{"_id":"61bb80c6553c73283d39a812","slug":"supreme-court-makes-transport-ministry-party-seeks-suggestion-to-curb-filing-of-fake-accident-claim-cases","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्जी दुर्घटना दावों का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन मंत्रालय को बनाया पक्षकार, अंकुश लगाने के लिए सुझाव मांगा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
फर्जी दुर्घटना दावों का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने परिवहन मंत्रालय को बनाया पक्षकार, अंकुश लगाने के लिए सुझाव मांगा
Fri, 17 Dec 2021 12:21 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 17 Dec 2021 12:21 AM IST
सार
शीर्ष अदालत अब तक उत्तर प्रदेश में वकीलों द्वारा सैकड़ों फर्जी दावा याचिका दायर करने की जांच से संबंधित कई आदेश पारित कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कहा कि प्रतिक्रिया या सुझाव मिलने के बाद शीर्ष अदालत इस मामले में निर्देश जारी कर सकती है, जो पूरे भारत में लागू होंगे।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय परिवहन मंत्रालय को एक मामले में एक पक्ष बनाया और उसे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण और कामगार मुआवजा कानूनों के तहत झूठे दावों को दर्ज करने के खतरे को रोकने के लिए “उपचारात्मक और निवारक उपाय” सुझाने का निर्देश दिया। फर्जी मोटर दुर्घटना दावों से बीमा कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
शीर्ष अदालत अब तक उत्तर प्रदेश में वकीलों द्वारा सैकड़ों फर्जी दावा याचिका दायर करने की जांच से संबंधित कई आदेश पारित कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कहा कि प्रतिक्रिया या सुझाव मिलने के बाद शीर्ष अदालत इस मामले में निर्देश जारी कर सकती है, जो पूरे भारत में लागू होंगे।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने यूपी एसआईटी को ऐसे मामलों के बारे में "विभिन्न बीमा कंपनियों से पहले से प्राप्त शिकायतों के संबंध में जांच में तेजी लाने का आदेश दिया और इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की अनुशासनात्मक समितियों ने फर्जी मामले दर्ज करने में कथित रूप से शामिल 27 आरोपी वकीलों को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
पीठ ने अपने आदेश में कहा, "हम उत्तर प्रदेश बार काउंसिल द्वारा 22 सितंबर को या उसके बाद उठाए गए कदमों की सराहना करते हैं, यह उत्तर प्रदेश में कानूनी पेशे की शुद्धता को बनाए रखने में सुनिश्चित करेगा। हम चाहते हैं कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया / बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश कानून के अनुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही जल्द से जल्द समाप्त करे।"
पीठ ने आगे कहा कि "हमारी राय है कि कोई और निर्देश जारी होने से पहले, हमारे पास परिवहन मंत्रालय, भारत सरकार से प्रतिक्रिया मिले ताकि झूठे/धोखाधड़ी दावा याचिका दायर करने के खतरे को रोकने के लिए उपचारात्मक और निवारक उपायों के लिए उनके सुझाव मिल सकें। तदनुसार, हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि वह परिवहन मंत्रालय, भारत सरकार को एक पक्षकार-प्रतिवादी के रूप में पेश करे और नोटिस जारी करे।"
पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज को परिवहन मंत्रालय की ओर से पेश होने और झूठे दावा याचिका दायर करने के खतरे को रोकने के लिए सहायता और सुझाव देने के लिए कहा और मामले को 25 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। पीठ ने अपने आदेश में जांच में हुई प्रगति पर एसआईटी द्वारा साझा की गई जानकारी को भी नोट किया।
"स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि एसआईटी को अब तक यूपी के विभिन्न जिलों से संदिग्ध दावों के कुल 1,376 मामले प्राप्त हुए हैं ... अब तक संदिग्ध दावों के 247 मामलों की जांच में कुल 198 आरोपी व्यक्ति प्रथम दृष्टया में संज्ञेय अपराध के दोषी पाए गए हैं। उसके अनुसार विभिन्न जिलों में कुल 92 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं और 55 मामलों में 28 अधिवक्ताओं को आरोपी बनाया गया है। एसआईटी ने कहा कि 25 मामलों में अब तक 11 अधिवक्ताओं के खिलाफ आरोपपत्र संबंधित निचली अदालत को भेजे जा चुके हैं।