फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme court Hearing On Bulldozer Action In Uttar pradesh, UP demolition drive

Bulldozer Case: सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर की कार्रवाई रोकने से किया इनकार, अब 10 अगस्त को अगली सुनवाई

Wed, 13 Jul 2022 01:40 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 13 Jul 2022 01:40 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में  बुलडोजर कार्रवाई मामले में सुनवाई के दौरान जमीयत के वकील दुष्यंत दवे ने दलील देते हुए कहा कि देश में एक समुदाय के खिलाफ पिक एंड चॉइस की तरह बर्ताव हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक समुदाय के न्याय के लिए निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही है।

विज्ञापन
Supreme court Hearing On Bulldozer Action In Uttar pradesh, UP demolition drive
फाइल फोटो - फोटो : ट्विटर

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में हिंसक प्रदर्शन में शामिल लोगों की संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई रोकने का अंतरिम आदेश देने से इन्कार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा, अगर अवैध निर्माण है तो निगम या परिषद उस पर कार्रवाई करने के लिए अधिकृत हैं, ऐसे में हम उस अवैध निर्माण के विध्वंस पर सर्वग्राही आदेश कैसे पारित कर सकते हैं। 

विज्ञापन


जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने कहा, कोई भी इस पर विवाद नहीं कर सकता कि कानून के शासन का पालन किया जाना चाहिए। लेकिन क्या हम एक सर्वग्राही आदेश पारित कर सकते हैं? अगर हम ऐसा आदेश पारित करते हैं तो क्या हम अधिकृत विभाग को कानून के अनुरूप कार्रवाई करने से नहीं रोकेंगे। पीठ मुस्लिम संस्था जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों की सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी कि आरोपित अभियुक्तों की संपत्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाया जाए। पीठ ने सभी पक्षों से दलीलें पूरी करने को कहा। साथ ही कहा कि वह 10 अगस्त को विध्वंस के खिलाफ जमीयत उलमा-ए-हिंद की याचिका पर सुनवाई करेगी।
विज्ञापन


याचिकाकर्ता के वकील की दलील: यह असाधारण रूप से गंभीर आपको फैसला लेना ही होगा
जमीयत के वकील दुष्यंत दवे ने कहा, यह बेहद गंभीर मामला है। एक अखबार में ऐसी खबर थी कि असम में हत्या के एक आरोपी के घर को नष्ट कर दिया गया। हम ऐसी संस्कृति नहीं चाहते। आपको एक बार फैसला लेना ही होगा, जो सब पर लागू हो। उनको (विभागों को) कानून के हिसाब से कार्रवाई करनी ही होगी। वे नगरपालिका कानूनों का फायदा नहीं उठा सकते और सिर्फ किसी अपराध में आरोपी होने के कारण व्यक्ति के घर को नहीं गिरा सकते। यह देश इसकी अनुमति नहीं दे सकता। हम ऐसे समाज का हिस्सा हैं, जहां कानून का शासन है। यही संविधान की मूल संरचना है। दवे ने कहा, इस पर सुनवाई होनी चाहिए और निपटारा भी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


यह एक विशेष समुदाय के लोगों के खिलाफ ‘पिक एंड चूज’ की नीति है
दवे ने एक समुदाय विशेष के लोगों के खिलाफ अपनाई गई ‘पिक एंड चूज’ नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने चयनात्मक कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा, पूरा सैनिक फार्म अवैध है, लेकिन पिछले 50 सालों में किसी ने इसे छुआ तक नहीं। एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से वकील सीयू सिंह ने कहा, दिल्ली में भी यथास्थिति के आदेश के बावजूद जहांगीरपुरी में यही तरीका अपनाया गया। 

यूपी सरकार का तर्क: आप दंगे में शामिल थे सिर्फ इसलिए अवैध निर्माण पर कार्रवाई में संरक्षण नहीं मांग सकते 
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस वक्त याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलों पर आपत्ति जताते हुए कहा, संबंधित विभाग अपने जवाब में बता चुके हैं कि पूरी प्रक्रिया का पालन हुआ और नोटिस भी जारी किए गए। विध्वंस की कार्रवाई कथित दंगों से बहुत पहले शुरू हुई थी। अब चूंकि आप दंगों में शामिल थे, सिर्फ इसलिए अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई में संरक्षण नहीं मांग सकते। 
यहां सभी भारतीय हैं, किसी समुदाय आधारित जनहित याचिकाओं पर विचार नहीं होना चाहिए
मेहता ने कहा, प्रभावित लोग पहले ही हाईकोर्ट की शरण ले चुके हैं। ऐसे में इसे अनावश्यक सनसनीखेज बनाने से बचना चाहिए। यहां सभी समुदाय भारतीय हैं और हमें किसी समुदाय आधारित जनहित याचिकाओं पर विचार नहीं करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट यह आदेश नहीं दे सकता कि गैरकानूनी होने पर आरोपी का घर न तोड़ें
यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा, कानून के शासन पर काफी शक्तिशाली तर्क हो गया है। लेकिन तथ्यात्मक पक्ष थोड़ा अस्थिर है। सुप्रीम कोर्ट यह आदेश कतई पारित नहीं कर सकता कि नगर पालिका कानून के खिलाफ होने पर भी एक आरोपी के घर को तोड़ा नहीं जा सकता। 


जमीयत की याचिका पर यूपी सरकार का लिखित जवाब 
सुप्रीम कोर्ट में जमीयत की याचिका पर अपने लिखित जवाब में यूपी सरकार ने कहा, जमीयत-उलमा-ए-हिंद की याचिकाएं अवैध अतिक्रमणों को बचाने के लिए ‘प्रॉक्सी मुकदमेबाजी’ के अलावा और कुछ नहीं हैं। यूपी सरकार ने आवेदक की ओर से राज्य के सर्वोच्च सांविधानिक पदाधिकारियों के नाम लेकर और स्थानीय विकास प्राधिकरण के वैध कार्यों को ‘सामूहिक प्रतिशोध’ की एक विधि के रूप में गलत तरीके से ‘चस्पा’ करने के प्रयास पर सख्त आपत्ति जताई। राज्य सरकार ने कहा, अदालतों को गुमराह करने के लिए विध्वंस के खिलाफ याचिका दायर की गई है क्योंकि किसी भी प्रभावित पक्ष ने न्यायिक मंच से संपर्क नहीं किया था। आवेदक द्वारा सहारनपुर में एक नाबालिग को गिरफ्तार करने के दावे पर यूपी सरकार ने कहा, उसने न तो नाबालिग होने का दावा किया है और न ही कोई दस्तावेज पेश किया है। आवेदक की ओर से मामले को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की जा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed