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SC: वर्शिप एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को जवाब देने के लिए समय दिया

Tue, 11 Jul 2023 03:08 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 11 Jul 2023 03:08 PM IST
सार

Supreme Court: मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने वर्शिप एक्ट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जवाब देने के लिए और समय दिया है।
 

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Supreme Court grants time to Centre to file reply on pleas that challenging Places of Worship act
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र को 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 31 अक्तूबर तक का समय दिया है। दरअसल, वर्शिप एक्ट किसी भी पूजा स्थल को फिर से प्राप्त करने या उसमें बदलाव करने के लिए मुकदमा दायर करने पर रोक लगाता है।
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इससे पहले मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों को सुना। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सरकार एक व्यापक जवाब दाखिल करने पर विचार कर रही है। सॉलिसिटर जनरल की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने केंद्र को मामले में दायर याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 31 अक्टूबर तक का समय दिया।
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याचिकाओं पर हो अंतिम सुनवाई
दूसरी ओर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, 'केंद्र मामले में देरी करवा रहा है। इसलिए कोर्ट को चाहिए कि वह इन याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें।' इस पर पीठ ने कहा, 'केंद्र मामले को स्थगित करने की मांग कर रहा है। उन्हें जवाबी हलफनामा दायर करने दें। देखते हैं उसमें क्या है।'
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कोर्ट ने पहले भी केंद्र से मांगा था जवाब
बता दें कि इससे पहले नौ जनवरी को शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कुछ प्रावधानों के खिलाफ जनहित याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था। इसके लिए कोर्ट ने केंद्र को फरवरी के अंत तक का समय दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने छह याचिकाएं सीज कीं
गौरतलब है उच्चतम न्यायालय ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ दायर वकील अश्विनी उपाध्याय और पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की जनहित याचिकाओं सहित छह याचिकाओं को सीज कर लिया है। अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका में विनती की है कि पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 की धारा 2, 3, 4 को रद्द कर दिया जाए।

असंवैधानिक है प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट
इतना ही नहीं उपाध्याय ने यह भी दावा किया कि पूरा कानून असंवैधानिक है। वहीं, स्वामी चाहते हैं कि अदालत कुछ प्रावधानों को 'रीड डाउन' करे, ताकि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद पर हिंदू अपना दावा कर सकें।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के वकील ने क्या कहा?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से पेश हुए वकील एजाज मकबूल ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक मामले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस में भी पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का हवाला दिया  है। ऐसे में इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।


क्या है प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट?
प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को 1991 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार के समय बनाया गया था। इस कानून के तहत 15 अगस्त 1947 से पहले मौजूद किसी भी धर्म की उपासना स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। इस कानून के मुताबिक आजादी के समय जो धार्मिक स्थल जैसा था वैसा ही रहेगा और उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है।
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