फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court news updates justice dinesh maheshwari retirement cji praise

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या हुई 33, सीजेआई ने जस्टिस माहेश्वरी को बताया 'सज्जन जज'

Fri, 12 May 2023 11:18 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Fri, 12 May 2023 11:18 PM IST
सार

जस्टिस माहेश्वरी के इस विदाई समारोह का आयोजन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने किया था। रिटायरमेंट के साथ ही जस्टिस माहेश्वरी का सुप्रीम कोर्ट में चार साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। 

विज्ञापन
supreme court news updates justice dinesh maheshwari retirement cji praise
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी रविवार को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में शुक्रवार को ही जस्टिस माहेश्वरी के विदाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विदाई कार्यक्रम के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की जमकर तारीफ की और उन्हें एक सज्जन जज करार दिया। बता दें कि जस्टिस माहेश्वरी के रिटायरमेंट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या घटकर 33 रह गई है। 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश ने कही बड़ी बात
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मैं जस्टिस माहेश्वरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समय से जानता हूं, जब हम इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच में साथ-साथ थे। लखनऊ में वह मेरे वरिष्ठ थे। जस्टिस माहेश्वरी एक सज्जन जज रहे हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि यहां तक कि खुद जस्टिस माहेश्वरी को याद नहीं होगा कि आखिरी बार उन्होंने कब गुस्सा किया था। जस्टिस माहेश्वरी की डिक्शनरी में ही गुस्सा शब्द है ही नहीं। 
विज्ञापन


विरासत में मिली वकालत
जस्टिस माहेश्वरी के इस विदाई समारोह का आयोजन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने किया था। रिटायरमेंट के साथ ही जस्टिस माहेश्वरी का सुप्रीम कोर्ट में चार साल का कार्यकाल समाप्त हो गया। 15 मई 1958 को राजस्थान के उदयपुर में जन्में जस्टिस माहेश्वरी 18 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए थे। जस्टिस माहेश्वरी के दादा और पिता भी वकालत से जुड़े रहे हैं। राजस्थान यूनिवर्सिटी के महाराजा कॉलेज से 1977 में भौतिकी में बीएससी करने के बाद जस्टिस माहेश्वरी ने 1980 में जोधपुर यूनिवर्सिटी से एलएलबी की और 1981 में राजस्थान बार काउंसिल के सदस्य बन गए। जस्टिस माहेश्वरी 2 सितंबर 2004 को राजस्थान हाईकोर्ट के जज बने। इसके बाद 2014 में वह इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज बने। 
विज्ञापन
विज्ञापन


साल 2016 में जस्टिस माहेश्वरी मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। इसके बाद 2018 में कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए। 18 जनवरी 2019 को जस्टिस माहेश्वरी सुप्रीम कोर्ट में जज बने। 

मुख्य न्यायाधीश ने लॉन्च किया ई-फाइलिंग 2.0
देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को ई-फाइलिंग 2.0 सेवा लॉन्च की। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने वकीलों से कहा कि इस सेवा के शुरू होने के बाद अब इलेक्ट्रोनिकली 24 घंटे याचिकाएं दायर की जा सकेंगी। मुख्य न्यायाधीश देश में ई कोर्ट बनाए जाने और ई-फाइलिंग के समर्थक रहे हैं। शुक्रवार को उन्होंने ई-सेवा केंद्र की भी शुरुआत की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ई-फाइलिंग 2.0 सेवा सभी वकीलों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेगी। मुख्य न्यायाधीश ने सभी वकीलों से अपील की कि वह ई-फाइलिंग सेवा का इस्तेमाल करें। वहीं ई सेवा केंद्र के जरिए वकील ना सिर्फ ई-फाइलिंग सॉफ्टवेयर की मदद से केस दायर कर सकेंगे, साथ ही केस का स्टेट्स जानने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी पा सकेंगे। 

आरोपपत्र दाखिल नहीं होने पर अदालतें डिफॉल्ट जमानत अर्जी पर करें सुनवाई- SC
 सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालतें और हाईकोर्ट 60 या 90 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं करने के आधार पर आपराधिक मामलों में डिफॉल्ट जमानत याचिकाओं पर विचार कर सकते हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके हाल में रितु छाबरिया मामले में आए फैसले पर निर्भर नहीं होना चाहिए। सीआरपीसी के तहत, यदि जांच एजेंसियां 60 या 90 दिनों में आरोपपत्र दाखिल नहीं कर पाती हैं तो एक अभियुक्त डिफॉल्ट जमानत का हकदार हो जाता है।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें रितु छाबरिया के फैसले को वापस लेने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट की एक अलग पीठ ने 26 अप्रैल को रितु छाबरिया मामले में फैसला दिया था। इसमें कहा गया था कि एक अभियुक्त वैधानिक जमानत का हकदार होगा, भले ही जांच एजेंसी जांच पूरी किए बिना एक अधूरी चार्जशीट दाखिल करे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें डिफॉल्ट जमानत नहीं दी गई है। जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने जोर देकर कहा था कि डिफॉल्ट जमानत का अधिकार केवल एक वैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि एक मौलिक अधिकार है जो अनुच्छेद 21 से उत्पन्न होता है।

इसने माना था कि सीआरपीसी के तहत वैधानिक जमानत एक महत्वपूर्ण अधिकार है और इसे जांच पूरी किए बिना चार्जशीट दाखिल करके खत्म नहीं किया जा सकता है।

सीजेआई की पीठ ने बाद में फैसले के खिलाफ केंद्र की याचिका पर ध्यान दिया और आदेश दिया कि रितु छाबरिया फैसले के आधार पर किसी अन्य अदालत के समक्ष दायर आवेदनों को 4 मई, 2023 तक के लिए टाल दिया जाए। बाद में, अदालत ने रितु छाबरिया फैसले को लागू करने पर रोक को 12 मई तक बढ़ा दिया।

वरिष्ठ वकील के रूप में नामित करने के लिए साक्षात्कार मानदंड को बरकरार 
सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा वकीलों को वरिष्ठ वकील के रूप में नामित करने के लिए साक्षात्कार मानदंड को बरकरार रखा। हालांकि इस दौरान कोर्ट ने एक मानदंड के रूप में प्रकाशन की संख्या के लिए दिए जाने वाले प्वाइंट को हटा दिया।
जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने यह भी फैसला सुनाया कि असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर वरिष्ठ वकील का दर्जा प्रदान करने के लिए न्यायाधीशों द्वारा गुप्त मतदान नहीं किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा, 'हमने साक्षात्कार के मानदंड को बरकरार रखा है क्योंकि यह अधिक समग्र मूल्यांकन को सक्षम करेगा।

अधिवक्ता नामांकन के लिए विधि स्नातकों से 600 रुपये से अधिक शुल्क नहीं- सुप्रीम कोर्ट
सीमित पारिवारिक आय वाले विधि स्नातकों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राज्य बार काउंसिल उनसे नियमों के तहत निर्धारित 600 रुपये से अधिक नामांकन शुल्क नहीं ले सकती।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सभी राज्य बार काउंसिल को नोटिस जारी किया और उनसे जानना चाहा कि वे विधि स्नातकों से नामांकन शुल्क के रूप में कितना शुल्क लेते हैं और उनसे एक वर्ष में कितना पैसा एकत्र किया जाता है।

पीठ ने कहा कि अधिवक्ता अधिनियम के अनुसार, निर्धारित नामांकन शुल्क 600 रुपये है और कोई भी राज्य बार काउंसिल इससे अधिक शुल्क नहीं ले सकती है।

लेनदारों के बैंक खातों को फ्रॉड घोषित करने से पहले व्यक्तिगत सुनवाई का निर्देश नहीं दिया

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 27 मार्च के फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा कि उसने बैंकों को लेनदार के खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत करने से पहले ‘व्यक्तिगत सुनवाई’ करने का निर्देश नहीं दिया था। शीर्ष अदालत का यह स्पष्टीकरण भारतीय स्टेट बैंक की याचिका पर आया। एसबीआई ने 27 मार्च के फैसले से जुड़े दो मुद्दों को हरी झंडी दिखाई और कहा कि अब वे एनपीए खाताधारक जिनके खिलाफ फैसले से पहले कार्यवाही शुरू की गई थी, आकर कहेंगे कि सब कुछ रोक दिया जाए। क्योंकि बैंकों ने उनका पक्ष नहीं सुना गया।

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, हमने कभी नहीं कहा कि लेनदारों को व्यक्तिगत सुनवाई की अनुमति दी जाए। बल्कि हमने कहा था कि उन्हें पर्याप्त नोटिस दिया जाना चाहिए और प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया जाना चाहिए। फैसले के भावी प्रभाव से लागू होने के मुद्दे पर पीठ ने कहा, एसबीआई को फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करनी होगी। सीजेआई की पीठ ने 27 मार्च को तेलंगाना हाईकोर्ट के 2020 के फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें कहा गया था कि किसी खाते को फ्रॉड के रूप में वर्गीकृत करने से न केवल जांच एजेंसियों को अपराध की सूचना मिलती है, बल्कि लेनदार इसके लिए अन्य दंडात्मक और नागरिक परिणाम भी होते हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की मांग है कि लेनदारों को नोटिस दिया जाना चाहिए और फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्षों को स्पष्ट करने का अवसर दिया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, हमारा कानून ऐसा कभी नहीं रहा कि सुनवाई का मतलब व्यक्तिगत सुनवाई हो।

जयपुर धमाका : दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुनवाई अगले हफ्ते

सुप्रीम कोर्ट ने 2008 जयपुर बम धमाकों के चार दोषियों की रिहाई वाले राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली धमाकों के पीड़ितों की याचिका शुक्रवार को स्वीकार कर ली। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने पीड़ितों के परिवार की याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई बुधवार को होगी। राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराने वाले निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया था। जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 71 लोगों की मौत हुई थी और 185 लोग घायल हुए थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed