Supreme Court: DGP नियुक्ति पर सुप्रीम आदेश का पालन कर रही त्रिपुरा सरकार; अदालत को ब्याज दर तय करने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश
साल 2006 में प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि कानून व्यवस्था से इतर जांच के साथ ही सरकार को डीजीपी की नियुक्ति से पहले संघ लोकसेवा आयोग से भी चर्चा करनी चाहिए। आदेश के अनुसार, डीजीपी का चुनाव मौजूदा डीजीपी के रिटायरमेंट से पहले ही कर लिया जाना चाहिए और यह वरिष्ठता, अनुभव और मेरिट के आधार पर होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि एडहॉक डीजीपी की नियुक्ति के बजाय राज्यों को पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति करनी चाहिए। इसके लिए यूपीएससी तीन वरिष्ठ अधिकारियों के नाम राज्य सरकार को सुझाए, जिनमें से सरकार किसी एक नाम पर सहमति दे।
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याचिका में आरोप लगाया गया कि त्रिपुरा की डीजीपी की नियुक्ति में न्यायपालिका के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है। साथ ही नियुक्ति में पारदर्शिता और मेरिट का भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इस पर राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए वकीलों ने याचिकाकर्ता के दावे को खारिज कर दिया और कहा कि न्यायपालिका के आदेश के तहत ही नियुक्ति की जा रही है और 7 मार्च को इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है।
शीर्ष अदालत ने 52 साल से चल रही एक कानूनी लड़ाई का किया निपटारा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को ब्याज दर निर्धारित करने का अधिकार है। अदालतों को यह निर्णय लेने का भी अधिकार है कि ब्याज मुकदमा दायर करने की तिथि से देय होगा, उससे पहले की अवधि से, या प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर डिक्री की तिथि से। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने 52 साल से चल रही एक कानूनी लड़ाई का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की। यह मुकदमा निजी पक्ष आईके मर्चेंट्स प्रालि. और राजस्थान सरकार के बीच राज्य सरकार को हस्तांतरित शेयरों के मूल्यांकन को लेकर चल रहा था। पीठ ने शेयरों के मूल्यांकन से संबंधित विलंबित भुगतानों पर लागू ब्याज दर में भी संशोधन किया। 32 पेज का निर्णय लिखते हुए जस्टिस महादेवन ने कहा, यह पूरी तरह स्पष्ट है कि न्यायालयों को कानून के अनुसार उचित ब्याज दर निर्धारित करने का अधिकार है। निजी फर्म की ओर से कलकत्ता हाईकोर्ट के 26 अप्रैल और 2 मई, 2022 के निर्णयों और आदेशों के खिलाफ अपील दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने मेसर्स रे एंड रे की ओर से संचालित शेयरों का मूल्यांकन 640 रुपये प्रति शेयर पर बरकरार रखा था और 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की साधारण ब्याज दर प्रदान की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर सेबी से किया प्रतिनिधित्व का अनुरोध
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा से कहा कि वे वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के पोर्टफोलियो होल्डिंग्स के सार्वजनिक प्रकटीकरण को अनिवार्य बनाने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को विस्तृत प्रतिनिधित्व दें। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें सेबी से यह आग्रह किया गया था कि वह एआईएफ, एफपीआई और उनके भारत में मध्यस्थों के अंतिम लाभकारी मालिकों और उनके पोर्टफोलियो का सार्वजनिक प्रकटीकरण अनिवार्य करे।
अक्षय ऊर्जा परियोजना का विरोध करने वाले एक एनजीओ को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के जयकवाड़ी बांध में अक्षय ऊर्जा परियोजना का विरोध करने वाले एक एनजीओ को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि अगर हर परियोजना का विरोध किया जाएगा, तो देश कैसे आगे बढ़ेगा। जयकवाड़ी बांध को पक्षी अभयारण्य और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने एनजीओ "कहार समाज पंच समिति" की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, "आपको किसने नियुक्त किया और किसने आपको फंड दिया? पर्यावरण संरक्षण में आपका क्या अनुभव है? इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट ने इस एनजीओ की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 9 सितंबर 2024 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा याचिका खारिज करने के फैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि ग्रीन पैनल ने मामले की सही तरीके से समीक्षा की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा में बार काउंसिल बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के अलावा शर्मनाक कृत्यों व गलत आचरण में लिप्त हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह उनके मामलों की जांच करने और खास तौर पर हरियाणा में बार निकायों के बैंक खातों की जांच करने के लिए एक विशेष जांच दल का गठन करेगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा, इन राज्य बार काउंसिल के वकीलों के कार्यालय और चैंबर प्रॉपर्टी डीलरों और भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। यह हमारे संज्ञान में आया है और हम उन्हें हल्के में नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने पेशे को बदनाम किया है। पीठ करनाल बार एसोसिएशन के चुनाव लड़ने से अयोग्यता को चुनौती देने वाले वकील संदीप चौधरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने बार निकायों को नोटिस जारी किया और करनाल बार एसोसिएशन के सदस्य वकील आरएस चीमा से मदद मांगी। पीठ ने चीमा से कुछ अन्य वरिष्ठ, प्रतिष्ठित वकीलों के नाम सुझाने को कहा, जो अस्थायी रूप से बार निकाय का पद संभाल सकें। याचिकाकर्ता के वकील नरेंद्र हुड्डा ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने बिना कोई वोट पड़े ही मतदान केंद्र के बाहर बैठकर उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने औद्योगिक उपभोक्ताओं की बिजली की खुली खरीद को नियमित करने के लिए राजस्थान विद्युत नियामक आयोग (आरईआरसी) के 2016 के नियम और शर्तों की वैधता को बरकरार रखा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने रामायण इस्पात प्रालि. समेत औद्योगिक उपभोक्ताओं की तरफ से दायर विभिन्न याचिकाएं खारिज कर दी। इन याचिकाओं में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर और जयपुर पीठों के फैसलों को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने आरईआरसी (खुली पहुंच के लिए नियम और शर्तें) विनियम, 2016 की वैधता को बरकरार रखा था।