Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से अभिषेक और रुजिरा बनर्जी को झटका; ईडी के समन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को मामले में फैसला सुनाया। याचिका पर फैसला 13 अगस्त को सुरक्षित रख लिया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट से तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को करारा झटका लगा है। कोर्ट ने बंगाल के स्कूलों में कथित भर्ती अनियमितताओं से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय के समन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी की ओर से दाखिल की गई थी।
न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को मामले में फैसला सुनाया। याचिका पर फैसला 13 अगस्त को सुरक्षित रख लिया गया था। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के सांसद और उनकी पत्नी ने मामले के मनी लॉन्ड्रिंग पहलू में एजेंसी की जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय के समन को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि ईडी उन्हें नई दिल्ली में पूछताछ के लिए नहीं बुला सकता। पूछताछ उनके सामान्य निवास स्थान यानी कोलकाता में ही होनी चाहिए।
इस्राइल को हथियारों निर्यात रोकने की मांग याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने गाजा में युद्ध लड़ रहे इस्राइल को हथियारों और सैन्य उपकरणों के निर्यात को रोकने के लिए केंद्र को निर्देश देने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि वह देश की विदेश नीति के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अगर इस्राइल निर्यात पर रोक लगाने का आदेश दिया जाता है तो इस्राइल को हथियारों के निर्यात में शामिल भारतीय कंपनियों पर अनुबंध संबंधी दायित्वों के उल्लंघन के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है।
जमीन के बदले वैकल्पिक भूखंड दे महाराष्ट्र सरकार: सर्वोच्च न्यायालय
उच्चतम न्यायालय ने आज महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वे 24 एकड़ से अधिक वैकल्पिक भूमि का “शांतिपूर्ण एवं मुक्त” कब्जा एक ऐसे व्यक्ति को सौंप दें, जिसकी भूमि पर छह दशक से अधिक समय पहले “अवैध” कब्जा किया गया था।
शीर्ष अदालत ने वन एवं राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश कुमार की बिना शर्त माफी भी स्वीकार कर ली, जिनके खिलाफ न्यायालय ने 28 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि विभाग द्वारा दायर हलफनामे में की गई “अवमाननापूर्ण टिप्पणियों” के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। हलफनामे से ऐसा प्रतीत होता है कि सर्वोच्च न्यायालय कानून का पालन नहीं करता है। कुमार की ओर से दायर हलफनामे में कहा गया, जिसे अदालत ने अवमाननापूर्ण पाया।
हलफनामे में कहा गया, “आवेदक के साथ-साथ न्यायालय भी कलेक्टर, पुणे द्वारा की गयी नयी गणना (आवेदक को मौद्रिक मुआवजा देने के लिए) को मंजूरी नहीं दे सकता है, लेकिन कानून के प्रावधानों का पालन करना और उचित गणना पर पहुंचना राज्य का कर्तव्य है।” कुमार ने अपने हलफनामे में कहा कि राज्य सरकार मुआवजे के तौर पर 48.65 करोड़ रुपये देने को तैयार है। हालांकि, आवेदक ने जोर देकर कहा कि जमीन का बाजार मूल्य 250 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बाद आवेदक ने मुआवजे के तौर पर जमीन का एक और टुकड़ा मांगा।
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने पुणे के कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि 24 एकड़ 38 गुंठा स्थानापन्न भूमि की माप की जाए, सीमांकन किया जाए और इसका “शांतिपूर्ण और मुक्त कब्जा आवेदक को सौंप दिया जाए”।
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और चार अन्य को 2002 में संप्रदाय के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या के मामले में बरी कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने मामले में दोषपूर्ण और अस्पष्ट जांच का हवाला दिया था। न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले में राम रहीम और अन्य को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
पीठ ने जगसीर सिंह द्वारा अधिवक्ता सत्यमित्र के माध्यम से दायर याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें उच्च न्यायालय के 28 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। उच्च न्यायालय ने कहा था कि नवंबर 2023 में जांच का जिम्मा संभालने वाली सीबीआई अपराध का मकसद स्थापित करने में विफल रही और अभियोजन पक्ष का मामला “संदेह से घिरा हुआ” था। इसने यह भी कहा था कि ‘मीडिया ट्रायल’ में रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन नहीं किया जाना चाहिए।
सिरसा मुख्यालय वाला यह संप्रदाय प्रमुख अपनी दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के मामले में 20 साल की जेल की सजा भी काट रहा है। वह फिलहाल हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद है। संप्रदाय के अनुयायी रंजीत सिंह की 10 जुलाई 2002 को हरियाणा के कुरुक्षेत्र के खानपुर कोलियान गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।