फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court of India BNSS bail rules cancellation grounds Justice JK Maheshwari criminal law reform India

Supreme Court: जमानत मिलने के बाद दूसरी FIR होने पर रद्द हो जाएगी बेल? जानें सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया

Mon, 27 Apr 2026 08:43 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 27 Apr 2026 08:43 PM IST
सार

क्या किसी को जमानत मिलने के बाद अगर उस पर कोई नया केस दर्ज हो जाए, तो क्या उसकी बेल रद्द हो जाएगी? सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया है। लेकिन वजह कुछ और निकली, आखिर कोर्ट ने ऐसा क्यों किया और नए कानून की धारा 480(3) क्या कहती है? जानिए इस फैसले की पूरी कहानी।
 

विज्ञापन
Supreme Court of India BNSS bail rules cancellation grounds Justice JK Maheshwari criminal law reform India
सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने नए आपराधिक कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। अक्सर यह देखा जाता है कि जमानत पर बाहर आए व्यक्ति पर कोई नया केस दर्ज होते ही उसकी पुरानी बेल रद्द कर दी जाती है। 

विज्ञापन


हालांकि अब अदालत ने साफ कर दिया है कि सिर्फ दूसरी एफआईआर (FIR) दर्ज होना बेल रद्द करने का मुख्य आधार नहीं हो सकता है। अदालत के इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी जमानत पुलिस सिर्फ अगले केस का हवाला देकर रद्द करवा देती थी।
विज्ञापन


 मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला क्यों पलटा?
 

  • यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के देवास जिले का है, जहां नारायण नाम के व्यक्ति को आबकारी एक्ट (शराब से जुड़े मामले) में नवंबर 2024 में जमानत मिली थी।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • जमानत मिलने के बाद पुलिस ने हाईकोर्ट में शिकायत की कि आरोपी ने बाहर आकर फिर से अपराध किया है।
  • पुलिस की इस शिकायत के आधार पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नारायण की जमानत को तुरंत रद्द कर दिया था।
  • इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की बेंच ने सुनवाई की।
  • सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत माना और नारायण की जमानत को फिर से बहाल कर दिया है।



अदालत ने जमानत रद्द करने से क्यों किया इनकार?
सुप्रीम कोर्ट ने नए कानून BNSS की धारा 480(3) का हवाला देते हुए इस पूरे मामले को बहुत ही आसान भाषा में समझाया। अदालत ने कहा कि बेल रद्द करने के कड़े नियम हर छोटे-मोटे मामले में लागू नहीं किए जा सकते हैं। यह नियम (धारा 480(3)) केवल उन गंभीर अपराधों में लागू होता है, जिनमें 7 साल या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान हो। नारायण के मामले में जो नया अपराध दर्ज हुआ था, उसमें सजा 5 साल से कम थी। इसलिए, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 5 साल से कम सजा वाले मामले में सिर्फ नई एफआईआर के आधार पर पुरानी जमानत नहीं छीनी जा सकती।


क्या आरोपी को मिल गई है पूरी छूट?
सुप्रीम कोर्ट ने नारायण की जमानत जरूर बहाल की है, लेकिन उसे पूरी तरह से खुली छूट नहीं दी है। जजों की बेंच ने आरोपी को सख्त चेतावनी दी है कि वह भविष्य में किसी भी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा। अगर वह दोबारा कोई ऐसा अपराध करता है जो गंभीर है, तो पुलिस उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो राज्य सरकार को कानून के अनुसार नए सिरे से बेल रद्द कराने का पूरा अधिकार होगा। यह फैसला पुलिस और निचली अदालतों के लिए एक बड़ा संदेश है कि बिना ठोस कानूनी आधार के किसी की आजादी नहीं छीनी जा सकती है।

अन्य वीडियो-

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed