला गया था या नहीं।
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चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लिमिटेड की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें कंपनी ने 2011 में शीर्ष अदालत के आदेश पर मनोरंजन कर के रूप में जमा कराई गई 24 करोड़ रुपये की रकम का रिफंड दिलाने का आग्रह किया है।
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दरअसल 2011 में एक याचिकाकर्ता अमित कुमार ने शीर्ष अदालत में जनहित याचिका दाखिल करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से फार्मूला वन रेस के लिए मनोरंजन कर छूट दिए जाने को चुनौती दी थी।

तब शीर्ष अदालत के निर्देश पर आयोजक कंपनी ने 24 करोड़ रुपये मनोरंजन कर के तौर पर जमा करा दिए थे। अब कंपनी ने इस आधार पर अपनी इस रकम का रिफंड मांगा है कि अमित कुमार की याचिका सुने जाने की योग्यता पूरा नहीं करती थी।

कंपनी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पीठ को बताया कि सरकार की तरफ से कर छूट दिए जाने के कारण जेपी स्पोर्ट्स ने दर्शकों को टिकट बेचते समय मनोरंजन कर की वसूली नहीं की थी। लेकिन याचिकाकर्ता अमित कुमार की तरफ से पेश वकील ने दातार के तर्क के विरोध में कहा कि एलीट वर्ग के खेल के लिए कर छूट दिया जाना उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश वकील ने भी कहा कि कंपनी ने जनता से मनोरंजन कर की वसूली की थी। इसलिए पैसा रिफंड करना अन्याय को बढ़ावा देना होगा।

शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उत्तर प्रदेश मनोरंजन व लाटरी कर अधिनियम के तहत सांविधानिक प्राधिकारी को मनोरंजन कर वसूले जाने की जांच करने और चार सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही कंपनी को भी कर नहीं वसूलने से जुड़े सबूत जांच अधिकारी के सामने पेश करने का निर्देश दिया।

पीठ ने पूछा, अनुच्छेद 32 के तहत क्यों सुनी गई याचिका
पीठ ने इस बात पर आश्चर्य जताया कि आयोजक कंपनी द्वारा मनोरंजन कर वसूले जाने के विवाद को संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत जनहित याचिका (पीआईएल) के तौर पर क्यों सुना गया? पीठ ने कहा, कर छूट को चुनौती देने वाली ऐसी याचिका पोषणीय नहीं है। आप कैसे कर छूट को अनुच्छेद-32 के तहत चुनौती दे सकते हैं?

सात साल से बंद पड़ा है ट्रैक
जेपी स्पोर्ट्स और फार्मूला वन वर्ल्ड चैंपियनशिप की आयोजक एफआईए के बीच 2009 में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर इंडियन ग्रां प्री के नाम से पांच इंटरनेशनल रेस कराने का कांट्रेक्ट हुआ था।


यहां पहली रेस अक्टूबर 2011 में आयोजित की गई। इसके बाद 2012 और 2013 में भी रेस का आयोजन हुआ, लेकिन कई विवादों के चलते इसके बाद रेस का आयोजन बंद हो गया और तब से यह ट्रैक बंद पड़ा है। हालांकि इसी सप्ताह यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण के अधिकारियों ने इस ट्रैक को दोबारा शुरू कराने की कवायद करने के संकेत दिए थे।

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