फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Nitish Katara Murder Case Justice Abhay Oka Bench slams Delhi Govt personal liberty

Supreme Court: दिल्ली सरकार को सुप्रीम फटकार, कहा- हम एक व्यक्ति की स्वतंत्रता से जूझ रहे

Wed, 23 Apr 2025 08:48 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 23 Apr 2025 08:48 AM IST
सार

नीतीश कटारा हत्याकांड मामले में शीर्ष अदालत ने कहा- सजा पूरी होने के बाद भी रिहाई न होना हैरानी भरा है। दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई और कहा  हम एक व्यक्ति की स्वतंत्रता से जूझ रहे।

विज्ञापन
Supreme Court Nitish Katara Murder Case Justice Abhay Oka Bench slams Delhi Govt personal liberty
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली सरकार के इस रुख पर आपत्ति जताई कि 2002 के नीतीश कटारा हत्याकांड में बिना किसी छूट के 20 साल की जेल की सजा काट रहे एक दोषी को उसकी हिरासत पूरी होने के बाद भी रिहा नहीं किया जा सकता।

विज्ञापन


जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अर्चना पाठक दवे के इस तर्क पर हैरानी जताई कि सुखदेव यादव उर्फ पहलवान की स्वत: रिहाई नहीं हो सकती है। पीठ ने कहा, हम एक व्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामले पर विचार कर रहे हैं। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक दोषसिद्धि बरकरार रखी गई है। निश्चित अवधि दी गई है। यदि हम पाते हैं कि उसे कानूनी रूप से अनुमेय अवधि से अधिक हिरासत में रखा गया है, तो वह हिरासत अवैध होगी।
विज्ञापन


हिरासत का प्रत्येक दिन अवैध होगा। यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ मृदुल ने कहा कि उनके मुवक्किल ने 9 मार्च 2025 को सजा पूरी कर ली थी। उन्होंने 9 मार्च के बाद यादव को हिरासत में रखने के किसी भी कानूनी औचित्य से इन्कार किया और कहा कि दिल्ली सरकार सजा की गलत व्याख्या कर रही है। हालांकि, दवे ने तर्क दिया कि 20 साल बाद स्वत : रिहाई नहीं हो सकती है और आजीवन कारावास का मतलब जीवन के शेष रहने तक जेल होता है। एएसजी ने आपत्ति भी उठाई कि याचिकाकर्ता ने शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में रिहाई नहीं, बल्कि फरलो (छुट्टी) मांगी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Supreme Court: 'क्रिकेट मैच फिक्सिंग का अर्थव्यवस्था पर गंभीर वित्तीय असर'; सख्ती के साथ सुप्रीम जांच के आदेश


यह है मामला
3 अक्तूबर, 2016 को,सुप्रीम कोर्ट ने विकास और उसके चचेरे भाई विशाल को कटारा के सनसनीखेज अपहरण और हत्या में उनकी भूमिका के लिए बिना किसी छूट के 25 साल की जेल की सजा सुनाई थी। सह-दोषी यादव को इस मामले में 20 साल की जेल की सजा दी गई थी। उन्हें 16-17 फरवरी, 2002 की मध्यरात्रि को एक शादी समारोह से कटारा का अपहरण करने और फिर विकास की बहन भारती यादव के साथ कथित प्रेम संबंध के कारण उसकी हत्या करने के लिए दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई थी।

ये भी पढ़ें- Pegasus Row: पेगासस पर 29 अप्रैल को 'सुप्रीम' सुनवाई, जानें क्या है इस्राइली सॉफ्टवेयर से फोन हैकिंग का मामला

भारती उत्तर प्रदेश के राजनेता डी पी यादव की बेटी थी। निचली अदालत ने टिप्पणी की थी कि कटारा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि विशाल और विकास यादव भारती के साथ उसके प्रेम संबंध को मंजूरी नहीं देते थे क्योंकि वे अलग-अलग जातियों के थे।

संबंधित वीडियो--
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed