{"_id":"66f65f346a76a91154086d83","slug":"supreme-court-news-updates-arvind-kejriwal-cm-atishi-marlena-plea-hearing-adjourns-in-defamation-case-2024-09-27","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"SC: रेरा से अदालत नाराज, कहा- 'अफसरों' के लिए पुनर्वास केंद्र बना; लोटस 300 के फ्लैट खरीदारों को सुप्रीम राहत","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: रेरा से अदालत नाराज, कहा- 'अफसरों' के लिए पुनर्वास केंद्र बना; लोटस 300 के फ्लैट खरीदारों को सुप्रीम राहत
Fri, 27 Sep 2024 03:30 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 27 Sep 2024 03:30 PM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताई है। पीठ ने कहा, हम रेरा के बारे में बात नहीं करना चाहते। यह उन सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए पुनर्वास केंद्र बन गया है, जिन्होंने अधिनियम की पूरी योजना को नाकाम कर दिया है।
रेरा अधिनियम, 2016 को रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता को बढ़ावा देने, घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा करने और परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अधिनियमित किया गया था। शीर्ष अदालत शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बैंकों और वित्तीय संस्थानों को याचिकाकर्ताओं और घर खरीदारों से प्री-ईएमआई या पूर्ण ईएमआई वसूलने से परहेज करने के निर्देश देने की मांग को खारिज कर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने रेरा जैसे वैकल्पिक उपायों की उपलब्धता का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भारती जगत जोशी की इस याचिका को इसी तरह की लंबित एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया। याचिका में भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी।
विज्ञापन
लोटस 300 के फ्लैट खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, दो टावरों में रजिस्ट्री का आदेश
करीब 12 साल से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे नोएडा सेक्टर 107 के लोटस 300 प्रोजेक्ट के करीब 330 लोगों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने नोएडा प्राधिकरण को टावर-1 और 2 के फ्लैटों की रजिस्ट्री का काम चार हफ्ते में पूरा करने का आदेश दिया है। इन दोनों टावरों में फ्लैट खरीदने वालों को 2019 में ही ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिल गया था। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने रजिस्ट्री में नोएडा प्राधिकरण की आनाकानी पर कड़ा ऐतराज जताया। पीठ ने टावर 3, 4, 5 और 6 के फ्लैट खरीदारों को भी राहत दी। नोएडा प्राधिकरण को टावर में फ्लैट खरीदने वालों के साथ समन्वय करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा, ताकि उन्हें भी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिल सके और उसके बाद फ्लैटों की रजिस्ट्री करा सकें। इन टावरों के फ्लैट खरीदारों ने जुलाई में ही ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर चुके हैं। ब्यूरो
प्राधिकरण को वसूली से रोका
पीठ ने स्पष्ट किया कि फ्लैट खरीदारों पर प्राधिकरण का कुछ भी बकाया नहीं है। खरीदार पहले ही अपने हिस्से की रकम जमा करा चुके हैं। पीठ ने परियोजना की निगरानी या घर खरीदारों की सुविधा के लिए उठाए गए कदमों पर नोएडा प्राधिकरण से कुछ सवाल भी पूछे।
अनावश्यक दस्तावेज पर फटकारा
फ्लैट खरीदारों की परेशानियों पर दुख जताते हुए पीठ ने उनके एसोसिएशन से तरह-तरह के दस्तावेज मांगने पर भी नोएडा प्राधिकरण को फटकार लगाई। पीठ ने कहा, ये दस्तावेज देने की जिम्मेदारी बिल्डर की है। अब बिल्डर नहीं है, तो इसके लिए खरीदारों को परेशान नहीं किया जा सकता। प्राधिकरण को खरीदारों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई में उलझाने की बजाय उन्हें सुविधा देनी चाहिए, खासकर तब जब बिल्डर ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया है।
विज्ञापन
रेरा अधिनियम, 2016 को रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता को बढ़ावा देने, घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा करने और परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए अधिनियमित किया गया था। शीर्ष अदालत शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बैंकों और वित्तीय संस्थानों को याचिकाकर्ताओं और घर खरीदारों से प्री-ईएमआई या पूर्ण ईएमआई वसूलने से परहेज करने के निर्देश देने की मांग को खारिज कर दिया गया था।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने रेरा जैसे वैकल्पिक उपायों की उपलब्धता का हवाला दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भारती जगत जोशी की इस याचिका को इसी तरह की लंबित एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया। याचिका में भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में होगी।
विज्ञापन
लोटस 300 के फ्लैट खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, दो टावरों में रजिस्ट्री का आदेश
करीब 12 साल से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे नोएडा सेक्टर 107 के लोटस 300 प्रोजेक्ट के करीब 330 लोगों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने नोएडा प्राधिकरण को टावर-1 और 2 के फ्लैटों की रजिस्ट्री का काम चार हफ्ते में पूरा करने का आदेश दिया है। इन दोनों टावरों में फ्लैट खरीदने वालों को 2019 में ही ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिल गया था। जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने रजिस्ट्री में नोएडा प्राधिकरण की आनाकानी पर कड़ा ऐतराज जताया। पीठ ने टावर 3, 4, 5 और 6 के फ्लैट खरीदारों को भी राहत दी। नोएडा प्राधिकरण को टावर में फ्लैट खरीदने वालों के साथ समन्वय करने के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा, ताकि उन्हें भी ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट मिल सके और उसके बाद फ्लैटों की रजिस्ट्री करा सकें। इन टावरों के फ्लैट खरीदारों ने जुलाई में ही ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर चुके हैं। ब्यूरो
प्राधिकरण को वसूली से रोका
पीठ ने स्पष्ट किया कि फ्लैट खरीदारों पर प्राधिकरण का कुछ भी बकाया नहीं है। खरीदार पहले ही अपने हिस्से की रकम जमा करा चुके हैं। पीठ ने परियोजना की निगरानी या घर खरीदारों की सुविधा के लिए उठाए गए कदमों पर नोएडा प्राधिकरण से कुछ सवाल भी पूछे।
अनावश्यक दस्तावेज पर फटकारा
फ्लैट खरीदारों की परेशानियों पर दुख जताते हुए पीठ ने उनके एसोसिएशन से तरह-तरह के दस्तावेज मांगने पर भी नोएडा प्राधिकरण को फटकार लगाई। पीठ ने कहा, ये दस्तावेज देने की जिम्मेदारी बिल्डर की है। अब बिल्डर नहीं है, तो इसके लिए खरीदारों को परेशान नहीं किया जा सकता। प्राधिकरण को खरीदारों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई में उलझाने की बजाय उन्हें सुविधा देनी चाहिए, खासकर तब जब बिल्डर ने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की सीएम आतिशी मार्लेना की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाल दी है। अब इनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 30 सितंबर को सुनवाई करेगा। दरअसल भाजपा नेता राजीव बब्बर ने आम आदमी पार्टी के नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। इस मामले में हाईकोर्ट से भी केजरीवाल और आतिशी मार्लेना को झटका लगा चुका है।
दरअसल साल 2018 में अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली में अग्रवाल समाज के आठ लाख वोट थे, लेकिन भाजपा ने अग्रवाल समाज के चार लाख वोट कथित तौर पर मतदाता सूची से कटवा दिए। केजरीवाल ने दावा किया कि अग्रवाल समाज भाजपा का कट्टर वोटर था, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी से नाराजगी की वजह से ये भाजपा से नाराज हैं और इसी वजह से भाजपा ने इनके वोट ही कटवा दिए। केजरीवाल के इस दावे पर भाजपा नेता राजीव बब्बर ने केजरीवाल और अन्य आप नेताओं के खिलाफ मानाहानि का मुकदमा दायर कराया था। राजीव बब्बर का आरोप है कि केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लोगों को भाजपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश की।
दरअसल साल 2018 में अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली में अग्रवाल समाज के आठ लाख वोट थे, लेकिन भाजपा ने अग्रवाल समाज के चार लाख वोट कथित तौर पर मतदाता सूची से कटवा दिए। केजरीवाल ने दावा किया कि अग्रवाल समाज भाजपा का कट्टर वोटर था, लेकिन नोटबंदी और जीएसटी से नाराजगी की वजह से ये भाजपा से नाराज हैं और इसी वजह से भाजपा ने इनके वोट ही कटवा दिए। केजरीवाल के इस दावे पर भाजपा नेता राजीव बब्बर ने केजरीवाल और अन्य आप नेताओं के खिलाफ मानाहानि का मुकदमा दायर कराया था। राजीव बब्बर का आरोप है कि केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लोगों को भाजपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश की।
बेअंत सिंह हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने हवारा की याचिका पर केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बब्बर खालसा के आतंकवादी जगतार सिंह हवारा की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा, जो 1995 में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। हवारा ने दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र और दिल्ली, पंजाब सरकारों को नोटिस जारी कर हवारा की याचिका पर जवाब मांगा। हवारा 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट में बेअंत सिंह की हत्या से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, जिसमें 16 अन्य लोग भी मारे गए थे। सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि जेल में हवारा का आचरण स्पष्ट रहा है, सिवाय 22 जनवरी, 2004 को हुई कथित जेल ब्रेक की घटना के, जब वह भाग गया था और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। पीठ ने हवारा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस से पूछा, हवारा सुरंग खोदने में कैसे सफल रहा? गोंजाल्विस ने कहा, आज, हम मुख्य घटना से लगभग 30 साल दूर हैं और जेल ब्रेक से 20 साल दूर हैं। पीठ ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी किया और इसे चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बब्बर खालसा के आतंकवादी जगतार सिंह हवारा की याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा, जो 1995 में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। हवारा ने दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने की मांग की है।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र और दिल्ली, पंजाब सरकारों को नोटिस जारी कर हवारा की याचिका पर जवाब मांगा। हवारा 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए विस्फोट में बेअंत सिंह की हत्या से संबंधित मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है, जिसमें 16 अन्य लोग भी मारे गए थे। सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि जेल में हवारा का आचरण स्पष्ट रहा है, सिवाय 22 जनवरी, 2004 को हुई कथित जेल ब्रेक की घटना के, जब वह भाग गया था और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था। पीठ ने हवारा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस से पूछा, हवारा सुरंग खोदने में कैसे सफल रहा? गोंजाल्विस ने कहा, आज, हम मुख्य घटना से लगभग 30 साल दूर हैं और जेल ब्रेक से 20 साल दूर हैं। पीठ ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी किया और इसे चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
बॉम्बे हाईकोर्ट में जल्द ही कुछ और जजों की होगी नियुक्ति- CJI
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट में जल्द ही कुछ और जजों की नियुक्ति की जाएगी। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश ने की, जो न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अपील की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। एक वकील ने कहा, याचिकाओं को (सुनवाई के लिए) तभी सूचीबद्ध किया जाता है, जब उनका उल्लेख पीठ के समक्ष किया जाता है। हाईकोर्ट के कार्यभार का हवाला देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने वकील से कहा कि सरकार से और जजों की नियुक्ति करने के लिए कहें और फिर उनके पास पर्याप्त सदस्य और मामलों की सुनवाई के लिए समय होगा।
उन्होंने कहा, कुछ और दिन प्रतीक्षा करें, आपको बॉम्बे हाईकोर्ट में कुछ जज मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए कुछ सिफारिशें की हैं और वे सरकार के पास लंबित हैं। हाईकोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 94 है, जबकि वर्तमान में 66 जज हैं। परिणामस्वरूप, 28 रिक्तियां हैं।
24 सितंबर को, मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई की सर्वोच्च न्यायालय की कॉलेजियम ने नौ अधिवक्ताओं - राजेश सुधाकर दातार, सचिन शिवाजीराव देशमुख, गौतम अश्विन अंखड, महेंद्र माधवराव नेर्लिक, निवेदिता प्रकाश मेहता, प्रफुल्ल सुरेंद्रकुमार खुबलकर, अश्विन दामोदर भोबे, रोहित वासुदेव जोशी और अद्वैत महेंद्र सेठना - के नामों की सिफारिश बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए की थी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट में जल्द ही कुछ और जजों की नियुक्ति की जाएगी। यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश ने की, जो न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अपील की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। एक वकील ने कहा, याचिकाओं को (सुनवाई के लिए) तभी सूचीबद्ध किया जाता है, जब उनका उल्लेख पीठ के समक्ष किया जाता है। हाईकोर्ट के कार्यभार का हवाला देते हुए मुख्य न्यायाधीश ने वकील से कहा कि सरकार से और जजों की नियुक्ति करने के लिए कहें और फिर उनके पास पर्याप्त सदस्य और मामलों की सुनवाई के लिए समय होगा।
उन्होंने कहा, कुछ और दिन प्रतीक्षा करें, आपको बॉम्बे हाईकोर्ट में कुछ जज मिल जाएंगे। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के कॉलेजियम ने हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए कुछ सिफारिशें की हैं और वे सरकार के पास लंबित हैं। हाईकोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 94 है, जबकि वर्तमान में 66 जज हैं। परिणामस्वरूप, 28 रिक्तियां हैं।
24 सितंबर को, मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बीआर गवई की सर्वोच्च न्यायालय की कॉलेजियम ने नौ अधिवक्ताओं - राजेश सुधाकर दातार, सचिन शिवाजीराव देशमुख, गौतम अश्विन अंखड, महेंद्र माधवराव नेर्लिक, निवेदिता प्रकाश मेहता, प्रफुल्ल सुरेंद्रकुमार खुबलकर, अश्विन दामोदर भोबे, रोहित वासुदेव जोशी और अद्वैत महेंद्र सेठना - के नामों की सिफारिश बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए की थी।
मानहानि केस में केजरीवाल, आतिशी की याचिका पर सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्णयों के सारांश के साथ लॉन्च किया वेब पेज
सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों के सारांश प्रदान करने के लिए एक नया वेब पेज लॉन्च किया है। एक बयान में कहा गया है कि वेब पेज - 'ऐतिहासिक निर्णय सारांश' - नागरिकों के लिए न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों को समझना आसान बनाता है, जो कि सूचित नागरिक सुनिश्चित करने, कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने और कानून के साथ सार्वजनिक जुड़ाव बढ़ाने के न्यायालय के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है। इसमें कहा गया है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय देश भर में सार्वजनिक जीवन के विविध क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं।
इसमें कहा गया है कि अदालत अपने निर्णयों को सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के महत्व को पहचानती है। हालांकि, जटिल कानूनी भाषा और निर्णयों की लंबाई नागरिकों को न्यायालय के काम और निर्णयों को समझने में बाधा बन सकती है, और महत्वपूर्ण निर्णयों के बारे में गलत धारणाएं भी पैदा कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण निर्णयों के सारांश प्रदान करने के लिए एक नया वेब पेज लॉन्च किया है। एक बयान में कहा गया है कि वेब पेज - 'ऐतिहासिक निर्णय सारांश' - नागरिकों के लिए न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों को समझना आसान बनाता है, जो कि सूचित नागरिक सुनिश्चित करने, कानूनी जागरूकता को बढ़ावा देने और कानून के साथ सार्वजनिक जुड़ाव बढ़ाने के न्यायालय के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है। इसमें कहा गया है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय देश भर में सार्वजनिक जीवन के विविध क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं।
इसमें कहा गया है कि अदालत अपने निर्णयों को सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के महत्व को पहचानती है। हालांकि, जटिल कानूनी भाषा और निर्णयों की लंबाई नागरिकों को न्यायालय के काम और निर्णयों को समझने में बाधा बन सकती है, और महत्वपूर्ण निर्णयों के बारे में गलत धारणाएं भी पैदा कर सकती है।