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मामला: दिल्ली सरकार की सुप्रीम कोर्ट से शिकायत, शहर में सिविल कर्मचारी नहीं कर रहे आदेश का पालन

Wed, 27 Sep 2023 11:43 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Wed, 27 Sep 2023 11:43 AM IST
सार

दिल्ली सरकार ने संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित केंद्र सरकार के एनसीटीडी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए अदालत से आग्रह किया है।

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शहर में सिविल कर्मचारी सरकार के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं।

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दिल्ली सरकार ने संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित केंद्र सरकार के एनसीटीडी (संशोधन) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली अपनी याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए अदालत से आग्रह किया है। इसपर शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को मामले की रिपोर्ट तैयार करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है। 



 

सनातन धर्म पर दी गई टिप्पणी को लेकर याचिका 

दिल्ली के एक वकील ने सनातन धर्म पर दी गई टिप्पणियों को लेकर केस दर्ज करने के लिए एक याचिका दी थी, जिसपर शीर्ष अदालत सुनवाई के लिए तैयार हो गई है। उसने याचिका को स्वीकार कर लिया है। 

दरअसल, वकील ने सनातन धर्म पर टिप्पणी देने के लिए तमिलनाडु के मंत्री व डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन और सांसद ए राजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग के लिए एक याचिका दी थी।
 

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने इस याचिका से खुद को किया अलग

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से जुड़ी एक याचिका से खुद को अलग कर लिया है। 

दरअसल, शीर्ष अदालत ने चंद्रबाबू नायडू की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने कौशल विकास घोटाला मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का अनुरोध किया है।
 
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छत्तीसगढ़ सरकार ने ईडी की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका वापस ले ली

छत्तीसगढ़ सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र के आधार पर चुनौती देने वाली अपनी याचिका बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली। आयकर विभाग की एक शिकायत पर दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर ईडी ने 2022 में मनी लॉन्ड्रिंग मामला दर्ज किया था। इसमें आरोप था कि छत्तीसगढ़ में कोयले पर लेवी की अवैध वसूली के साथ-साथ भ्रष्ट तरीकों से लोक सेवकों को प्रभावित करने के प्रयास किए गए थे।

छत्तीसगढ़ के स्थायी वकील सुमीर सोढ़ी ने बुधवार को जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ को बताया कि उन्हें याचिका वापस लेने के निर्देश हैं। जिसे पीठ ने स्वीकार कर लिया। ईडी का दावा था कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन में 2019 और 2021 के बीच एक ‘बड़ा घोटाला’ हुआ, जिसके हिस्से के रूप में राजनेताओं, अधिकारियों और अन्य लोगों का एक ‘गठबंधन’ कथित तौर पर अवैध लेवी वसूलने की एक समानांतर प्रणाली चला रहा था। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया था कि ईडी ने बंगलूरू में दर्ज एफआईआर के आधार पर 29 सितंबर, 2022 को रायपुर में प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की और राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू की।

सनातन धर्म मामला: सुप्रीम कोर्ट ने स्टालिन के खिलाफ एफआईआर की याचिका को लंबित मामले से जोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सनातन धर्म पर टिप्पणी मामले में उदयनिधि स्टालिन पर एफआईआर की मांग वाली याचिका को इस तरह की एक अन्य लंबित याचिका के साथ जोड़ दिया। जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ सनातन धर्म पर टिप्पणियों के लिए उदयनिधि स्टालिन और डीएमके नेता ए राजा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दिल्ली के वकील विनीत जिंदल की याचिका बुधवार को पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई। पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, हम नोटिस जारी नहीं करेंगे लेकिन हम इसे टैग करेंगे। तमिलनाडु की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि इस याचिका का उद्देश्य जनहित के नाम पर प्रचार हासिल करना है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने पिछले सप्ताह इसी तरह की प्रार्थना वाली एक अन्य याचिका पर नोटिस जारी किया था और ऐसी दूसरी याचिका की कोई आवश्यकता नहीं है।

शीर्ष कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ जिम्नास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार  
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय जिम्नास्टिक महासंघ (जीएफआई)  की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। साथ ही जीएफआई को गुरुवार को होने वाले खेल निकाय के चुनावों से संबंधित राहत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने यह आदेश दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक सितंबर को वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा की दलीलों पर संज्ञान लिया था, जिन्होंने 2010 में खेल निकायों में सुधार की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि विभिन्न खेल संघों के चुनाव उसके 2022 के फैसले का उल्लंघन करके आयोजित किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री मुरुगन के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही पर रोक लगाई 
 सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति बी आर गवई और पी के मिश्रा की पीठ ने दिसंबर 2020 में एक संवाददाता सम्मेलन में कथित अपमानजनक बयानों के लिए चेन्नई स्थित मुरासोली ट्रस्ट द्वारा दायर शिकायत पर केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के खिलाफ आपराधिक मानहानि की कार्यवाही पर बुधवार को रोक लगा दी। शीर्ष कोर्ट मद्रास उच्च न्यायालय के पांच सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली मुरुगन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में  कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया था। 

शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री मुरुगन के खिलाफ चेन्नई की एक विशेष अदालत में लंबित कार्यवाही पर रोक लगा दी। साथ ही पीठ ने उनकी याचिका पर मुरासोली ट्रस्ट से भी जवाब मांगा। मुरुगन के वकील ने पीठ से कहा कि मानहानि की कार्यवाही शुरू करना "पूरी तरह से अवैध" था और शिकायत राजनीतिक उद्देश्यों से दायर की गई थी। मुरुगन ने अपने खिलाफ कार्यवाही को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी केरल सरकार
केरल सरकार राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों पर हस्ताक्षर करने से राज्यपाल आऱिफ मोहम्मद खान के इनकार के खिलाफ केरल सरकार नाराज है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन इस बात की पुष्टि की है।

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, विस्तृत विचार-विमर्श के बाद विधानसभा द्वारा पारित आठ विधेयक संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किए गए थे। हालांकि, लंबे समय के बाद भी ये बिल कानून नहीं बन पाए हैं। सीएम ने बताया कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर केवल कानूनी उपाय तलाश सकती है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन की राय मांगी थी कि क्या राज्यपाल के पास बिना अनुमति के विधेयकों को अनिश्चित काल तक रोके रखने की शक्ति है। "सरकार शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने और मामले को पेश करने के लिए वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल की सेवा लेने की योजना बना रही है

हस्ताक्षर न करने को लेकर राज्यपाल और सरकार आमने-सामने
बिलों पर हस्ताक्षर नहीं करने के लिए राज्यपाल पर तीखा हमला करते हुए सीएम ने कहा कि आरिफ खान की कार्रवाई औपनिवेशिक युग की याद दिलाती है। राज्यपाल के पास 8 विधेयक लंबित हैं और उनके हस्ताक्षर का इंतजार है और उनमें से तीन एक साल और 10 महीने से पड़े हैं।"संविधान के अनुसार, विधानसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद राज्यपाल उन्हें भेजे गए विधेयकों में अनावश्यक देरी नहीं कर सकते।

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