Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को राहत, चुनाव कानून के उल्लंघन को लेकर UP में कार्यवाही पर बढ़ाई रोक
केजरीवाल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के एक आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। दरअसल, लखनऊ पीठ ने पिछले महीने सुल्तानपुर में एक निचली अदालत के समक्ष लंबित आपराधिक मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राहत देते हुए उनके खिलाफ यूपी में चुनाव कानून के उल्लंघन को लेकर कार्यवाही करने पर लगी रोक को बढ़ा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल के खिलाफ 2014 के संसदीय चुनाव प्रचार के दौरान उत्तर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में कार्यवाही पर लगी अंतरिम रोक बढ़ा दी है।
केजरीवाल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के एक आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। दरअसल, लखनऊ पीठ ने पिछले महीने सुल्तानपुर में एक निचली अदालत के समक्ष लंबित आपराधिक मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने से इनकार कर दिया था। प्राथमिकी में, केजरीवाल पर जनप्रतिनिधित्व (आरपी) अधिनियम, 1951 की धारा 125 के तहत अपराध का आरोप लगाया गया था, जो चुनाव के दौरान वर्गों के बीच दुश्मनी या नफरत को बढ़ावा देने से संबंधित है।
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न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने उत्तरदाताओं की ओर से किसी की उपस्थित नहीं होने के बाद मामले की सुनवाई मई के पहले सप्ताह में तय की है। पीठ ने कहा, इस मामले में अंतरिम आदेश जारी रहेगा। मामले में केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी पेश हुए।
केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर कहा था, 'जो कांग्रेस को वोट देगा, मेरा मानना होगा, देश के साथ गद्दारी होगी... जो भाजपा को वोट देगा उसे खुदा भी माफ नहीं करेगा।'
अधिवक्ता विवेक जैन के माध्यम से शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में केजरीवाल ने कहा कि याचिका कानून के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या अधिनियम की धारा 125 के तहत कोई वीडियो क्लिप या अभियुक्त द्वारा दिए गए कथित भाषण की पूरी प्रतिलिपि के बिना मामला दायर किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि आप नेता के कथित बयान के दो दिन बाद चार मई 2014 को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
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याचिका में कहा गया है कि उक्त विलंबित शिकायत में केवल आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। हालांकि, पुलिस ने उसी दिन धारा 125 आरपी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की। यह पुलिस द्वारा किसी स्वतंत्र जांच के बिना किया गया था। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि यह कार्रवाई पक्षपात और पुलिस द्वारा जल्दबाजी में की गई। इसमें आगे कहा गया है कि केवल भगवान (खुदा) का उल्लेख नागरिकों के विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता और घृणा को बढ़ावा देने के लिए नहीं हो सकता है। याचिकाकर्ता द्वारा कथित बयान किसी विशेष जाति या धर्म का उल्लेख नहीं करता है और इसलिए किसी भी तरह की कल्पना से ऐसा कथित बयान विभिन्न वर्गों के नागरिकों के बीच दुश्मनी या नफरत की भावना को बढ़ावा नहीं दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की यूपी सरकार की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस दुष्कर्म पीड़िता के परिवार के सदस्यों को स्थानांतरित करने और उसके परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने पर विचार करने के आदेश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका सोमवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जेबी पारदीवाला की पीठ ने इस तथ्य पर आश्चर्य व्यक्त किया कि राज्य ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी।
उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) गरिमा प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राज्य सरकार पीड़ितों के परिवार के सदस्यों को स्थानांतरित करने के लिए तैयार है, लेकिन वे नोएडा या गाजियाबाद या दिल्ली में स्थानांतरित होना चाहते हैं। उन्होंने परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने के सवाल पर कहा कि क्या बड़े और विवाहित भाई को पीड़िता के "आश्रित" के रूप में माना जा सकता है, यह कानून का सवाल है जिसपर विचार किया जाना है। इस पर पीठ ने कहा कि वह मामले के "विशेष तथ्यों और परिस्थितियों" पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं है।
सीजेआई ने प्रसाद से कहा, ये परिवार को दी जाने वाली सुविधाएं हैं। हमें दखल नहीं देना चाहिए। राज्य को इन मामलों में नहीं आना चाहिए।जब एएजी ने अनुरोध किया कि कानून के सवाल को खुला रखा जाए, तो सीजेआई ने कहा कि आदेश में निर्दिष्ट किया गया था कि यह मामले के विशेष तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए पारित किया गया था।
14 सितंबर, 2020 को पीड़िता के गांव के चार पुरुषों द्वारा कथित रूप से दुष्कर्म किए जाने के एक पखवाड़े बाद 19 वर्षीय पीड़िता की दिल्ली के एक अस्पताल में मौत हो गई थी।
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