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Supreme Court: उद्यमी आहलुवालिया के खिलाफ दूसरी एफआईआर रद्द नहीं होगी, सुप्रीम कोर्ट का इन्कार
Tue, 24 Dec 2024 08:11 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Tue, 24 Dec 2024 08:11 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : पीटीआई
सुप्रीम कोर्ट ने केजेएस सीमेंट (आई) लि. के निदेशक पवन कुमार आहलुवालिया और अन्य के खिलाफ दर्ज दूसरी एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया। आरोपियों के खिलाफ वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हुआ
कंपनी के दिवंगत संस्थापक केजेएस आहलुवालिया की बेटी हिमांगिनी सिंह ने दूसरी एफआईआर दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने पवन और अन्य निदेशकों पर कंपनी के पैसों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। आरोपियों के ऐसा करने से कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। पहले दर्ज एफआईआर में आरोप अलग थे। वहीं दूसरी एफआईआर में नए विवरण और निदेशकों पर अतिरिक्त कदाचार का आरोप लगाया गया।
‘दोहरे खतरे’ के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं
इससे पहले 29 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने दूसरी एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया था और फैसला सुनाया था कि यह पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद सामने आए नए तथ्यों पर आधारित है। कोर्ट ने कहा था कि दोनों एफआईआर में कथित कदाचार के विभिन्न पहलुओं का जिक्र है और इसमें ‘दोहरे खतरे’ के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं किया गया है, जो एक ही अपराध के लिए कई आरोप लगाने पर रोक लगाता है।
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जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में सुनवाई
पवन कुमार अहलूवालिया ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने चुनौती याचिका को खारिज कर दिया और प्रभावी रूप से दूसरी एफआईआर को बरकरार रखा।
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कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हुआ
कंपनी के दिवंगत संस्थापक केजेएस आहलुवालिया की बेटी हिमांगिनी सिंह ने दूसरी एफआईआर दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने पवन और अन्य निदेशकों पर कंपनी के पैसों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। आरोपियों के ऐसा करने से कंपनी को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। पहले दर्ज एफआईआर में आरोप अलग थे। वहीं दूसरी एफआईआर में नए विवरण और निदेशकों पर अतिरिक्त कदाचार का आरोप लगाया गया।
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‘दोहरे खतरे’ के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं
इससे पहले 29 अक्तूबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने दूसरी एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया था और फैसला सुनाया था कि यह पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद सामने आए नए तथ्यों पर आधारित है। कोर्ट ने कहा था कि दोनों एफआईआर में कथित कदाचार के विभिन्न पहलुओं का जिक्र है और इसमें ‘दोहरे खतरे’ के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं किया गया है, जो एक ही अपराध के लिए कई आरोप लगाने पर रोक लगाता है।
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जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ में सुनवाई
पवन कुमार अहलूवालिया ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस बेला त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने चुनौती याचिका को खारिज कर दिया और प्रभावी रूप से दूसरी एफआईआर को बरकरार रखा।