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Supreme Court: जघन्य अपराधों पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, कहा- जरूरी हैं अधिक समर्पित एनआईए अदालतें
Fri, 05 Sep 2025 07:18 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 05 Sep 2025 07:18 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने जघन्य अपराधों की तेजी से सुनवाई के लिए और समर्पित एनआईए अदालतों की जरूरत बताई। कोर्ट ने कहा, कुछ अपराधी न्याय प्रणाली को हाईजैक कर मुकदमे में देरी कराते हैं, जिससे अदालतें मजबूरी में जमानत देती हैं। केंद्र ने बताया कि राज्यों से परामर्श चल रहा है और जल्द फैसला होगा। कोर्ट ने समयबद्ध सुनवाई को समाज के हित में बताया।
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सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने जघन्य अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए और अधिक समर्पित एनआईए अदालतों की आवश्यकता पर जोर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, जघन्य अपराध करने वाले अपराधी न्याय प्रणाली को हाईजैक करने और अदालतों पर जमानत देने के दबाव डालने की कोशिश करते हैं।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी ने बताया कि केंद्र समर्पित एनआईए अदालतें स्थापित करने के लिए राज्यों के साथ परामर्श कर रहा है। इस संबंध में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। पीठ ने भाटी से कहा कि जघन्य अपराधों में समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी करना समाज के हित में है और यह दुर्दांत अपराधियों के लिए निवारक का काम करता है। यह आपके लिए प्रोत्साहन का एक अवसर है। कभी-कभी ये दुर्दांत अपराधी पूरी न्याय व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं और मुकदमे को पूरा नहीं होने देते, जिसके परिणामस्वरूप अदालतें देरी के आधार पर उन्हें जमानत देने के लिए मजबूर हो जाती हैं।
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भाटी ने कहा, राज्यों को भी इस मामले में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी अदालतें स्थापित करने का अधिकार उनके पास है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, केंद्र को सिर्फ आवश्यक बजट आवंटन और हाईकोर्ट की सहमति की जरूरत है, जबकि राज्य सरकारों की भूमिका पर बाद में विचार किया जा सकता है। भाटी ने पीठ को एक लंबित प्रस्ताव के बारे में बताया, जिसके तहत 1 करोड़ रुपये गैर-आवर्ती व्यय के रूप में आवंटित किए जाएंगे। 60 लाख रुपये आवर्ती व्यय के रूप में होंगे, जिसमें राज्य ऐसे न्यायालयों के लिए भूमि और भवन का खर्च वहन करेंगे। पीठ ने इसके बाद अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को तय कर दी।
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जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी ने बताया कि केंद्र समर्पित एनआईए अदालतें स्थापित करने के लिए राज्यों के साथ परामर्श कर रहा है। इस संबंध में जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। पीठ ने भाटी से कहा कि जघन्य अपराधों में समयबद्ध तरीके से सुनवाई पूरी करना समाज के हित में है और यह दुर्दांत अपराधियों के लिए निवारक का काम करता है। यह आपके लिए प्रोत्साहन का एक अवसर है। कभी-कभी ये दुर्दांत अपराधी पूरी न्याय व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं और मुकदमे को पूरा नहीं होने देते, जिसके परिणामस्वरूप अदालतें देरी के आधार पर उन्हें जमानत देने के लिए मजबूर हो जाती हैं।
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भाटी ने कहा, राज्यों को भी इस मामले में शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसी अदालतें स्थापित करने का अधिकार उनके पास है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, केंद्र को सिर्फ आवश्यक बजट आवंटन और हाईकोर्ट की सहमति की जरूरत है, जबकि राज्य सरकारों की भूमिका पर बाद में विचार किया जा सकता है। भाटी ने पीठ को एक लंबित प्रस्ताव के बारे में बताया, जिसके तहत 1 करोड़ रुपये गैर-आवर्ती व्यय के रूप में आवंटित किए जाएंगे। 60 लाख रुपये आवर्ती व्यय के रूप में होंगे, जिसमें राज्य ऐसे न्यायालयों के लिए भूमि और भवन का खर्च वहन करेंगे। पीठ ने इसके बाद अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को तय कर दी।
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