{"_id":"62278445f3df3f5edf77d66c","slug":"supreme-court-expresses-displeasure-over-ongc-s-argument-exorbitant-fee-recovery-by-intermediaries","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: मध्यस्थों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूली, ओएनजीसी के तर्क पर अदालत ने जताई नाखुशी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: मध्यस्थों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूली, ओएनजीसी के तर्क पर अदालत ने जताई नाखुशी
Tue, 08 Mar 2022 09:58 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 08 Mar 2022 09:58 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थों को पक्षों द्वारा उनकी सहमति में तय शुल्क लेना चाहिए और पीठ को एकसमान दिशा-निर्देश बनाने चाहिए।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओएनजीसी की इस दलील पर नाखुशी जताई कि मध्यस्थ अत्यधिक और मनमाना शुल्क की वसूली कर रहे हैं। चीफ जस्टिस एन वी रमना, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति के के वेणुगोपाल की पीठ ने कहा कि क्या हमें यह कहना चाहिए कि किसी मध्यस्थ को बिना पैसा लिए काम करना चाहिए। इससे तो बेहतर है कि मध्यस्थता प्रणाली बंद कर दी जाए।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थों को पक्षों द्वारा उनकी सहमति में तय शुल्क लेना चाहिए और पीठ को एकसमान दिशा-निर्देश बनाने चाहिए। पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल, बहुत विनम्रता से आपसे कहना चाहते हैं कि जिस तरह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम काम कर रहे हैं, वह सराहनीय नहीं है। मध्यस्थ इस प्रक्रिया में खुद का पक्ष नहीं रख सकते, महज इसलिए आप पूर्वाग्रह की बात नहीं कर सकते। नियुक्ति के समय ही आपको कहना होगा कि आप शुल्क से सहमत नहीं हैं।
विज्ञापन