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SC: प्राग में पकड़े गए भारतीय की याचिका पर भारत में होगी सुनवाई; आतंकी पन्नू की हत्या की कथित साजिश का है आरोप

Fri, 15 Dec 2023 11:47 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 15 Dec 2023 11:47 AM IST
सार

जब पीठ ने पूछा कि याचिका किसने दायर की है? इस पर सुंदरम ने कहा कि याचिका निखिल गुप्ता के परिवार के एक सदस्य ने लगाई है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि पीठ के पास मामले की फाइल पढ़ने का समय नहीं था, क्योंकि यह हमें देर से मिली। इसलिए हम सुनवाई स्थगित करते हैं। 

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Supreme Court News Updates Nikhil Gupta arrested in failed plot to kill Gurpatwant Pannun moves Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कथित तौर पर खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के आरोपी निखिल गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। निखिल की ओर से कोर्ट में एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई है। याचिका में चेक गणराज्य में उसकी गिरफ्तारी और अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने की तैयारियों में भारत सरकार के हस्तक्षेप की मांग की गई है। 

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जस्टिस संजय खन्ना और एसवीएन भट्टी ने पाया कि निखिल को राहत के लिए संबंधित कोर्ट के पास जाना चाहिए, जोकि चेक गणराज्य में है। याचिका के मुताबिक, निखिल फिलहाल चेक गणराज्य की जेल में है और उसके अमेरिका प्रत्यर्पण की तैयारी चल रही है। उस पर पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है।  
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'उस अदालत के सामने जाना होगा, जो भारत के बाहर'
न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि आपको उस अदालत के सामने जाना होगा, जो भारत के बाहर है। वहां जाइए। हम यहां कोई फैसला नहीं करने जा रहे हैं। हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने हलफनामा नहीं दिया है। अगर किसी कानून का उल्लंघन हो रहा है तो आपको वहां की अदालत में जाना होता है। 
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'विदेश मंत्रालय के लिए बेहद संवेदनशील मामला
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम ने कहा कि हम सिर्फ कांसुलर सहायता मांग रहे हैं। हमारा मकसद सरकार पर मदद के लिए दबाव डालना है। याचिकाकर्ता एक भारतीय नागरिक है। इस पर  जस्टिस खन्ना ने कहा कि यह विदेश मंत्रालय के लिए बेहद संवेदनशील मामला है। इस पर फैसला उन्हें करना है।

निखिल गुप्ता के परिवार के एक सदस्य ने लगाई याचिका
जब पीठ ने पूछा कि याचिका किसने दायर की है? इस पर सुंदरम ने कहा कि याचिका निखिल गुप्ता के परिवार के एक सदस्य ने लगाई है। जस्टिस खन्ना ने कहा कि पीठ के पास मामले की फाइल पढ़ने का समय नहीं था, क्योंकि यह हमें देर से मिली। इसलिए हम सुनवाई स्थगित करते हैं। 

छुट्टियों के बाद हम इसे 4 जनवरी को सुनवाई
इस पर सुंदरम ने सुनवाई की अगली तारीख देने का अनुरोध किया। इस पर न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा कि अनुरोध पर अगली सुनवाई पर विचार किया जाएगा। पीठ ने आदेश दिया कि छुट्टियों के बाद हम इसे 4 जनवरी को सुनेंगे। हम अगली तारीख तय करेंगे। केंद्रीय एजेंसी को इसकी प्रति मुहैया कराई जाए।

याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में कहा गया कि 52 साल के निखिल गुप्ता एक बिजनेस ट्रिप के दौरान चेक गणराज्य में थे। तभी 30 जून को उन्हें प्राग हवाई अड्डे पर अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें लगभग 100 दिनों तक एकांत कारावास में रखा गया। उनकी गिरफ्तारी में अनियमितताएं थीं। कोई औपचारिक गिरफ्तारी वारंट भी नहीं पेश किया गया। इसके अलावा स्थानीय चेक अधिकारियों के बजाय खुद को अमेरिकी एजेंट बनाने वाले लोगों ने गिरफ्तारी को अंजाम दिया।

कोर्ट से की यह मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि अदालत भारत सरकार को यह निर्देश दे कि वह चेक गणराज्य के प्राग में प्रत्यर्पण कोर्ट के सामने लंबित कार्यवाही में हस्तक्षेप करे, ताकि निखि गुप्ता को निष्पक्ष और पारदर्शी सुनवाई की गारंटी दी जाए। बता दें कि गुरपतवंत पन्नू भारत में वांटेड आतंकवादी है। उसके पास अमेरिका और कनाडा की नागरिकता है।

दिल्ली सरकार-एलजी के बीच हर विवाद पर सुनवाई नहीं कर सकते : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल (एलजी) के बीच हर मुद्दे पर सुनवाई नहीं कर सकता है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) की याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार करते हुए उसे दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा। डीसीपीसीआर ने याचिका में आरोप लगाया कि उसके फंड को रोक दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार और एलजी के बीच हर मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अनुच्छेद 32 याचिका के तहत कवर नहीं किया जा सकता है। सीजेआई ने डीसीपीसीआर के तरफ से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन से कहा, यह क्या हो रहा है, दिल्ली सरकार और एलजी के बीच हर तरह का विवाद यहां आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट को कुछ व्यापक सांविधानिक मुद्दों पर विचार करने के लिए है। लेकिन हर दो दिन में कोई न कोई मामला यहां आ रहा है। एक दिन पहले बस मार्शल की योजना बंद कर दी गई। उसको लेकर अदालत को अनुच्छेद 32 के तहत एक याचिका दायर की गई।


शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि आयोग दिल्ली सरकार से अलग स्वतंत्र रूप से काम करता है। लेकिन केंद्र दिल्ली सरकार जो कुछ भी कर रही है उसे रोक देता है। उन्होंने कहा कि केंद्र जो चाहें करे लेकिन हमारा धन न रोके। आखिर 60 लाख बच्चों को यह कैसे बताया जा सकता है कि आयोग के पास एक पैसा भी नहीं आने वाला है? संसद को आयोग से स्वतंत्र रूप से कार्य करने की अपेक्षा की गई है।

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