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कठुआ कांड: पुलिस को आठ हफ्ते में चार्जशीट दायर करने का निर्देश, बंद कमरे में होगा ट्रायल

Tue, 10 Jul 2018 03:55 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली 
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली  Updated Tue, 10 Jul 2018 03:55 AM IST
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Supreme Court issues important orders in Kathua gang rape case
फाइल फोट

सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ गैंगरेप व हत्या मामले में सोमवार को कई अहम आदेश जारी किए। शीर्ष अदालत ने इस मामले में जम्मू एवं कश्मीर पुलिस को आठ हफ्ते के भीतर पूरक चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही पीठ ने एक बार फिर दोहराया कि ट्रायल बंद कमरे में होगा। 

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पीठ ने ट्रायल कोर्ट को इसके लिए पर्याप्त इंतजाम करने के लिए कहा है। मालूम हो कि पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने इस मामले का ट्रायल कठुआ से पठानकोट की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने असाधारण परिस्थिति का हवाला देते हुए आरोपियों को कठुआ जेल से गुरुदासपुर जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। पीठ ने आरोपियों के वकील और केंद्र सरकार की उस दलील को नकार दिया कि बिना आरोपियों को पक्ष सुने ऐसा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि आरोपियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। 
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शीर्ष अदालत ने इस मामले में किसी भी अदालत को कोई अन्य याचिका पर सुनवाई न करने का निर्देश दिया था। अपने इस फैसले में संशोधन करते हुए पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट होने पर दोनों पक्ष पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं।
 
सुनवाई के दौरान जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने पीठ को सीलबंद लिफाफ में जांच की स्थिति रिपोर्ट सौंपी। राज्य पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि जांच का काम जारी है और पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी। उन्होंने बताया कि छह से आठ हफ्ते में पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। इस पर पीठ न राज्य पुलिस को आठ हफ्ते में चार्जशट दाखिल करने का आदेश दिया है। 

पीठ ने ट्रायल जज और अभियोजन अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कहा है। पीठ ने सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अगर परिजन आरोपियों से मिलना चाहते हो तो वह इसकी व्यवस्था कराए।  

आरोपियों को जेल ट्रांसफर का नोटिस नहीं 

Supreme Court issues important orders in Kathua gang rape case

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने कहा कि आरोपियों को एक जेल से दूसरी जेल में ट्रांसफर करने से पहले नोटिस दिया जाना चाहिए। 

आरोपियों को कठुआ जेल से गुरदासपुर जेल में ट्रांसफर करने के मामले में निष्पक्षता नहीं बरती गई है। आरोपियों को इसमें अपना पक्ष रखने का एक मौका मिलना चाहिए। कुछ आरोपियों के वकील ने कहा कि परिजनों के लिए गुरदासपुर जेल जाना मुश्किल हो जाएगा।

बंद कमरे में होगी सुनवाई 

पीठ ने कहा कि पठानकोट जिला एवं सत्र अदालत में सुनवाई के दौरान सिर्फ जज, आरोपियों के वकील, सरकारी वकील और कोर्ट स्टाफ ही मौजूद रहेंगे। सुनवाई बंद कमरे में होगी। 

वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने आरोप लगाया कि अदालत कक्ष में आरोपियों इतने सारे वकीलों की मौजूदगी से निष्पक्ष सुनवाई में दिक्कत आती है। बयान दर्ज करने आने वाले गवाहों को भी इससे खतरा महसूस होता है। 

इस मामले में कम से कम 50 वकील आरोपियों का बचाव कर रहे हैं। उन्होंने अपील की कि अदालत को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये आरोपियों का बयान दर्ज करना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि वीडियो कांफ्रेंसिंग की जरूरत नहीं है। 

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