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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 'दो हफ्ते में SIT दाखिल करे जांच की स्टेटस रिपोर्ट', सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Mon, 27 Jul 2026 03:46 PM IST
Devesh Tripathi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 27 Jul 2026 03:46 PM IST
सार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का सुझाव दिया। यूपी सरकार ने इस सुझाव पर सहमति जताई। अदालत ने निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए एसआईटी से दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

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Supreme Court on Ram temple donation theft case asks SIT status report on probe within two weeks UP govt
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

राम मंदिर में ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से जांच की स्टेटस रिपोर्ट दो हफ्तों के भीतर दाखिल करने को कहा। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की ओर से बताया गया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की पुलिस जांच की निगरानी के लिए 25 जुलाई को एक एसआईटी का गठन किया गया था।
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वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को सुझाव दिया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी में एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव पर यूपी सरकार ने सहमति जताई। यूपी सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हमने पुलिस महानिरीक्षक किरण एस की अध्यक्षता में एक विशेष जांच समिति का गठन किया है। इसमें एक उप महानिरीक्षक, एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शामिल हैं।
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SIT में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का दिया निर्देश 
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा, ''लोगों ने 500 रुपये और 1000 रुपये दिए हैं। आखिर में पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुंचा है। ट्रस्ट को जो भी राशि मिली है, उसे वेबसाइट पर दिखाया जा सकता है ताकि लोगों को पता चले कि उनका पैसा ट्रस्ट तक पहुंच गया है। यह कोई विवादात्मक मामला नहीं है।''
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ये भी पढ़ें: Ayodhya: राम मंदिर में ऑनलाइन दान करते ही अब भक्तों को तुरंत रसीद, चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच पारदर्शिता पर जोर

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की। सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''हम इस मामले को बंद नहीं कर रहे हैं। सुधारात्मक कार्रवाई करनी होगी। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कुछ कदमों को आप नोट कर सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी होगा।


मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ''अभी आप सभी मुद्दों को नोट कर लें। फिलहाल हमारा पूरा ध्यान जांच पर है। हमें शीघ्र और गुणवत्तापूर्ण जांच करनी होगी। हम एसआईटी को दो हफ्ते में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दे रहे हैं। बाकी का फैसला हम बाद में करेंगे।''

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा था- अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं?
पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था, "जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।" साथ ही अदालत ने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा था कि "अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं।" सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि उसके पहले के निर्देशों का पालन करते हुए सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।
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