{"_id":"589ac7b74f1c1b9452379fc9","slug":"supreme-court-has-issued-a-contempt-notice-to-a-sitting-high-court-judge-c-s-karnan","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार HC जज के खिलाफ जारी की अवमानना नोटिस","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार HC जज के खिलाफ जारी की अवमानना नोटिस
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 08 Feb 2017 01:01 PM IST
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने इतिहास में पहली बार एक वर्तमान हाईकोर्ट जज के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार किसी वर्तमान जज के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही की शुरुआत की है।
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को आदेश दिया है कि जब तक मामले की सुनवाई चल रही है तब तक जस्टिस केसी कर्नन को किसी भी प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया से दूर रखा जाए। बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट के जज केसी कर्नन ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई जजों पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
करीब दो हफ्ते पहले जस्टिस कर्नन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर यह जानना चाहा था कि न्यायपालिका में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने संबंधी उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर क्या कार्रवाई हुई।
विज्ञापन
पत्र में जस्टिस कर्नन ने शरुआती तौर पर 20 भ्रष्ट जजों की सूची सौंपी थी। मद्रास हाईकोर्ट में जज रहने के दौरान भी जस्टिस कर्नन विवादों में रह चुके हैं। जस्टिस कर्नन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा किए गए तबादले पर उन्होंने खुद ही रोक लगा दी थी।
इतना ही नहीं उन्होंने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केखिलाफ भी मुकदमे की शुरुआत कर दी थी। बाद में इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा था।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को आदेश दिया है कि जब तक मामले की सुनवाई चल रही है तब तक जस्टिस केसी कर्नन को किसी भी प्रकार की न्यायिक प्रक्रिया से दूर रखा जाए। बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट के जज केसी कर्नन ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई जजों पर कथित तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।
विज्ञापन
करीब दो हफ्ते पहले जस्टिस कर्नन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर यह जानना चाहा था कि न्यायपालिका में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने संबंधी उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर क्या कार्रवाई हुई।
विज्ञापन
पत्र में जस्टिस कर्नन ने शरुआती तौर पर 20 भ्रष्ट जजों की सूची सौंपी थी। मद्रास हाईकोर्ट में जज रहने के दौरान भी जस्टिस कर्नन विवादों में रह चुके हैं। जस्टिस कर्नन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा किए गए तबादले पर उन्होंने खुद ही रोक लगा दी थी।
इतना ही नहीं उन्होंने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केखिलाफ भी मुकदमे की शुरुआत कर दी थी। बाद में इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ा था।