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SC: सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका पर सुनवाई 12 जुलाई तक स्थगित, पेड़ों की कटाई पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी
Wed, 10 Jul 2024 01:31 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Wed, 10 Jul 2024 01:31 PM IST
सार
तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी सेंथिल बालाजी जो कि पिछले साल जून से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किए गए थे। उनकी जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 12 जुलाई तक स्थगित कर दी है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी सेंथिल बालाजी की जमानत याचिका पर सुनवाई 12 जुलाई तक स्थगित कर दी। उन्हें पिछले साल प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। बता दें कि इससे पहले एक स्थानीय अदालत तीन बार और उच्च न्यायालय उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुके हैं।
बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समय मांगा। इस पर जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले को स्थगित कर दिया। पीठ ने कहा, "इसे 12 जुलाई को सूची के अंत में सूचीबद्ध करें।" वहीं दूसरी ओर वी सेंथिल बालाजी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि मामले में ईडी द्वारा कई स्थगन लिए जा चुके हैं। वहीं शीर्ष अदालत ने 1 अप्रैल को एजेंसी को नोटिस जारी किया था, जिसमें बालाजी की जमानत याचिका पर ईडी से जवाब मांगा था।
बता दें कि 28 फरवरी को मद्रास उच्च न्यायालय ने बालाजी की जमानत याचिका को खारिज कर दी थी। न्यायालय ने कहा था कि अगर उन्हें इस तरह के मामले में जमानत पर रिहा करेंगे तो इससे गलत संकेत जाएगा और यह व्यापक जनहित के खिलाफ होगा। वहीं उनके वकील का तर्क था कि याचिकाकर्ता ने आठ महीने से अधिक समय तक कारावास की सजा काट ली है। इसलिए विशेष अदालत को समय सीमा के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश चाहिए। इस पर उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार दैनिक आधार पर मुकदमा चलाया जाएगा।
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दरअसल, बालाजी को पिछले साल 14 जून को एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। यह मामला नौकरी के लिए नकदी घोटाले से जुड़ा था। मामला तब का है, जब वे एआईएडीएमके सरकार के दौरान परिवहन मंत्री थे। वहीं इस मामले में पिछले साल 12 अगस्त को ईडी ने बालाजी के खिलाफ 3,000 पन्नों का आरोप पत्र दायर किया था। जिसके बाद 19 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने बालाजी की पिछली जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
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बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने समय मांगा। इस पर जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने मामले को स्थगित कर दिया। पीठ ने कहा, "इसे 12 जुलाई को सूची के अंत में सूचीबद्ध करें।" वहीं दूसरी ओर वी सेंथिल बालाजी के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि मामले में ईडी द्वारा कई स्थगन लिए जा चुके हैं। वहीं शीर्ष अदालत ने 1 अप्रैल को एजेंसी को नोटिस जारी किया था, जिसमें बालाजी की जमानत याचिका पर ईडी से जवाब मांगा था।
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बता दें कि 28 फरवरी को मद्रास उच्च न्यायालय ने बालाजी की जमानत याचिका को खारिज कर दी थी। न्यायालय ने कहा था कि अगर उन्हें इस तरह के मामले में जमानत पर रिहा करेंगे तो इससे गलत संकेत जाएगा और यह व्यापक जनहित के खिलाफ होगा। वहीं उनके वकील का तर्क था कि याचिकाकर्ता ने आठ महीने से अधिक समय तक कारावास की सजा काट ली है। इसलिए विशेष अदालत को समय सीमा के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश चाहिए। इस पर उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार दैनिक आधार पर मुकदमा चलाया जाएगा।
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दरअसल, बालाजी को पिछले साल 14 जून को एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। यह मामला नौकरी के लिए नकदी घोटाले से जुड़ा था। मामला तब का है, जब वे एआईएडीएमके सरकार के दौरान परिवहन मंत्री थे। वहीं इस मामले में पिछले साल 12 अगस्त को ईडी ने बालाजी के खिलाफ 3,000 पन्नों का आरोप पत्र दायर किया था। जिसके बाद 19 अक्टूबर को उच्च न्यायालय ने बालाजी की पिछली जमानत याचिका को खारिज कर दिया था।
देश में बाल विवाह में वृद्धि के आरोप की याचिका का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने रखा सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक गैर सरकारी संगठन की जनहित याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस याचिका में आरोप लगाया गया कि बाल विवाह को लेकर बने कानून सरकार ने शब्द और भावनात्मक रूप से लागू नहीं किया।
मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता 'सोसाइटी फॉर एनलाइटनमेंट एंड वॉलंटरी एक्शन' के वकील और केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलें सुनीं। इसके बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र की ओर से दावा किया कि देश में बाल विवाह के मामलों में काफी कमी हुई है।
वहीं इससे पहले शीर्ष अदालत ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को बाल विवाह निषेध अधिनियम को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की विवरण के साथ रिपोर्ट मांगी है।
मामले पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता 'सोसाइटी फॉर एनलाइटनमेंट एंड वॉलंटरी एक्शन' के वकील और केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलें सुनीं। इसके बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने केंद्र की ओर से दावा किया कि देश में बाल विवाह के मामलों में काफी कमी हुई है।
वहीं इससे पहले शीर्ष अदालत ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को बाल विवाह निषेध अधिनियम को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की विवरण के साथ रिपोर्ट मांगी है।
रिज फॉरेस्ट में पेड़ों की कटाई; SC ने दिल्ली पुलिस को जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के एक स्थानीय की तरफ से लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों पर संज्ञान दिया, जिसने रिज फॉरेस्ट में अवैध पेड़ों की कटाई को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है, और इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि दिल्ली के पुलिस अधिकारी दूसरे याचिकाकर्ता- न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी- के बारे में भी पूछताछ कर रहे हैं। शंकरनारायणन ने दावा किया कि पुलिस ने उनके बैंक से भी संपर्क किया है और उनके खातों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। वहीं पीठ ने शंकरनारायणन की दलील पर ध्यान दिया और मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
बता दें कि बिंदु कपूरिया ने अपनी अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि 4 मार्च को डीडीए को इसकी अनुमति देने से इनकार करने वाले अदालती आदेश के बावजूद पेड़ काटे गए और पेड़ों की कटाई के तथ्य को अदालत से छिपाया गया। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए रिज वन में 1100 पेड़ों की कथित कटाई को लेकर डीडीए के उपाध्यक्ष के खिलाफ खुद संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली के एक स्थानीय की तरफ से लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों पर संज्ञान दिया, जिसने रिज फॉरेस्ट में अवैध पेड़ों की कटाई को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है, और इस मुद्दे पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति अभय एस ओका और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि दिल्ली के पुलिस अधिकारी दूसरे याचिकाकर्ता- न्यू दिल्ली नेचर सोसाइटी- के बारे में भी पूछताछ कर रहे हैं। शंकरनारायणन ने दावा किया कि पुलिस ने उनके बैंक से भी संपर्क किया है और उनके खातों के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है। वहीं पीठ ने शंकरनारायणन की दलील पर ध्यान दिया और मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।
बता दें कि बिंदु कपूरिया ने अपनी अवमानना याचिका में आरोप लगाया है कि 4 मार्च को डीडीए को इसकी अनुमति देने से इनकार करने वाले अदालती आदेश के बावजूद पेड़ काटे गए और पेड़ों की कटाई के तथ्य को अदालत से छिपाया गया। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए रिज वन में 1100 पेड़ों की कथित कटाई को लेकर डीडीए के उपाध्यक्ष के खिलाफ खुद संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।
HIV रोगियों के लिए एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की गुणवत्ता करें बैठक-SC
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन और एड्स रोगियों के लिए काम करने वाले एक संगठन के बीच एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की गुणवत्ता और कमी के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक का सुझाव दिया। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ 2022 में एनजीओ नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विद एचआईवी/एड्स की तरफ से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की कमी का आरोप लगाया गया था। कोविड-19 महामारी के दौरान देश में एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की कमी का जिक्र करते हुए, पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और याचिकाकर्ता एनजीओ का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर की दलीलों पर गौर किया और कहा कि अब धूल जम चुकी है और पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। ग्रोवर ने कहा, दवाओं की गुणवत्ता एक बड़ा मुद्दा है। हम इस मुद्दे पर उनके (केंद्र और एनएसीओ) साथ चर्चा करना चाहेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि दवाओं की कोई कमी नहीं है। इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारा सुझाव है कि दो सप्ताह के भीतर वरिष्ठ स्तर पर बैठक आयोजित की जाए। इसके बाद, हम सुझावों को रिकॉर्ड में रखने की अनुमति देंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी चिंताओं का ध्यान रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन और एड्स रोगियों के लिए काम करने वाले एक संगठन के बीच एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की गुणवत्ता और कमी के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक का सुझाव दिया। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ 2022 में एनजीओ नेटवर्क ऑफ पीपल लिविंग विद एचआईवी/एड्स की तरफ से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एचआईवी रोगियों के इलाज के लिए एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की कमी का आरोप लगाया गया था। कोविड-19 महामारी के दौरान देश में एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की कमी का जिक्र करते हुए, पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और याचिकाकर्ता एनजीओ का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर की दलीलों पर गौर किया और कहा कि अब धूल जम चुकी है और पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। ग्रोवर ने कहा, दवाओं की गुणवत्ता एक बड़ा मुद्दा है। हम इस मुद्दे पर उनके (केंद्र और एनएसीओ) साथ चर्चा करना चाहेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि दवाओं की कोई कमी नहीं है। इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारा सुझाव है कि दो सप्ताह के भीतर वरिष्ठ स्तर पर बैठक आयोजित की जाए। इसके बाद, हम सुझावों को रिकॉर्ड में रखने की अनुमति देंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी चिंताओं का ध्यान रखा गया है।
सफेदपोश अपराध है गंभीर चुनौती- न्यायमूर्ति कोहली
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने सेंटर फॉर डिस्कोर्स इन क्रिमिनल एंड कॉन्स्टि्यूशनल जुरिस्प्रूडन्स की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कहा कि सफेदपोश अपराध न्यायपालिका और अर्थतंत्र के लिए गंभीर चुनौती पैदा करते हैं और इससे निपटने के लिए कई तरीके और सूक्ष्म स्तर पर कार्रवाई करने की जरूरत है। शीर्ष न्यायालय की न्यायाधीश ने ऐसे अपराधों को रोकने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने कहा, कि डेटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसी विकसित प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने से सफेदपोश अपराधों का पता लगाने, जांच करने और मुकदमा चलाने की क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने पारंपरिक और सफेदपोश अपराधों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि पारंपरिक अपराध अक्सर क्रोध या बदले की भावनाओं से पैदा होते हैं, और अगर वे सोच-विचार कर किए गए हों, तो उन्हें सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता है और कभी-कभी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की मदद ली जाती है। जबकि इसके विपरीत, सफेदपोश अपराध लोभ से प्रेरित होते हैं और पेशेवरों की सहायता से व्यक्तियों की तरफ से सावधानीपूर्वक योजना बनाकर अंजाम दिए जाते हैं। सफेदपोश अपराध प्रतिष्ठा या वित्तीय क्षति पहुंचाते हैं और पकड़े जाने पर बड़े वित्तीय हानि का पता चलता है। उन्होंने कहा, लेकिन दोनों प्रकार के अपराधों का पीड़ितों और समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने सेंटर फॉर डिस्कोर्स इन क्रिमिनल एंड कॉन्स्टि्यूशनल जुरिस्प्रूडन्स की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कहा कि सफेदपोश अपराध न्यायपालिका और अर्थतंत्र के लिए गंभीर चुनौती पैदा करते हैं और इससे निपटने के लिए कई तरीके और सूक्ष्म स्तर पर कार्रवाई करने की जरूरत है। शीर्ष न्यायालय की न्यायाधीश ने ऐसे अपराधों को रोकने के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने कहा, कि डेटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन जैसी विकसित प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने से सफेदपोश अपराधों का पता लगाने, जांच करने और मुकदमा चलाने की क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने पारंपरिक और सफेदपोश अपराधों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि पारंपरिक अपराध अक्सर क्रोध या बदले की भावनाओं से पैदा होते हैं, और अगर वे सोच-विचार कर किए गए हों, तो उन्हें सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता है और कभी-कभी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की मदद ली जाती है। जबकि इसके विपरीत, सफेदपोश अपराध लोभ से प्रेरित होते हैं और पेशेवरों की सहायता से व्यक्तियों की तरफ से सावधानीपूर्वक योजना बनाकर अंजाम दिए जाते हैं। सफेदपोश अपराध प्रतिष्ठा या वित्तीय क्षति पहुंचाते हैं और पकड़े जाने पर बड़े वित्तीय हानि का पता चलता है। उन्होंने कहा, लेकिन दोनों प्रकार के अपराधों का पीड़ितों और समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।