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Supreme Court: 'जम्मू-कश्मीर में हो रहा विकास, वहां की 99.99% जनता भारत सरकार के साथ'; शीर्ष कोर्ट में केंद्र

Sat, 11 Oct 2025 01:58 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Sat, 11 Oct 2025 01:58 AM IST
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Supreme Court has given Centre four weeks to respond to issue of granting statehood to Jammu and Kashmir
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

 

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 केंद्र सरकार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने के मामले में केंद्र सरकार वहां की सरकार से परामर्श कर रही है। जम्मू-कश्मीर क्षेत्र ने प्रगति की है और सभी खुश हैं। वहां के 99.99 प्रतिशत लोग भारत सरकार को अपनी सरकार मानते हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट के सामने यह बात कही। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली कई याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को और चार सप्ताह का समय दे दिया।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले का संदर्भ देते हुए कहा, सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही केंद्र निर्णय ले सकता है...देखिए पहलगाम में क्या हुआ था। अदालत ने 14 अगस्त को केंद्र से इस मामले में याचिका पर जवाब देने को कहा था। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए और एक निर्वाचित सरकार बनी। मेहता ने कहा कि पिछले छह वर्षों में जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। लोग खुश हैं। उन्होंने दलील दी कि हाल के दिनों में पहलगाम हमले सहित कुछ घटनाएं हुई हैं और राज्य का दर्जा बहाल करने पर अंतिम निर्णय लेने से पहले इन सभी घटनाओं पर विचार करना होगा।

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उन्होंने याचिकाओं पर जवाब देने के लिए और समय मांगा। जिसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर जवाब देने के लिए केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया।

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 2023 के केंद्र के वचन की याद दिलाई
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि शीर्ष अदालत के आदेश में यह उल्लेख किया गया है कि चुनावों के बाद राज्य का दर्जा वापस कर दिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर, 2023 के फैसले में केंद्र की ओर से दर्ज एक वचनबद्धता का हवाला दिया, जिसमें सरकार ने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था। 11 दिसंबर, 2023 के इस फैसले में संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा था। उस अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्राप्त था। अदालत ने आदेश दिया था कि केंद्र शासित प्रदेश में सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराए जाएं और इसका राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल किया जाए।

 केंद्र ने गंभीर वचन दिया था लेकिन कई कारकों पर विचार करना होगा
मेहता ने कहा, यह एक अनूठी समस्या है और इसमें व्यापक चिंताएं शामिल हैं। बेशक, यह एक गंभीर वचनबद्धता थी लेकिन कई कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग एक विशिष्ट नैरेटिव फैला रहे हैं और केंद्र शासित प्रदेश की एक भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। हालांकि स्थिति यह है कि जम्मू-कश्मीर के 99.99 फीसदी लोग सरकार के साथ हैं।

 

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