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SC: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को दी जमानत, तीन साल पहले हुई थी शिवसेना नेता की हत्या

Tue, 22 Aug 2023 11:34 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Tue, 22 Aug 2023 11:34 PM IST
सार

पीठ ने मुख्य आरोपी सूरज विजय अग्रवाल की ओर से पेश वकील सना रईस खान की दलीलों पर ध्यान दिया कि मामले में अन्य आरोपियों को शीर्ष अदालत से जमानत मिल चुकी है।

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Supreme court news & update: SC grants bail to accused in murder case of Shiv Sena leader
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में महाराष्ट्र में एक स्थानीय शिवसेना नेता की हत्या की साजिश रचने के आरोपी व्यक्ति को जमानत दे दी है।

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दलीलों पर दिया ध्यान

न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने मुख्य आरोपी सूरज विजय अग्रवाल की ओर से पेश वकील सना रईस खान की दलीलों पर ध्यान दिया कि मामले में अन्य आरोपियों को शीर्ष अदालत से जमानत मिल चुकी है। बता दें, शिवसेना के पूर्व लोनावला इकाई के प्रमुख राहुल उमेश शेट्टी की 26 अक्टूबर, 2020 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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अदालत ने यह कहा
पीठ ने सोमवार को कहा कि हमने इस बात को ध्यान में रखा कि उसके साथ साजिश में शामिल अन्य आरोपी को अदालत पहले ही जमानत दे चुकी है। इसलिए हम याचिकाकर्ता को जमानत देने का फैसला लिया है। न्यायमूर्ति ने आरोपी को जमानत देने के लिए अतिरिक्त शर्तें रखीं।

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यह है शर्त

पीठ ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता मुकदमे के लंबित रहने के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, वडगांव, मावल के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश नहीं करेगा, जब तक कि उसे संबंधित न्यायालय में उपस्थित होने की आवश्यकता न हो। गौरतलब है, बॉम्बे हाईकोर्ट ने 29 सितंबर, 2022 को अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

फैजल की सजा पर हाईकोर्ट फिर करे सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल की निचली अदालत की सजा को निलंबित करने के केरल हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इस मामले में नए सिरे से सुनवाई करने और छह सप्ताह में इस पर फिर से विचार करने को कहा।

धर्मांतरण सिंडिकेट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार से इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी की विशिष्ट भूमिका से अवगत कराने को कहा है। बता दें कि सितंबर 2021 में कथित तौर पर धार्मिक रूपांतरण सिंडिकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
शीर्ष अदालत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में इलाहाबाद  हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। इसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 उत्तर प्रदेश के प्रावधानों के तहत कथित अपराधों के लिए दर्ज मामले में सिद्दीकी को जमानत दी गई थी। 

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने यूपी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गरिमा प्रसाद से सिद्दीकी को दी गई विशिष्ट भूमिका क्या है? पीठ ने मामले को 5 सितंबर को फिर से सुनवाई के लिए पोस्ट किया है।

 जीएम सरसों पर मौखिक शपथ को वापस लेने के लिए केंद्र का आवेदन
 केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने आनुवांशिक रूप से संशोधित सरसों (जीएम मस्टर्ड) की व्यावसायिक खेती पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए नवंबर 2022 में दी गई ‘मौखिक शपथ’ को वापस लेने के लिए आवेदन दायर किया है। मौखिक शपथ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी (अब सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दी गई थी।

जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ को केंद्र सरकार ने मंगलवार को अपने इस आवेदन से अवगत कराया। जिस पर याचिकाकर्ता की वकील अपर्णा भट्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। भट्ट ने कहा, केंद्र सरकार अपनी शपथ को वापस लेना चाहती है। ऐसे में हमारा पक्ष सुना जाना जरूरी है। यह शपथ इतने समय से चल रही है। उन्होंने कहा, उनकी तरफ से दो दिनों में जवाब दाखिल कर दिया जाएगा। उन्होंने पीठ से मामले पर अगले हफ्ते सुनवाई करने का आग्रह किया।

कॉलेजियम का मिशन भारत की विविधता का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना: सीजेआई
सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एक जन केंद्रित अदालत है न कि बहुभाषी। कॉलेजियम का एक मिशन भारत की समृद्धि व विविधता का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। वह सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से जस्टिस उज्जल भुइयां व जस्टिस एसवीएन भट्टी के अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे।

सीजेआई ने कहा, सक्षम जजों विशेष रूप से उन लोगों को जिन्होंने न्यायपालिका की सेवा के लिए अपने जीवन के वर्षों और दशकों को समर्पित किया हो, को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करना न्याय वितरण को बढ़ाने का एक तरीका है। यह महाराष्ट्र या दिल्ली का सुप्रीम कोर्ट नहीं है। यह भारत का सुप्रीम कोर्ट है और हमारा उद्देश्य यह दिखाना है कि इस अदालत में भारत की विविधता की झलक मिले। सीजेआई ने कहा, अनेक लोग बहुभाषी न्यायालय होने के कारण शीर्ष अदालत की आलोचना करते रहे हैं। लेकिन आइए इसका दूसरा पहलू देखें। हमारे बहुभाषी न्यायालय होने का कारण यह है कि कोई भी दो जज एक जैसे नहीं होते। यहां हमारे पास महाराष्ट्र के एक जज हैं जो हरियाणा के एक मामले का फैसला करने के लिए पश्चिम बंगाल के जज के साथ पीठ साझा कर रहे हैं। यह भारत की शीर्ष अदालत का सच्चा सार है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के प्रत्येक जज कानून के मुद्दों पर निर्णय लेते समय अपने स्वयं के अद्वितीय कानूनी अनुभव और विशेषज्ञता को सामने लाते हैं।

 सुप्रीम कोर्ट ने दिया रोहिंग्या महिला के उपचार का निर्देश
 सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता रोहिंग्या महिला को जीबी पंत और राम मनोहर लोहिया अस्पतालों की चिकित्सा सलाह के अनुसार सभी आवश्यक चिकित्सा उपचार प्रदान करने का निर्देश दिया। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ के समक्ष सोमवार को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने याचिकाकर्ता को दिए गए इलाज समेत मेडिकल कागजात रिकॉर्ड पर रखे।

पीठ ने कहा, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के बयान के संदर्भ में, हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता को जीबी पंत इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च व डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल की दी गई चिकित्सा सलाह के अनुसार सभी आवश्यक चिकित्सा उपचार प्रदान किए जाएंगे। पीठ ने यह भी कहा कि विशेष रूप से मोहम्मद सलीमुल्लाह मामले की कार्यवाही लंबित होने के कारण दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिका वापस ले ली गई थी। याचिकाकर्ता वर्तमान याचिका को मोहम्मद सलीमुल्लाह के साथ टैग करने की मांग नहीं कर रहा है, क्योंकि याचिकाकर्ता के वकील के अनुसार, जो मुद्दे उठाए गए हैं वे अलग हैं। पीठ ने कहा, इसे देखते हुए यह उचित और उपयुक्त है कि दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिका को पुनर्जीवित करने की अनुमति दी जाए क्योंकि वर्तमान याचिका में उठाए गए मुद्दों का निपटारा हाईकोर्ट में किया जा सकता है।

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