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SC: CEC-EC की नियुक्ति से जुड़े कानून पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिकाओं पर सुनवाई के लिए राजी
Fri, 12 Jan 2024 11:26 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 12 Jan 2024 11:26 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसी समिति द्वारा निर्वाचन आयुक्त और मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए कानून को लागू करने पर रोक लगाने से इनकार किया, जिसमें प्रधान न्यायाधीश को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, कोर्ट ने नए कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया, जिसने भारत के मुख्य न्यायाधीश को चुनाव आयुक्तों के चयन पैनल से हटा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से अप्रैल में जवाब मांगा है।
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जानकारी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसी समिति द्वारा निर्वाचन आयुक्त और मुख्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए कानून को लागू करने पर रोक लगाने से इनकार किया, जिसमें प्रधान न्यायाधीश को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि, कोर्ट ने नए कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
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कांग्रेस नेता जया ठाकुर की याचिका पर सुनवाई
जस्टिस संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने नए कानून पर रोक लगाने की मांग वाली कांग्रेस नेता जया ठाकुर की याचिका पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विकास सिंह से याचिका की एक प्रति केंद्र सरकार के वकील को देने को कहा।
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क्या है नया कानून?
दरअसल, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए अधिकृत समिति में भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को शामिल न किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच कोर्ट में कई याचिकाएं लगाई गई हैं। नए कानून में प्रावधान है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति एक चयन समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। इस समिति में प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), संसद में विपक्ष के नेता (सदस्य), प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री (सदस्य) होंगे।
विपक्ष ने किया था विरोध
विपक्ष ने मोदी सरकार पर चयन समिति से सीजेआई को हटाकर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करने का आरोप लगाया है। कोर्ट ने मार्च 2023 में अपने आदेश में कहा था कि प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और सीजेआई मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों का चयन करेंगे।
सुखबीर बादल मामले में पंजाब सरकार की याचिका SC ने किया खारिज
शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ 2021 में दर्ज एक मुकदमें को रद्द करने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की अपील शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। दो सदस्यीय खंड पीठ ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया, केवल एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील क्यों की।
पीठ ने पंजाब सरकार के वकील से कहा कि एक राजनीतिक नेता घटनास्थल का निरीक्षण करने या कुछ और करने के लिए वहां गया था, तो उस पर मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें कोई अपराध तो नहीं दिख रहा जैसे आरोप लगाए गए हैं। वकील ने कहा कि हाईकोर्ट ने गलत तरीके से मुकदमें को रद्द कर दिया था। पीठ ने इस पर कहा कि दस्तावेज को देखा गया, जिसको देखकर लगता है कि कोई अपराध नहीं बनता है।
शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ 2021 में दर्ज एक मुकदमें को रद्द करने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की अपील शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। दो सदस्यीय खंड पीठ ने कहा कि मामले में शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया, केवल एफआईआर को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील क्यों की।
पीठ ने पंजाब सरकार के वकील से कहा कि एक राजनीतिक नेता घटनास्थल का निरीक्षण करने या कुछ और करने के लिए वहां गया था, तो उस पर मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें कोई अपराध तो नहीं दिख रहा जैसे आरोप लगाए गए हैं। वकील ने कहा कि हाईकोर्ट ने गलत तरीके से मुकदमें को रद्द कर दिया था। पीठ ने इस पर कहा कि दस्तावेज को देखा गया, जिसको देखकर लगता है कि कोई अपराध नहीं बनता है।
IPS संजय कुंडू से जुड़ी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सीनियर आईपीएस अधिकारी संजय कुंडू को उन आरोपों पर डीजीपी के पद से हटाने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। जिसमें कहा गया था कि उन्होंने एक व्यवसायी पर दवाब बनाने की कोशिश की थी, जिसने अपनी जान को खतरा बताया था। वहीं सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदे सरकार से मामले की जांच के लिए आईजी स्तर के अधिकारियों की एसआईटी बनाने को कहा है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुंडू का तबादला हिमाचल प्रदेश के डीजीपी से आयुष विभाग के प्रधान सचिव के पद पर कर दिया गया।
सीनियर आईपीएस अधिकारी संजय कुंडू को उन आरोपों पर डीजीपी के पद से हटाने के हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है। जिसमें कहा गया था कि उन्होंने एक व्यवसायी पर दवाब बनाने की कोशिश की थी, जिसने अपनी जान को खतरा बताया था। वहीं सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रदे सरकार से मामले की जांच के लिए आईजी स्तर के अधिकारियों की एसआईटी बनाने को कहा है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुंडू का तबादला हिमाचल प्रदेश के डीजीपी से आयुष विभाग के प्रधान सचिव के पद पर कर दिया गया।
जजों की सेवाएं समाप्त करने पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही हटाई गई महिला जजों को नोटिस जारी कर उनसे अपनी दलीलें रिकॉर्ड पर रखने को कहा है। पीठ ने कहा कि सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने रिट याचिका के रूप में पंजीकृत मामले का संज्ञान लिया था। इस मामले में न्याय मित्र बनाए गए वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि छह पूर्व न्यायाधीशों में से उन तीन ने भी अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है जिन्होंने पिछले साल अपनी सेवाएं खत्म होने के बाद शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
धेमाजी बम धमाका मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने 15 अगस्त 2004 को हुए धेमाजी बम विस्फोट के सिलसिले में उल्फा सदस्यों सहित पांच आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटने वाले गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सभी उत्तरदाताओं से जवाब मांगा है। इस विस्फोट में दस बच्चों और तीन महिलाओं की जान चली गई थी। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट समेत अन्य उत्तरदाताओं को नोटिस जारी किया। 24 अगस्त, 2023 को गौहाटी हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों, दीपांजलि बोरगोहेन, लीला गोगोई, जतिन दोवारी और मुही हांडिक व हेमेन गोगोई को भारतीय दंड की विभिन्न धाराओं के तहत सुनाई गई सजा को उलट दिया था।