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सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश, अब शादियों पर होने वाले खर्च का भी देना होगा हिसाब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 13 Jul 2018 09:46 AM IST
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अब शादियों में होने वाले खर्चों का हिसाब-किताब बताने को सरकार जल्द ही अनिवार्य बनाने वाली है। दहेज लेन-देन को रोकने और दहेज कानून के तहत दर्ज होने वाली शिकायतों पर नजर रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जल्द ही नियम बनाने को कहा है। कोर्ट ने एक सुझाव देते हुए कहा कि शादी में होने वाले फालतू के खर्चों में कटौती कर उसका एक हिस्सा वधु के बैंक खाते में जमा किया जा सकता है, जिससे भविष्य में जरूरत पड़ने पर वो इसका इस्तेमाल कर सके।
गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शादी में हुए खर्चों का हिसाब-किताब बताना अनिवार्य बनाने पर केंद्र सरकार विचार करे और जल्द ही इस मामले में कोई नियम बनाए। कोर्ट ने एक सुझाव देते हुए कहा कि वर-वधु दोनों पक्षों को शादी पर हुए खर्चों की जानकारी विवाह अधिकारी (मैरिज ऑफिसर) को बताना अनिवार्य होना चाहिए।
कोर्ट ने इस अनिवार्यता के उद्देश्य को बताते हुए कहा कि अगर शादी में वर-वधु दोनों पक्षों की ओर से हुए खर्च का लेखा-जोखा विवाह अधिकारी के पास मौजूद रहता है तो इससे दहेज प्रताड़ना के तहत दर्ज किए गए मुकदमों में पैसे से जुड़े विवाद को सुलझाने में काफी हद तक मदद मिलेगी। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो जल्द ही ऐसी व्यवस्था लाए, जिससे ये पता लगाया जा सके कि शादी में कोई व्यक्ति कितना खर्च कर रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बाबत राय मांगी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस पर विचार करे और अपने कानून अधिकारी के जरिए कोर्ट तक अपने विचारों को पहुंचाए। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिंहा से भी कोर्ट ने इस बाबत अपनी राय अदालत के सामने रखने को कहा है।
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गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शादी में हुए खर्चों का हिसाब-किताब बताना अनिवार्य बनाने पर केंद्र सरकार विचार करे और जल्द ही इस मामले में कोई नियम बनाए। कोर्ट ने एक सुझाव देते हुए कहा कि वर-वधु दोनों पक्षों को शादी पर हुए खर्चों की जानकारी विवाह अधिकारी (मैरिज ऑफिसर) को बताना अनिवार्य होना चाहिए।
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कोर्ट ने इस अनिवार्यता के उद्देश्य को बताते हुए कहा कि अगर शादी में वर-वधु दोनों पक्षों की ओर से हुए खर्च का लेखा-जोखा विवाह अधिकारी के पास मौजूद रहता है तो इससे दहेज प्रताड़ना के तहत दर्ज किए गए मुकदमों में पैसे से जुड़े विवाद को सुलझाने में काफी हद तक मदद मिलेगी। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वो जल्द ही ऐसी व्यवस्था लाए, जिससे ये पता लगाया जा सके कि शादी में कोई व्यक्ति कितना खर्च कर रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस बाबत राय मांगी है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस पर विचार करे और अपने कानून अधिकारी के जरिए कोर्ट तक अपने विचारों को पहुंचाए। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस नरसिंहा से भी कोर्ट ने इस बाबत अपनी राय अदालत के सामने रखने को कहा है।