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Supreme Court: औरंगाबाद का नाम बदलने के खिलाफ अर्जी खारिज, अब्दुल्ला आजम को लेकर भी आया अपडेट; पढ़ें अहम खबरें

Wed, 05 Apr 2023 10:50 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 05 Apr 2023 10:50 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को 15 अगस्त, 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थलों के चरित्र को बनाए रखने वाले 1991 के उपासना स्थल कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए सुनवाई जुलाई के लिए टाल दी। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट की अहम खबरें...

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Supreme Court News Updates Renaming of Aurangabad abdullah azam khan 1991 law on religious places Know All
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में औरंगाबाद शहर का नाम बदल कर छत्रपति संभाजी नगर करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार करने से बुधवार को इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सरकार के लोकतांत्रिक दायरे में आता है। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने यह भी उल्लेख किया कि यह विषय बॉम्बे हाईकोर्ट  के समक्ष विचाराधीन है। पीठ ने कहा कि हम इस विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं। हमें यह पसंद हो या नहीं, लेकिन यह सरकार के लोकतांत्रिक क्षेत्र में आता है। शहरों, सड़कों आदि का नाम चुनने वाले भला हम कौन होते हैं? यह निर्वाचित कार्यपालिका की शक्ति है। 

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अब्दुल्लाह आजम खान - फोटो : ANI

अब्दुल्ला आजम की याचिका पर विचार करे इलाहाबाद हाईकोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से कहा कि वह समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम खां की ओर से दायर याचिका पर 10 अप्रैल को सुनवाई करे। अब्दुल्ला आजम को स्टेट हाईवे पर धरना देने के 15 साल पुराने मामले में दो साल की सजा सुनाई गई थी। इससे पहले हाईकोर्ट के 17 मार्च के आदेश के खिलाफ अब्दुल्ला आजम खां ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को तीन सप्ताह में अपील का जवाब देने के लिए कहा था और सत्र अदालत के आदेश पर रोक लगाने से रोक नहीं लगाई थी। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय दोषसिद्धि को निलंबित करने की अर्जी पर सुनवाई कर सकता है। याचिकाकर्ता 10 अप्रैल को उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों और उच्च न्यायालय उस तारीख पर मामले पर सुनवाई करे।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

उपासना स्थल कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को 15 अगस्त, 1947 को प्रचलित धार्मिक स्थलों के चरित्र को बनाए रखने वाले 1991 के उपासना स्थल कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश देते हुए सुनवाई जुलाई के लिए टाल दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश(सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पर्दीवाला की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि तीन बार पहले भी केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए कहा जा चुका है, लेकिन अब तक जवाब नहीं आया है। पीठ ने केंद्र को जुलाई से पहले जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

कोर्ट की शर्त के खिलाफ वकील की याचिका पर शीर्ष अदालत करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक वकील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। याचिका में तमिलनाडु पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी के संबंध में मद्रास हाईकोर्ट द्वारा उसे अग्रिम जमानत देते समय उस पर लगाई गई एक शर्त को चुनौती दी गई है। वकील के खिलाफ प्रवासी श्रमिकों पर हमलों का दावा करने वाली झूठी सूचना देने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अधिवक्ता प्रशांत कुमार उमराव को कोर्ट ने शर्तों के साथ 21 मार्च को अग्रिम जमानत दी थी। इन शर्तों में यह भी शामिल था कि वह 15 दिन के लिए रोजाना सुबह साढ़े दस बजे और शाम साढ़े पांच बजे और उसके बाद पूछताछ के लिए आवश्यक होने पर पुलिस के सामने पेश होंगे।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

नगालैंड में शहरी निकाय चुनाव कार्यक्रम रद्द करने की अधिसूचना पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने नगालैंड में शहरी निकाय चुनाव कार्यक्रम रद्द करने संबंधी 30 मार्च की अधिसूचना पर बुधवार को रोक लगा दी। इस अधिसूचना में अगले आदेश तक चुनाव रद्द किया गया था, जोकि लगभग दो दशक बाद 16 मई को प्रस्तावित थे। आदिवासी और सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद नगालैंड विधानसभा ने चुनाव नहीं कराने का संकल्प लेते हुए नगरपालिका अधिनियम को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया था। इससे पहले 30 मार्च को राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें नगालैंड नगरपालिका अधिनियम 2001 निरस्त होने के मद्देनजर अगले आदेश तक पूर्व में अधिसूचित चुनाव कार्यक्रम को रद्द कर दिया था।

गर्भाशय हटाने के मामलों में केंद्र के दिशा-निर्देश लागू करें राज्य

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को गैरजरूरी ढंग से गर्भाशय हटाने के मामले में जांच के लिए केंद्र सरकार के जारी दिशा-निर्देशों को तीन महीने में लागू करने का निर्देश दिया है। सरकार की विभिन्न योजनाओं से उच्च बीमा शुल्क लेने के लिए लोग महिलाओं के गर्भाशय हटवाते हैं। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी परदीवाला की पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त मामला 2 मॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों पर गौर किया। भाटी ने पीठ को बताया कि समस्या से निपटने के लिए कार्य योजना में राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर हिस्टेरेक्टॉमी निगरानी समितियों के गठन और एक शिकायत पोर्टल शुरू करने का सुझाव शामिल हैं। इस पर पीठ ने कहा, चूंकि सरकार ने दिशा निर्देश तैयार करने में कई कदम उठाए हैं। इस याचिका को आगे विचाराधीन रखने का कारण नहीं है। केंद्र सरकार इन दिशा निर्देशों के मुताबिक आगे के कदम उठाएगी। साथ ही राज्य सरकारों को तीन महीने के भीतर इन दिशा निर्देशों को लागू करना होगा।

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